गांव वालों, खबरदार डाकू आ गए !
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कल रात को स्टैट काऊंटर पर अपने चिट्ठे का हिसाब-किताब देखने गया तो देखा कि इन्कमिंग लिंक्स में एक लिंक lyspick.com से आ रहा था। मैं हैरान हुआ ये हमारे चिट्ठे का उधर किधर लिंक है। जाकर देखा तो एक रंग-बिरंगी सुन्दर सी साइट है जिस पर कुछ चिट्ठाकारों के बांई साइड में लिंक हैं और बीच में उनकी कुछ पोस्टें। एक बार शक भी हुआ कि इतने कम चिट्ठे क्यों हैं अब भई हमने सोचा कि ये कोई नारद जैसा जुगाड़ आया है अभी शुरु हुआ होगा इसलिए कम चिट्ठे हैं। एकबार खुशी भी हुई कि हमारा चिट्ठा बहुत जल्दी शामिल कर लिया। पता करना चाहा कि कौन हैं ये नए हिन्दी-सेवक लेकिन जी साइट पर कहीं भी About US जैसी चीज ही नहीं फिर खूब ढूंढा तो देखा कि About Us तो छोड़ो कोई ढंग से कंपनी, संस्था वगैरा का नाम पता भी नहीं। बस उस्सी टैम अपुन को ये शक हो गया कि ये तो कोई फुल्ली-फालतू बंदा है। पर तब तक भी गनीमत थी हमे ये अंदाजा न हुआ कि ये महाशय बोत गड़बड़ हैं, हमने यही समझा कि कोई महाशय फीड एग्रीगेटर बना रहे होंगे और अभी टैस्टिंग चल रही होगी। सोचा कल एक पोस्ट लिखकर साथियों को इस बारे में बता कर पूछेंगे कि ये नए रंगरूट कौन आ गए।
आज छुट्टी मार रखी थी। तो सुबह गूगल टॉक पर एन्ट्री मारी तो सभी भाई लोग जमे हुए थे। पंकज भाई छूटते ही बोले एक नया चोर आया है। सबके चिट्ठों पर हाथ साफ कर रहा है। आगे की बातचीत खुद ही पढ़ लो:
इसके थोड़ी देर बाद लाइट चली गई। जब आई और दुबारा GTalk पर गया तो जीतू भाई टकरे।
फिर हम जीतू भाई के लेख पर टिप्पणी करने लगे। टिप्पणी लंबी होने लगी तो पोस्ट लिखने बैठ गए।
वैसे एक बात है बंदे ने अपनी बकवास भी छापने लायक समझी। ![]()
इस बात से रविरतलामी जी द्वारा कुछ दिन पूर्व लिखे गए लेख की याद हो आई। तब हमने इसे सीरियसली नहीं लिया था कि भला हमारी बकबक कौन चुराएगा। लेकिन ऐसा बंदा तभी तक सोचता है जब तक कि उसका खुद का माल चोरी होने न लगे। आखिर पोस्ट लिखने में टाइम और मेहनत तो लगती है न। एकाध बार हुआ सो हुआ बार-बार ऐसा हो तो परेशान होना लाजमी है।
अब लाख टके की बात ये है कि इस चोरी को रोका कैसे जाए। यह तो सोचने का विषय है। लेकिन फिलहाल इतना किया जा सकता है कि सब लोग अपने चिट्ठे की फीड को Full से Summery पर लगा दें। इससे कम से कम पूरी पोस्ट तो वहाँ नहीं जाएगी क्योंकि इस काम के लिए वो बंदा फीड का उपयोग कर रहा है।






















सुबह से यही हल्ला हो रखा है भाई.
जीतु भाई की दुकान पर चौपाल जमी है, वही पहुँचो!!
क्या इस चिट्ठे पर कोई समस्या आ रही है…मेरा किया टिप्पणी पुरी तरह मिट गया अभी एअक घंटे पहले यह पृष्ट नहीं खुल रहा था…पंडित जी समस्या जो हो रहा है रास्ता बना कर सुचना जरुर दीजिएगा…!!
अक्षरग्राम पर इस बारे में चलती चर्चा और जीतू भैया की पोस्ट पर कल से कोशिश कर रहा हूँ टिप्पणी करने की पर हो नही रही। अक्षरग्राम पर जबसे नई थीम लगी कभी टिप्पणी नहीं कर पाया पता नहीं कया कारण है और जीतू भईया के स्पैम कोतवालों को तो हमसे पुरानी नफरत है। तरस गया कल से टिप्पणी के लिए कई बार कोशिश कर ली अतः यहीं पर करता हूँ।
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“ठीक बात है जी गुप्त जी यदि आप साइट पर अपने बारे में कोई सूचना दे देते तो हम हैरान न होते। कल अपने स्टैट काऊंटर पर आवाजाही का हिसाब किताब लेने गया तो देखा कि एक इन्कमिंग लिंक lyspick.com से आया है। साइट पर जाकर देखा तो पाया कि कुछ चिट्ठों की पोस्टें हैं जिनमें अपना भी शामिल था खैर मैंने इग्नोर कर दिया।
सुबह गूगल टॉक पर गया तो वहाँ खबर फैली थी कोई चोर सबके चिट्ठों पर हाथ साफ कर रहा है। पंकज भाई ने एक लिंक दिया HindiCafe.Com जाकर देखा तो एकदम ऊपर वाले की कार्बन कॉपी। अब यही समझना नैचुरल था कि ये चोरी ही है।
अपनी बाकी कहानी यहाँ पढ़िए।
जैसा कि मैंने इस पोस्ट पर खास तौर पर कहा यदि आपकी साइट पर कोई अपने बारे में कोई About US टाइप जानकारी होती तो हमें ऐसा न लगता।
और फिर दो-दो साइटों का बिल्कुल एक जैसा होना बिना किसी पूर्वसूचना के तो बढ़ती हुई चोरियों के मद्देनजर ऐसा लगना लाजमी था।
मुझे खेद है कि हिन्दी ई-जगत में आपका ऐसा ‘बुरा’ स्वागत हुआ, आम तौर पर यहाँ आने वाले नए लोगों का तहे-दिल से स्वागत होता है। लेकिन इसके लिए आपकी लापरवाही ही जिम्मेदार है। बीटा-टेस्टिंग के बावजूद भी लोग साइटों पर लोग अपनी संस्था कंपनी आदि की जानकारी देते हैं। खैर अब भी कुछ नहीं बिगड़ा, हिन्दी-प्रेमियों का यहाँ हमेशा स्वागत है। एक बार मामला सुलझा लीजिए और यकीन जानिए कि भविष्य में आपके प्रति यहाँ कोई दुर्भाव नहीं होगा।”
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