‘पृथ्वी’ प्रक्षेपास्त्र का सफल परीक्षण
कुछ समय पूर्व पीएसएलवी तथा आकाश के परीक्षण असफल हो जाने के बाद शुक्र है कि पृथ्वी प्रक्षेपास्त्र का रविवार को परीक्षण सफल हुआ। आशा है इससे निरुत्साहित हुए रक्षा वैज्ञानिकों में फिर से उत्साह का संचार होगा।
बालासोर (उड़ीसा) : सतह से सतह पर मार करने वाले म्ध्यम दूरी के आधुनिकतम प्रक्षेपास्त्र पृथ्वी का समुद्र की सतह पर चाँदीपुर तट स्थित समन्वित परीक्षण रेंज (आईटीआर) से रविवार को सफल परीक्षण किया गया। हालांकि ७०० किलोग्राम विस्फोटक सामग्री से लदी होने पर मिसाइल की मारक क्षमता १५०-२५० किलोमीटर तक है, लेकिन विस्फोटक सामग्री की जरुरत पड़ने पर इसे एक हजार किलोग्राम तक बढ़ाया जा सकता है। यह १५० किमी तक लक्ष्य भेदने में केवल ३०० सेकेंड लगाती है। आईटीआर सूत्रों ने बताया कि रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित इस मिसाइल को सुबह ९.५५ बजे मोबाइल लाँचर से दागा गया और उसने सफलता पूर्वक लक्ष्य को भेद दिया। मिसाएल की लंबाई ८.६५ मीटर और चौड़ाई १ मीटर है। यह सेना में शामिल कर ली गई है। इसके रखरखाव और संचालन के लिए विशेष तौर पर प्रशिक्षित दो प्रक्षेपास्त्र समूह गठित किए गये हैं।
दैनिक जागरण २० नवम्बर २००६, से साभार
रक्षा वैज्ञानिकों की योजना भविष्य में पीएसएलवी तथा आकाश की मिश्रित प्रौद्योगिकी से अंतरमहाद्विपीय मिसाएल सूर्या बनाने की थी। यदि कुछ समय पूर्व उपरोक्त दोनों के परीक्षण असफल न हुए होते तो शायद इस दिशा में कार्य आरंभ हो चुका होता। अब इन दोंनों का अगला परीक्षण शायद अगले साल तक हो। खैर सहज पके सो मीठा होए यानि Better Late Then Never.






















रक्षा वैज्ञानिको को बधाई. सूर्य मिशाईल भारत के बड़े सपनो में से एक है. हमारी शुभकामनाएं वैज्ञानिको के साथ है.
बहुत ही अच्छी खबर दी आपने । बधाई आपको एवं वैज्ञानिकों को भी ।
जी हाँ, अब तक ऐसी मिसाइल शायद केवल अमेरिका तथा चीन के पास है। भगवान करे जल्द ही भारत के पास यह मिसाइल हो ताकि उसका भी दुनिया में रूतबा कायम हो सके।