माता निर्मला देवी द्वारा राष्ट्र ध्वज और स्वस्तिक का अपमान
एकाध दिन पहले सुरेश जी की फॉरवर्ड की हुई मेल मिली जिसे पढ़कर यह पोस्ट लिखनी पड़ी। कल तो प्रश्न उत्तर के चक्कर में फंसा था अतः समय नहीं लगा।
एक कथित ‘आध्यात्मिक नेता’ और स्वयंभू ‘भगवान’ हैं माता निर्मला देवी। निम्न चित्रों को देखिए,वो सोफे पर बैठी हैं और पैरों में भारत का राष्ट्रध्वज तिरंगा पड़ा है। चित्र देखकर कोई भी बता सकता है कि ऐसा किसी असावधानी पूर्वक नहीं बल्कि जानबूझ कर किया गया है।
ऐसा तब है जब कि निर्मला देवी के पति एक रिटायर्ड आईएएस अफसर हैं जो कि SCI के प्रमुख भी रह चुके हैं। (चित्र में जो उनके साथ ही बैठे हैं)। कम से कम उन्हें तो ऐसा नहीं होने देना चाहिए था। साथ ही वे सब लोग भी दोषी हैं जो उस वक्त वहाँ पर मौजूद थे और उन्होंने इसका विरोध नहीं किया।
जिस तिरंगे की शान कायम रखने के लिए हजारों लोगों ने अपनी जान दे दी, उसका यह औरत इस तरह अपमान कर रही है। इससे पता चलता है कि इसके मन में अपने देश के लिए कोई प्रेम कोई आदर नहीं।
माता निर्मला देवी के कुछ आपतिजनक चित्र पहले भी देख चुका हूँ। एक चित्र में उन्होंने अपने पैरों के तलवों पर स्वस्तिक बनवाए हुए हैं तथा उनका क्लोज अप लिया गया है। स्वस्तिक हिन्दू/जैन धर्म में परम पवित्र प्रतीक है। हिन्दू धर्म में सबसे बड़ा स्थान रखने वाले शंकराचार्य तथा बड़े से बड़े जैन मुनि भी ऐसा नहीं करते/कर सकते। फिर यह माता जी ऐसी कौन सी साक्षात देवी है जो ऐसा धर्मविरुद्ध कार्य करने हेतु अधिकृत है।
क्या यह माता जी राष्ट्र और धर्म से भी ऊपर है जो तिरंगे और स्वस्तिक का इस तरह अपमान करती है। आप ही बताइए कि ऐसी महिला कोई ‘भगवान’ है या ‘पाखण्डी’ ?
मेरे विचार से तो इन दोनों पर राष्ट्र ध्वज का अपमान करने हेतु मुकद्दमा चलाया जाना चाहिए।
अपडेट: दूसरे चित्र में जो व्यक्ति गुलाबी कमीज पहने है वो अनिल अंबानी है। शर्म की बात है कि उन्होंने भी इसका विरोध नहीं किया।






















मेरा बस चले ऐसे दुषीत दिमाग वालो को जमीन में गाड़ दूँ, काहे का मुकदमा. पाखण्डी लोग है.
ये देखकर अपने गुस्से को शब्द नहीं दे पा रहा हूं बस यही कह पा रहा हूं कि इस औरत को भारत में रहने का हक़ नहीं.
मुझे भी कल यह मेल मिला देखकर बहुत दुख हुआ। मैं भी लिखने वाला था इस विषय पर।
धन्यवाद श्रीश जी आपने मेरे मेल को हजारों लोगों तक पहुँचाया…गुस्सा तो मुझे भी बहुत आया था और मुझे सभी मित्रों को तत्काल बताना आवश्यक लगा…ऐसे ही हैं हमारे यहाँ के ९०% धर्मगुरु… पाखंडी और धनलोलुप..
ye faltu aurat shakl se hi chudail lagati hai..
ek kheeench ke lagana chahiye isko.
श्रीष भाई, इस चित्र को देखकर गुस्सा और शर्म दोनो ही आए, कि हमारे देश मे ऐसे भी नागरिक हैं जिन्हें अपने ही राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय प्रतीक के मान-अपमान की चिन्ता नही होती, खैर, मैनें गुगल देवता पर इन तथाकथित माताजी के बारे में खोज की, आप भी देखिये http://dineshsy.tripod.com/ShriMataji.html
यह घटना किस जगह हुई है? क्या आप में से कोई इस पोस्ट पर बता पायेंगे?
मैं इस चित्र की प्रतिलिपि मुख्य न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली को भेज रहा हूं. यदि आप में से अन्य कोई भी इस की प्रति भेजे तो मैं अनुगृहीत रहूंगा.
जिस जगह पर घटना हुई वहां के पुलिस प्रमुख को भी इसकी कापी बिजवानी चाहिये.
ऐसी हरक़त करने वाले के ऊपर तो मुक़दमा चलाया जाना ही चाहिये । इसके लिये तो संविधान मे भी अवश्य कुछ व्यवस्था होगी । कृपया इसे डिस्कस करें और कुछ पक्के कदम उठाने का प्रयास करें । सिर्फ़ बातों से क्या होगा । मेरा तो इस फ़ोटो को देख कर खून खौल रहा है ।
मैने इस घटना पे विरोध व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री तथा राष्ट्रपति जी को चिट्ठी लिखी है और उनसे आवश्यक कदम उठाने की गुहार लगायी है ।
मैने इन कड़ियों का प्रयोग किया-
http://pmindia.nic.in/
http://presidentofindia.nic.in/
श्रीश जी, यह चित्र देखकर तो क्रोध की प्रतिक्रिया तो होती ही है और साथ ही साथ घृणा की और भी अधिक। ऐसे लोगों का तो लगता है कोई मानसिक संतुलन है ही नहीं। ऐसे लोगों का तो हर एक स्वाभिमानी नागरिक बहिष्कार ही करेगा। उनका यह सोचना कि इस प्रकार के प्रदर्शन से वे किसी भी देश के स्वाभिमान का तिरस्कार कर सकेंगे, मात्र उनकी क्षुद्र मानसिक प्रवृत्ति का परिचायक है। ऐसे मूढ़ लोग इस प्रकार की घृणित हरकतें करके मात्र ओछी लोकप्रियता पाने की कामना रखते हैं। न केवल अपना वरन् किसी भी देश के सम्य नागरिक को किसी के भी देश के स्वाभिमान का इस प्रकार तिरस्कार का प्रयास करना अनुचित ही है।
ऐसे पाखंडियों को खड़ा करके गोली मार देनी चाहिए…
लोग इसे भगवान मानते हैं…शर्म आती है देखकर यह हो रहा है अपमान राष्ट्र का निर्मला देवी राष्ट्र से ऊंची संस्था जो हैं…वाह रे यहाँ के लोग और वाह रे
अहंकार!!!
दुख हुआ जानकर, पाखंडी लोग और उनके पाखंडी अनुयायी घृणा के पात्र हैं
भाई श्रीश,
अभिषेक के कदम का समर्थन करता हूँ. हमें इस मामले को जितना हो सके आगे ले जाना है. ओनलाइन हस्ताक्षर एकत्र कर राष्ट्रपति को भेजते है. कोई और सुझाव हो तो कहें.
केवल पाखंड है। दुख की बात है। इन्हें सजा जरूर मिलनी चाहिए।
hey shrish, you could also use
border-bottom:1px dotted #00f;
in the a:hover, like I do, to give a distinct look. Try it, and if you like it, drop me a line…..
श्रीशजी,
मेरे चिट्ठे पर लिखी आपकी टिप्पणी से मैं सहमत हूँ । मैं शीघ्र ही अपने चिट्ठे का नाम रोमन से देवनागरी में परिवर्तित कर दूँगा ।
धन्यवाद,
नीरज रोहिल्ला
ईपण्डित जी, कृपया इन माता जी का अता-पता तो बताइए? पहले सीधे उन्हीं से पूछ लें कि कहीँ ये तिरङ्गे की पूजा तो नहीं कर रहीँ? कहीँ ये किसी देवी-देवता का आसन तो नहीं बना रहीँ? जैसे पण्डितजी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को विराजमान करने के पूर्व पाटे पर स्वस्तिक का चिह्न आँकते हैं, कौन-सी देवी हैं ये? उन्हीं से पूछें।
ek kheeench ke lagana chahiye isko.
खींचने की क्या आवश्यकता है, उसमें खामखा की उर्जा व्यर्थ होगी, बस एक जगह खड़ा करके ही …..
ऐसी हरक़त करने वाले के ऊपर तो मुक़दमा चलाया जाना ही चाहिये । इसके लिये तो संविधान मे भी अवश्य कुछ व्यवस्था होगी ।
बिलकुल प्रावधान है जी, Flag Code of India में दिए गए Prevention of Insults to National Honour Act 1971(Ammendment 2003) के अनुसार तिरंगे पर पाँव रखने अथवा किसी भी प्रकार उसका निरादर करने वाले को तीन वर्ष कारावास की सज़ा मिल सकती है। और जिस व्यक्ति को इसकी एक बार सज़ा मिल चुकी है, दोबारा उसके ऐसा करने पर उसको पुनः कारावास की सज़ा मिलेगी जिसकी न्यूनतम अवधि एक वर्ष होगी।
अब कोई लगे हाथ ये भी बता दो भाई कि हम इस बारे में किससे शिकायत करें।
क्या इस वेबसाइट से कुछ काम बन सकता है?
http://www.petitiononline.com/
जी.के. अवधिया
श्रीश भाई, आज तुम्हारी ये पोस्ट पढी ऊपर दिये गये सभी की टिप्पणियों ने पहले ही मेरी बात कह दी। बस एक बात जोडना चाहूँगा, कि ऐसी औरत के लिये आपने माता शब्द क्यों जोडा? सिर्फ नाम से ही पुकारते तो ज्यादा अच्छा होता और अगर आगे कुछ जोडना ही था तो कुमाता टाईप का कुछ जोडना था। इसलिये मेरे ख्याल से पहले सरकार कुछ कर ना करे आप ये माता शब्द इस नाम के आगे से हटा दीजिये।
dosto, jo desh ke liye ladh sakta hai,vo yesa kabhi nahi karega ,ye to kisi forenar ne ma ko gift diya tha aur galti se charno me rakh diya ………………esko galat na samze…