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इनस्क्रिप्ट प्रयोगकर्ताओं से कुछ प्रश्न


जैसा कि मैंने अपनी हिन्दी टाइपिंग वाली पिछली पोस्ट में कहा कि काफी समय से इनस्क्रिप्ट सीखने बारे सोच रहा हूँ। दो एक महीने पहले भी विचार किया इनस्क्रिप्ट संबंधी कुछेक लेख पढ़े, सीडैक का डॉस आधारित ट्यूटर डाउनलोड किया, डाक्यूमेंटेशन पढ़ी, फिर ढीला पड़ गया। अब आजकल फिर से दिमाग में इनस्क्रिप्ट सीखने का कीड़ा आ रहा है। सब से पहले तो बताता हूँ कि किसी भी इन्सान को इनस्क्रिप्ट क्यों सीखना चाहिए।

idea इनस्क्रिप्ट क्यों सीखना चाहिए।

» इनस्क्रिप्ट एक टच टाइपिंग पद्धति है। एक बार अभ्यास हो जाने पर आप बिना कीबोर्ड देखे फुल स्पीड से हिन्दी टाइप कर सकते हो। दूसरा इसमें फोनेटिक के मुकाबले टाइप करने के लिए कम keys दबानी पड़ती हैं जिससे समय कम लगता है। मतलब कि जो लोग शिकायत करते हैं कि हिन्दी टाइप करने में बहुत देर लगती है, उनकी प्रॉब्लम खत्म।

» इनस्क्रिप्ट सभी ऑपरेटिंग सिस्टमों विंडोज, लिनक्स तथा मैकिनटोश आदि में डिफॉल्ट कीबोर्ड है मतलब कि सब में आपको मिलेगा, डाउनलोड करने का या नेट पर टूल्स ढूंढने का कोई झंझट नहीं।

» इनस्क्रिप्ट एक मानक कीबोर्ड है। सभी इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड एक समान होंगे, फोनेटिक की तरह नहीं कि बारहा का अलग, हिन्दीराइटर का अलग और इंडिक आईएमई का अलग।

» इनस्क्रिप्ट लंबी रेस का घोड़ा है सभी ऑपरेटिंग सिस्टमों में ये आ रहा है और आगे नए OS में भी आएगा। सभी OS इस को प्रमोट कर रहे हैं, अतः भविष्य इस का है।

अब अगर इतने फायदे हैं तो मैं क्या सोच रहा हूँ, सीखता काहे नहीं।

confused मेरेको इनस्क्रिप्ट सीखने में क्या लोचा है।

» मुझे इंग्लिश की रेमिंगटन टाइपिंग आती है। अतः हिन्दी टाइप शुरु करने के कुछ समय बाद ही अब मैं हिन्दी भी इंग्लिश की तरह बिना कीबोर्ड देखे ही टाइप कर लेता हूँ अर्थात फुल स्पीड से टच टाइपिंग कर लेता हूँ। मेरा हाथ इस तरह सैट हो गया कि मुझे कोई नया कीबोर्ड पर हाथ सैट करना बहुत मुश्किल लगता, मेरी उंगलियाँ अपने आप वहीं जाती हैं।

» कोई भी टच टाइपिंग सीखने के लिए क्रमवार प्रक्रिया अपनानी होती है। सिर्फ कीबोर्ड मैप देखकर ही कोई सीख नहीं सकता। एक एक कर सभी rows का अभ्यास करना होता है। जिन्होंने कोई भी टाइपिंग पहले सीखी है वो ये समझ सकते हैं। इनस्क्रिप्ट सीखने के लिए कोई Lesson Wise ट्टोरियल उपलब्ध नहीं है। मैंने कीबोर्ड मैप देखकर कई बार कोशिश कर ली लेकिन कुछ पल्ले नहीं लगता।

अब अगर मैं हिन्दी में फुल स्पीड टच टाइपिंग कर लेता हूँ तो मेरेको इनस्क्रिप्ट सीखने की क्या जरुरत है। कुछ कारण तो वही हैं जो ऊपर शुरु में दिए हैं, कुछ और हैं।

razz मैं इनस्क्रिप्ट क्यों सीखना चाहता हूँ।

» मुझे कंप्यूटर पर हिन्दी टाइपिंग पर लेखों की पूरी श्रृंखला लिखनी है। लेकिन उस से पहले मुझे इसके सभी पहलुओं का पता होना चाहिए। अब रेमिंगटन का जमाना तो चला गया, उसे सीखना तो मूर्खता है। रह गया इनस्क्रिप्ट, एक बार इसे सीखने पर ही जान पाऊंगा कि फोनेटिक बेहतर है या इनस्क्रिप्ट अन्यथा तो सिर्फ अनुमान ही लगा सकता हूँ।

» विंडोज के साथ पूर्णतया कंपेटिबल सिर्फ Indic IME है। Baraha IME और HindiWriter कई जगह काम नहीं करते जैसे याहू मैसेंजर, जिम्प आदि। MS Word आदि में कभी करते हैं कभी नहीं, कुल मिलाकर पूरी तरह कंपेटिबल नहीं हैं। अब Indic IME में लोचा ये है कि मुझे उसकी ट्रांस्लिटरेशन स्कीम पसंद नहीं, वो बारहा की तुलना में मुश्किल और अवैज्ञानिक है। मेरा हाथ बारहा पर सैट हो रखा है वो इंडिक पर जमता नहीं।

» जब मैं सोच सोच कर लिखता हूँ तब स्पीड खुद ही धीमी होती है लेकिन जब मुझे कुछ डिक्टेट टाइप करना होता है तब मेरी स्पीड बहुत ज्यादा होती है बारहा उस स्पीड से चल नहीं पाता और और ठीक से टाइप नहीं हो पाता उदाहरण के लिए ‘है’ की जगह ‘हअई’ या ‘अहि’ छ्प जाता है, ‘डॉ’ की जगह ‘ड~ओ’, ‘हँ’ की जगह ‘ह~म’ आदि। इनस्क्रिप्ट में मेरे विचार से ऐसा नहीं होगा क्योंकि वहाँ सब Symbols के लिए key निर्धारित होती हैं जबकि फोनेटिक में कई keys से जुड़कर मात्राएं बनती हैं।

» मुझे हिन्दी में लंबी पारी खेलनी है, अभी तो शुरुआत ही है जिंदगी पड़ी है, बहुत सी चीजें इंटरनेट पर डालना चाहता हूँ जिनमें कई किताबें तक शामिल हैं। इसके लिए मुझे तीव्रतम गति वाली टाइपिंग आनी चाहिए।

अब कई बार दिमाग में आता है कि छोड़ो यार फोनेटिक में अच्छा खासा तो काम चल रहा है। फिर लगता है कि एक बार सीख लेने के बाद आनन्द ही आनन्द होगा।

मेरे पड़ोस में भईया रहते हैं जिनसे मैंने बहुत पहले इंग्लिश टाइपिंग सीखी थी। अब उनकी जॉब लग गई है अतः उन्होंने दुकान बंद कर दी है। मैंने उनसे पूछा कि क्या इसके लिए कोई किताब आती है तो बोले कि आती तो है लेकिन अंबाला मिलेगी, खैर मैं देखूंगा शायद कोई मेरे पास पड़ी हो।

हमारी ब्लॉगर बिरादरी में इनस्क्रिप्ट प्रयोग करने वाले जिन लोगों को मैं जानता हूँ उनमें एक तो हिन्दी कंप्यूटिंग के इतिहास पुरुष रविरतलामी जी हैं जिन्होंने दुनिया जहान के हिन्दी टाइपिंग के तरीके आजमा रखे हैं। इसी श्रेणी में हरिराम जी भी आते हैं, हाँ उन्हें शायद फोनेटिक आजमाने की कभी जरुरत महसूस नहीं हुई होगी। पंकज नरुला फोनेटिक और इनस्क्रिप्ट दोनों आजमा चुके हैं। सृजन शिल्पी शुरु से इनस्क्रिप्ट प्रयोग करते हैं। कुछ और भी लोग हो सकते हैं जिनका मुझे पता नहीं। अब इन सब इनस्किप्ट प्रयोगकर्ताओं से मेरे कुछ प्रश्न हैं।

question इनस्क्रिप्ट संबंधी कुछ प्रश्न।

» उपरोक्त सब बातों पर विचार करते हुए बताइए कि मेरे गति किसमें ज्यादा होगी फोनेटिक टच टाइपिंग में जो मैं इस समय प्रयोग कर रहा हूँ या इनस्क्रिप्ट में ?

» कौन सी पद्धति ज्यादा वैज्ञानिक, ज्यादा प्राकृतिक है फोनेटिक या इनस्क्रिप्ट ?

» कहीं ऐसा तो न हो कि मैं इनस्क्रिप्ट सीखने निकल पड़ूं और वो तो सीख न पाऊं और इधर से फोनेटिक भी भूल जाऊं। :)

वैसे मेरे विचार से तो ऐसा नहीं होगा।

» इनस्क्रिप्ट सीखने के लिए इंटरनेट और किताब के रुप में कौन कौन से ट्यूटर उपलब्ध हैं खासकर जिसमें Lesion Wise दिया हो। मैं दो ट्यूटरों के बारे में जानता हूँ एक तो सीडैक का डॉस वाला दूसरा मुफ्त सीडी वाला आसान हिन्दी टाइपिंग ट्यूटर

मैं कहाँ से शुरुआत करूं, सीखने में कितना समय लगेगा ?

» विंडोज एक्सपी में इनस्क्रिप्ट टाइपिंग के लिए दो इनबिल्ट कीबोर्ड होते हैं: Devnagari – InScript तथा Hindi Traditional. इनके अतिरिक्त एक Indic IME का इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड है। क्या इन तीनों में कुछ अन्तर है यदि हाँ तो, इनमें कौन सा बेहतर है ? इनस्क्रिप्ट टाइपिंग हेतु क्या और भी कोई टूल है ? विंडोज विस्टा और लिनक्स के इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड के बारे में कुछ बता सकते हैं।

» इनस्क्रिप्ट विंडोज में हर ऐप्लीकेशन, हर टैक्स्ट एरिया में चलती है या उसकी भी कोई सीमाएं हैं ?

कृपया टिप्पणी द्वारा जहाँ तक हो सके विस्तार से उत्तर देने का प्रयत्न करें।

रविरतलामी जी और हरिराम जी से एक और प्रश्न है, अगर सिर्फ स्पीड की बात करें तो रेमिंगटन और इनस्क्रिप्ट में से किस में ज्यादा स्पीड मिलती है ?



चिप्पियाँ:




20 टिप्पणियाँ

  1. आपने हाल ही में परिचर्चा पर भी इंस्क्रिप्ट की-बोर्ड के बारे में कुछ सुझाव दिया था, उसपर मैंने भी एक प्रति-टिप्पणी की थी। नए साथियों के लाभार्थ मैं उक्त दोनों टिप्पणियों को यहाँ पुन: प्रस्तुत कर रहा हूँ:

    Shrish wrote:
    “आप सोचेंगे कि अगर इन्स्क्रिप्ट सर्वश्रेष्ठ है तो मैंने आपसे पहले फोनेटिक प्रयोग करने को क्यों कहा। दरअसल इन्स्क्रिप्ट सीखने हेतु कम से कम एक दो हफ्ते तो लगते ही हैं। जबकि फोनेटिक में बंदा सीधे ही हिन्दी लिखना शुरु कर सकता है। यही वजह है कि हम नए बंदों को फोनेटिक प्रयोग करने को कहते हैं। अगर उसे शुरु में ही इन्स्क्रिप्ट से लिखने को कह देंगे तो वो भाग जाएगा। एक बार हिन्दी लिखना शुरु करने पर बंदा अपने लिए सही टूल खुद ही ढूंढ लेता है।”

    श्रीश जी, शायद यह व्यक्ति-व्यक्ति की सीखने की लगन पर निर्भर करता है कि उसे सीखने में कितना वक्त लगता है। जैसा कि मैंने हाल ही में अपने चिट्ठे पर टैगिंग के खेल वाली एक पोस्ट में जिक्र किया था, मैंने भी पहली बार इंस्क्रिप्ट की-बोर्ड ही सीखा था, वह भी एक अख़बार में ज्वाइन करने के पहले ही दिन। की-बोर्ड का ले-आउट एक साथी से पूछकर कागज पर बना लिया हाथ से और एक लेख ले-आउट देख-देख कर टाइप कर लिया। फिर, रात में घर आया और सोते समय सपने में रात भर टाइप करता रहा। अगले दिन ऑफिस गया तो मैं सहज गति से टाइप कर पा रहा था। आज किसी प्रोफेशनल हिन्दी टाइपिस्ट की तुलना में मेरी गति कुछ कम नहीं होगी।

    किसी व्यक्ति के लिए यह तो संभव नहीं कि वह एक साथ कई की-बोर्ड का अभ्यास कर सके। यदि शुरुआत में ही इंस्क्रिप्ट की-बोर्ड सीख लिया जाए तो हमारी बहुत-सी समस्याएँ हल हो जाएंगी। मसलन, यदि आप इस कीबोर्ड पर हिन्दी में टाइप करना सीख लेते हैं तो भारत की लगभग दस अन्य भाषाओं में भी टाइप कर सकेंगे। यह कीबोर्ड इंडियन स्क्रीप्ट्स के लिए है, इसलिए इसे इंस्क्रिप्ट कहा जाता है। भाषाओं के बीच की दूरी को पाटने में यह बहुत मददगार है।

  2. श्रीष जी मैं कई सालों से अंग्रेजी में टच टाईप कर रहा हूं। हालांकि मैंने कभी कोई किताब या टाइपिंग प्रैक्टिस आदि नहीं की। अंग्रेजी में अत्यधिक टाइप करना मुझे मेरे काम की वजह से ज़रूरी था तो अपने आप तेज टच टाइप करने की आदत हो गई। यहां तक कि अब न तो कीबोर्ड और न ही स्क्रीन को देखना आवश्यक है, मैं हाथ के लिखे कागज़ों को देख टाइप करता हूं। पिछले वर्ष जब हिन्दी ब्लाग शुरू किया तो शुरू से ही लिनक्स के इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड का प्रयोग किया, और एक सप्ताह लेआउट देख टाइप करने के बाद अक्षर याद हो गए। लेआउट एकदम साधारण है, और लिनक्स वितरण में शामिल है। देवनागरी के अलावा गुरुमुखी, गुजराती, बांगला, कन्नड, तमिल आदि के इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड भी वितरण में शामिल हैं। अब मैं इनस्क्रिप्ट भी बिना देखे टाइप करता हूं। ये बात जरूर है कि स्पीड अभी अंग्रेजी के मुकाबले कुछ २० प्रतिशत ही है। तो मेरे ख्याल से भूलने जैसी कोई बात नहीं होगी। धीरे धीरे शुरू करिए, अंततः तेजी भी आ जाएगी।

  3. श्रीश, आपने बहुत सारे प्रश्न पूछ डाले. इन पर तो एक प्रविष्टि बन सकती है!

    फिर भी कुछ उत्तर देता हूँ-

    इनस्क्रिप्ट की खूबी के बारे में एक पोस्ट मैंने लिखी थी यह देखें-

    आइए, इनस्क्रिप्ट सीखें

    रेमिंगटन और इनस्क्रिप्ट दोनों ही तेज चलते हैं चूंकी इसमें 1-1 कुंजी मैपिंग होती है, जबकि फ़ोनेटिक में ऐसा नहीं होता.

    विंडोज़ एक्सपी में इनस्क्रिप्ट कुंजीपट सब जगह बढ़िया चलता है. ट्रेडिशनल कहीं कहीं बग देता है और इंडिक आईएमई कहीं कहीं तो चलता ही नहीं है.

    वैसे, इन स्क्रिप्ट को सीखने की आवश्यकता ही नहीं है – यदि आपको हिन्दी की बाराखड़ी याद है. यही मैंने अपने उक्त लेख में लिखा है और इसे रमण ने आजमाया भी है- वे अब आसानी से इनस्क्रिप्ट पर ही लिखते हैं.

  4. मैं इंक्रिप्ट में या रेमिंगटन में लिखने वालों को तुरंत पहचान लेता हूँ.

    इसका एक सीधा सा कारण है:

    ओपरा में आधे शब्द हलंत लगे हुए दिखते हैं. यह परेशानी IE मे नहीं होती है.

    मुझे यह inscript/ रेमिंगटन की सबसे बङी खामी लगती है.

  5. भैया,

    लगता है की मुझे भी यह सीखना ही पङेगा. बहुत दिनों से ibook लेने की सोच रहा था, पर यह सोच कर नहीं ले रहा था की उसमें हिन्दी लिखने के लिये कोई टूल नहीं है.

    पर अगर inscript आती है तो आप किसी भी OS में छलांग मार सकते हैं.

    पर दुख की बात यह है की जिसे IME की आदत लग गयी हो, उसे inscript सीखने में बहुत प्ररेशानी जाती है.

  6. श्रीश जी, मैंने तख्ती से लिखना शुरु किया था। फिर इन्स्क्रिप्ट सी डैक के प्रोग्राम से सीखा। दो तीन दिन ते अभ्यास के बाद लिखना आसान हो गया था। आलोक भाई जो शायद सीडैक के बाहर इस दौर से गुजरने वाले पहले व्यक्ति होंगे ने अप्रैल २००३ में लिखा था

    “क्या लिखें, कोई ज़वर्दस्ती है क्या?
    पर लिख ही लेते हैं, इसी बहाने इंस्क्रिप्ट की कवायद भी हो जाएगी। वैसे कवायद का मतलब क्या होता है? दरअसल मैं जिस शब्द को तलाश रहा था वह है रियाज़। आज लिखने का काम 5 वजे शुरू किया है, देखते हैं कितनी देर में पूरा होता है। यार इंस्क्रिप्ट तो मार ही देगा। पता नहीं इसके बाद अङ्ग्रेज़ी लिख पाऊँगा कि नहीं। हिन्दी में अनुस्वार कुछ ज़्यादा ही हैं, और ह, य अक्षर भी। इनको बीच वाली पङ़क्ति में रखना चाहिये था। पर कोई गल नहीं, एक बार आदत पड़ गई तो कोई चक्कर ही नहीं। कव वनेगी मुद्रलिपि जिसमें ङ्क, ट्ट, ट्ठ के संयुक्ताक्षर हों? भइया मुद्रलिपि बनाना टेढ़ी खीर है, कोई महान इंसान बना दे तो बना दे। हिन्दी पढ़ के आप फट से पता लगा सकते हैं कि लिखने वाला कहाँ का रहने वाला है। बोली, लहज़ा, शैली तुरन्त किसी क्षेत्र की ओर आपकी उँगली पहुँचा देगी।
    किसी अखबार के किसी लेख को इंस्क्रिप्ट में लिख के देखना चाहिए कि कितने अक्षर किस किस पङ्क्ति में आते हैं। अरे कमाल है, पिछली बार पङ्क्ति लिखा तो ठीक छपा, लेकिन ऊपर तो पङ़क्ति छपा था। चक्कर क्या है?
    चलिए 5:18 हो गए, पूरे बीस मिनट लग गए लिखने में। हिन्दी की गिनती नहीं छप रही, इसका भी जुगाड़ ढूँढना पड़ेगा।”

  7. स्वयं इन्स्क्रिप्ट सीखने के बाद मैं तो सब को यही राय देता हूँ कि यही सब से बढ़िया है। मैं ने अंग्रेज़ी मे टच टाइपिंग भी कुछ वर्ष पहले ही सीखी थी, और इन्स्क्रिप्ट सीखने में भी अधिक समय नहीं लगा। विशुद्ध फोनेटिक टाइपिंग मुझे कभी नहीं भाई – मेरे विचार में वर्तनियों की काफी गलतियाँ फोनेटिक टाइपिंग पर निर्भरता से होती हैं। इस के इलावा अधिकतर शब्दों के लिखने में फोनेटिक टाइपिंग में अधिक कुंजियाँ दबानी पड़ती हैं। उदाहरण के तौर पर “भारत” लिखने के लिए फोनेटिक में bhaarata/bhArat और इन्स्क्रिप्ट में Yejl लिखना होगा। छाछ के लिए इन्स्क्रिप्ट में तीन कुंजियाँ दबानी हैं; फोनेटिक में कितनी?

    @himanshu
    ओपरा में आधे शब्द हलंत लगे हुए दिखते हैं. यह परेशानी IE मे नहीं होती है.
    मुझे यह inscript/ रेमिंगटन की सबसे बङी खामी लगती है.

    हलन्त लगे शब्दों का टाइपिंग से क्या मतलब है, यह समझ में नहीं आया। रेमिंगटन में शायद संभव है, पर इन्सक्रिप्ट में नहीं। यह मैं ने इन्स्क्रिप्ट से टाइप किया है। इसे ओपरा में पढ़ कर देखें।

  8. मजेदार रहा यह इतिहास।
    सुनो पहली पोस्‍ट के बाद की पोस्‍ट के बाद में आलोक ने कहा था – ये इंस्क्रिप्‍ट तो मार ही डालेगी।
    और यह भी कि अपने बच्‍चे को तो पैदा होते ही इस पर बैठा दूँगा- फिर कहा कि पता नही ंतब तक क्‍या क्‍या आ जाएगा।

    आलोक भाई के बच्‍चे आजकल क्‍या कर रहे हैं

  9. @सृजन शिल्पी,
    सृजन शिल्पी जी आपकी सब बातों से सहमत हूँ इस बात से भी कि शुरुआत के लिए भी इनस्क्रिप्ट मुश्किल नहीं लेकिन ये बात आपको और मुझे पता है नए हिन्दी लिखने वाले को नहीं, अपनी बात विस्तार से एक और पोस्ट में सपष्ट करुंगा।

    @क्षितिज,
    क्षितिज आप ठीक कहते हैं लेकिन चरणबद्ध तरीके से टच टाइपिंग सीखने पर बेहतर अभ्यास होता है और अधिक स्पीड बनती है।

    @Raviratlami,
    रवि जी धन्यवाद, आपने मेरे अधिकतर सवालों के जवाब दे दिए, बाकी भी धीरे धीरे मिल जाएंगे।

    @himanshu,
    हिमांशु रेमिंगटन में ऐसा हो सकता है क्योंकि रेमिंगटन वाले कुछ मित्रों यथा मसिजीवी, प्रमेन्द्र प्रताप सिंह आदि के ब्लॉग पर मैंने भी ऐसा देखा लेकिन इनस्क्रिप्ट में ऐसा नहीं है, रविजी समेत कई चिट्ठाकार इनस्क्रिप्ट प्रयोगकर्ता हैं लेकिन उनके चिट्ठे पर यह समस्या नहीं।

    @?????? ???,
    पंकज भाई, वाकई आलोक जी की पुरानी पोस्टें पढ़ना बहुत आनंददायक है।

    आपका नाम देखने के लिए मुझे आपके प्रोफाइल में जाना पड़ा, पता नहीं क्या दिक्कत है नाम की जगह ????? छपा है।

    @Raman Kaul,
    रमण भाई मेरा भी यही ख्याल है कि इनस्क्रिप्ट सबसे बेहतर है। मुख्य रुप से अधिक कुंजियों वाले झंझट के कारण ही मैं भी इनस्क्रिप्ट सीखना चाहता हूँ, वरना फोनेटिक में मुझे कोई समस्या नहीं स्पीड भी अच्छी है और टच टाइपिंग भी कर लेता हूँ।

    @masijeevi,
    मसिजीवी जी, इस सवाल का जवाब ढूंढने के लिए तो आलोक जी को खोजना होगा, वे लंबे समय से ब्लॉगमंडल से गायब हैं।

  10. इन्स्क्रिप्ट कीबोर्ड की सबसे बड़ी खूबी है कि इसमें किसी भी भारतीय भाषाओं में कम्प्यूटर में इनपुट किया जा सकता है। सभी के लिए एक ही लेआउट है।
    लेकिन इसकी सबसे बड़ी खराबियाँ निम्नवत् है:-
    1. मात्राओं को अलग से याद एवं टाइप करना पड़ता है। (जबकि भारतीय भाषाएँ मूल रूप में अंग्रेजी से भी अधिक सरल, सपाट और सीधी हैं। सिर्फ मूल व्यंजन+स्वर+अनुनासिकादि क्रम से समस्त अक्षर और संयुक्ताक्षर स्वयंचालित रूप से प्रकट हो सकते हैं।) इस प्रकार कुल 16 कुँजिया अनावश्यक रूप से अधिक याद रखनी पड़ती है। जबकि इनकी कोई आवश्यकता ही नहीं है। इन 16 कुँजियों की जगह बहुधा उपयोग के चिह्न या अन्य वर्णों के लिए प्रयोग हो सकता था।
    2. दक्षिण ट,ठ,ड,ढ,नुक्ता, ऑ य आदि टाइप करना कठिन होता है और बारम्बार त्रुटियाँ होती हैं।
    3. देवनागरी में बहुधा प्रयोग में आनेवाले चिह्नों (: ; ‘ ” / ? ! ) के लिए भी बारम्बार “भाषा/लिपि” toggle कुंजी को दबाकर अंग्रेजी ले आऊट में अनावश्य रूप से लौटना पड़ता है।
    4. हलन्त का बारम्बार अनावश्यक रूप से प्रयोग करना पड़ता है। उलटा क्रम चलता है। आधे अक्षर के लिए दो कुंजियाँ दबानी पड़ती है, जबकि पूरे अक्षर के लिए सिर्फ एक। जिससे ध्वन्यात्मक इनपुट में भारी बाधा आती है।
    5. यह उच्च गति से टंकण क्षमता प्रदान नहीं कर पाता। गलतियों की सम्भावनाएँ अधिक रहती हैं।
    6. मेरे विचार में हिन्दी तथा भारतीय भाषाओं के लिए सर्वश्रेष्ठ IME की अवधारणा 1984-85 में Former-NCST, Mumbai, (वर्तमान CDACMumbai) द्वारा विकसित ‘विविधा’ नामक सॉफ्टवेयर में प्रयोग की गई थी, जिसकी भारत सरकार के “इलेक्ट्रॉनिक कोर्पोरेशन ऑफ इण्डिया” द्वारा मार्केटिंग की जाती थी और जो सिर्फ 300 रुपये में बेचा जाता था। किन्तु यह DOS में चलता था, किन्तु Windows की लोकप्रियता तथा त्रुटिपूर्ण ISCII-1991 के मानकीकरण बाद यह अधिक प्रयोग में नहीं आ सका। आवश्यकता है इसको पुनर्जीवित करने की।
    7. इनस्क्रिप्ट की-बोर्ड में हिन्दी के अक्षर-विन्यास को अलग से तथा अंग्रेजी के अक्षर-विन्यास को अलग से याद करके टंकण अभ्यास की जरूरत होती है, जिससे दिमाग पर दोगुना बोझ पड़ता है।
    8. इन्सक्रिप्ट से उस तेज गति से टाइप नहीं किया जा सकता, जितना कि इसके पूर्ण ध्वन्यात्मक होने पर होता।

  11. पंडित जी नमस्कार, आलोक जी का तो पता नहीं, आप वापस आये इसलिये यह टिप्पणी… इन्स्क्रिप्ट वगैरह के बारे में तो जानकारी नहीं है, मुझे तो फ़ोनेटिक वाला सीधा-सादा हिन्दी राइटर भाता है… आप ऐसे ही बने रहिये इधर… हमें ज्ञान मिलता रहेगा…

  12. अरे, हो कहाँ मास्साब???

    काश, हर रोज एक अप्रेल रहे और आप आते रहें.

  13. पंडिज्जी , परनाम । आशीर्वाद बना रहे ।

  14. दिसम्बर 2007 की छुट्टियों में इनस्क्रिप्ट सीखी। हिन्दी गति और शुद्धता के साथ टंकित करने का इस से बेहतरीन कोई और साधन नहीं है।

  15. मुझे इंस्क्रिप्ट में टाइपिंग नहीं जमती क्योंकि ये मशीनी टाइपराइटर व इलेक्ट्रानिक टाइपराइटर से पूर्णत: भिन्न है। जबकि हमें ऑफिसों में कभी कभी गोदरेज टाइपराइटर पर भी काम करना होता है। इसलिए मैं CDAC Gist OT Typing Tool के द्वारा typewriter लेआउट चुनकार अपना कार्य करता हूँ। परन्तु अब लगता है कि देर सवेर इंस्क्रिप्ट सीखना ही पड़ेगा। एक बात और ड़ ढ़ आदि मात्राओं में बिन्दु सही जगह पर नहीं होता है। यह यूनिकोड की समस्या है

  16. अब हिन्दी लिखने के लिए इंस्क्रिप्ट कीबोर्ड उपलब्ध है:
    http://anektameekta.blogspot.com/2009/03/devnagri-hindi-typing-complete-solution.html

    इसे आजमाएँ और अपने विचार बताएँ।

    नमस्कार,
    सुरेश

  17. इन्स्क्रिप्ट से बढ़िया(अच्छा) कुछ भी नहीं। वेद प्रकाश जी द्वारा लिखित “हिन्दी कम्प्यूटरी” पुस्तक का अध्ययन करें और “आसान टाइपिंग ट्यूटर” का अभ्यास हेतु उपयोग करें। हरिराम जी से मैं बिल्कुल असहमत हूँ।

  18. अभी तो हम अभ्यास में हैं,,,,

  19. TL;DR

    श्रीश भाई,

    मैंने एक दो दिन तख्ती पर लिखने के बाद इन्स्क्रिप्ट का प्रयोग शुरु कर दिया था। अब तो ये आलम है कि शायद अंग्रजी से ज्यादा स्पीड हिन्दी की है। बाकी लगता है ऊपर भाई बंधू काफी लिख चुके हैं तो सभी फायदे पता लग ही गए होंगे

    पंकज

  20. कुछ टिप्पणियों का उत्तर सालों बाद है, दरअसल नयी टिप्पणियों का उत्तर देते हुये मैंने सोचा पुरानी का भी दे ही दूँ। :-)

    @हरिराम,
    सही बात है हरिराम जी की इन्स्क्रिप्ट में कुछ कमियाँ हैं लेकिन वर्तमान में यह हिन्दी आदि भारतीय भाषायी इनपुट हेतु सर्वश्रेष्ठ टाइपिंग विधि है।

    @Suresh Chiplunkar,
    आप एक बार इन्स्क्रिप्ट सीख कर तो देखें, फोनेटिक को भूल जायेंगे।

    @दिनेशराय द्विवेदी,
    सहमत हूँ आपसे, छुट्टियों का सही उपयोग किया आपने।

    @सुरेश शुक्ला,
    धन्यवाद जी लिंक के लिये। वैसे इन्स्क्रिप्ट सीखने के लिये जरुरी नहीं कि ऐसा हार्डवेयर कीबोर्ड खरीदा जाय, फिर भी यदि मन न माने तो इन्स्क्रिप्ट के स्टीकर भी मिलते हैं या छापे भी जा सकते हैं जिन्हें कीबोर्ड पर चिपकाया जा सकता है।

    @उमेश पाण्डेय,
    उमेश जी यह प्रश्न दो साल पहले के हैं जब मैं इन्स्क्रिप्ट सीखने को लेकर दुविधा में था। अन्ततः मैंने सीखने का निश्चय किया और सीख ही लिया।

    @प्राइमरी के मास्साब,
    लगे रहिये जी, आपको भी इन्स्क्रिप्ट क्लब में लाकर ही छोड़ेंगे।

    @पंकज नरुला,
    शायद आपने यह पुरानी पोस्ट आज ही पढ़ी। मैं कब का आपके पाले में आ चुका हूँ।

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