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हरियाणवी मखौल – नूं देखण का


नत्थू नै आंख्यां तै कम दिख्या करदा। एक दिन वो शहर म्ह तै तीन चश्मे बणवा के लियाआ। उसका छोरा बोल्या – बाबू इतणे चश्में क्यांतै बणवा के ल्याआ सै। नत्थू बोल्या - एक तो दूर की चीज देखण का सै अर एक धौरे की चीज देखण का सै। उसका छोरा पूछण लाग्या - अर यो तीसरा। नत्थू बोल्या – यो नूं देखण का सै अक कोणसा चश्मा दूर का सै, अर कोणसा चश्मा नजदीक का सै



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