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कंप्यूटिंग शब्दों का हिन्दी अनुवाद कैसा हो ?


हाल ही में रवि जी ने कंप्यूटिंग शब्दों के हिन्दी अनुवाद संबंधी पोस्ट लिखी जिसमें उन्होंने हिन्दी के अनुवादित शब्दों का तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया। रवि जी ने बताया कि वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग की मुंबई में संपन्न राष्ट्रीय गोष्ठी में इस संबंध में काफी बहस हुई। रवि जी समेत इंडलिनक्स से जुडे़ व्यक्ति सरल हिन्दी के पक्षधर हैं जानकार खुशी हुई। मैं बहुत बार इस विषय में अपने विचार प्रकट करने की सोची लेकिन टलता रहा, हाल ही में यह पोस्ट पढ़कर लिखने का मूड बना।

अब एक बात तो पक्की है कि सभी हिन्दी ब्लॉगर साथी सरल हिन्दी के पक्षधर हैं, यह बात रवि जी की पोस्ट पर टिप्पणियों से सपष्ट है। मैं भी सरल हिन्दी अनुवाद का पक्षधर हूँ। क्यों ? यही बताने के लिए यह पोस्ट लिखी है।

मैं भाषा के मामले में काफी शुद्धतावादी हूँ। वर्तनी की अशुद्धियाँ खासकर मुझे विशेष कष्टप्रद लगती हैं। इसके अलावा मैं हिन्दी में अंग्रेजी के शब्दों के अनावश्यक प्रयोग के भी खिलाफ हूँ। लेकिन कंप्यूटिंग और इंटरनेट संबंधी शब्दों के मामले में मेरा मानना है कि सरल हिन्दी का ही प्रयोग हो, प्रचलित शब्दों का ही प्रयोग किया जाए ।
अब इस चर्चा के दो पहलू हैं:

  1. हम इंटरनेट और ब्लॉगजगत में किस प्रकार के शब्दों को बढ़ावा दें।
  2. शब्दों के हिन्दी अनुवाद के मामले में क्या मानक हों।

१. हम इंटरनेट और ब्लॉगजगत में किस प्रकार के शब्दों को बढ़ावा दें।

इंटरनेट पर विभन्न जगहों पर यथा विभिन्न साइटों, ब्लॉगों, फोरमों, विकी आदि पर किस प्रकार का शब्दों का प्रयोग हो इस पर सब लोग अलग-अलग राय रखते होंगे। कुछ इंग्लिश के प्रचलित शब्दों को ही अपनाने के पक्षधर हैं कुछ नए शब्द गढ़ने के। इस विषय में अपनी राय रखने से पहले मैं अपना अनुभव बताना चाहूँगा।

यह पिछले साल अगस्त के आस-पास की बात है जब मैं हिन्दी चिट्ठाजगत से परिचित हुआ ही था। शुरु में मैं मोहित सा हुआ विभिन्न ब्लॉगों को पढ़ता ही गया। उन दिनों कुछ ब्लॉग पढ़ता था, फिर परिचर्चा और सर्वज्ञ से परिचय हुआ। अब ये तब की ही बात है मुझे हिन्दी पढ़ना बहुत अच्छा लग रहा था लेकिन कई ब्लॉगों और सर्वज्ञ आदि पर कई शब्द समझ ही नहीं आते थे। उदाहरण के लिए चिट्ठा, संजाल, जालस्थल, कड़ियाँ, प्रविष्टि आदि कई शब्द। तंत्राश क्या बला है यह तो मुझे आज तक मालूम नहीं हुआ। यह हाल तब था जबकि मेरे विचार से मेरी हिन्दी तुलनात्मक रुप से काफी अच्छी है। तो जी मैंने सर्वज्ञ पर कई लेख पढ़े लेकिन वो मुझे कतई समझ नहीं आए। इसके अलावा भी कई ब्लॉगों और परिचर्चा पर भी मुझे बहुत शब्द समझ ही नहीं आते थे।

मुझे पुराने चिट्ठाकारों से एक शिकायत है कि वे अक्सर कई मामलों में अपने शुरुआती दिनों को भूल जाते हैं। वे यह बात नहीं समझते कि जो शब्द उनके लिए बिल्कुल सरल हैं हिन्दी चिट्ठाजगत से अपरिचित आदमी के लिए वे बिल्कुल अनजाने हैं। मैं दावा करता हूँ कि एक आम आदमी जो सालों से कंप्यूटर और नेट का प्रयोग करता आ रहा है नहीं बता पाएगा कि कड़ी, प्रविष्टि, संजाल आदि क्या बलाएं हैं। अब माना कहीं एक लेख है ब्लॉग कैसे बनाएं, उसमें ऐसे शब्द होंगे तो वह क्या खाक समझेगा और क्या खाक चिट्ठा बनाएगा। लेख है हिन्दी में टाइप कैसे करें और उसमें शब्द इस्तेमाल हैं टंकण, कुंजीपटल तो सीख ली अगले ने टाइपिंग। ऐसे लेखों को पढ़कर अगला यही इंप्रैशन लेकर जाएगा कि भईया यह तो पहुँचे हुए लोगों का काम है अपने बस का नहीं है। अब भैया हम तो थे हिन्दी प्रेमी इसलिए सब मामला पता लगाकर छोड़ा लेकिन कई लोग निकल जाते हैं।

एक उदाहरण सुनिए एक दोस्त को कहा कि ब्लॉग पढ़ने आना और कमेंट करना। चार दिन बाद पूछा हाँ पढ़ा क्या बोला हाँ मैंने कहा कमेंट तो दिखी नहीं बोला लिंक ही नहीं था मैंने कहा था क्यों नहीं नीचे है टिप्पणी करें बोला मुझे क्या मालूम यार तुम लोग कमेंट को टिप्पणी बोलते हो।

इस मामले में मेरी क्या राय है।

तकनीकी लेखों, टटोरियलों, सर्वज्ञ विकी पर, अखबारों पत्र-पत्रिकाओं में छपने वाले हिन्दी ब्लॉगिंग संबंधी लेखों तथा ऐसे लेखों जो खासकर नए लोगों के लिए लिखे गए हो आदि में इंग्लिश के ही प्रचलित शब्दों का प्रयोग किया जाए। संजाल को इंटरनेट, जालस्थल को वेबसाइट, कड़ी को लिंक, प्रविष्टि को पोस्ट आदि लिखा जाए। इसीलिए मैं तो अधिकतर प्रचलित शब्द ही प्रयोग करता हूँ जैसे बुकमार्क, पोस्ट, कॉपी-पेस्ट, लॉगइन आदि

इस बारे में अतिभावुकता से बचा जाए। बाकी आम तौर पर जो मर्जी शब्द प्रयोग हों। उदाहरण के लिए संगणक, संजाल आदि धृतराष्ट्र-संजय की चिट्ठाचर्चा में मजेदार लगते हैं लेकिन उपरोक्त प्रकार के लेखों में कंप्यूटर, इंटरनेट उपयुक्त हैं।

२. शब्दों के हिन्दी अनुवाद के मामले में क्या मानक हों।

अब रवि जी की पोस्ट के असल मुद्दे पर आते हैं। रवि जी द्वारा जिक्र किए गए पर्चे में एक बहुत अच्छा तुलनात्मक चार्ट है उनमें से जरा कुछ शब्दों पर नजर डालिए: योजी संकलन, संरेखण, प्रकटन, रेखिका, निरसन। आपको इनमें से कितनों का मतलब पता है? इन शब्दों से दूर दूर तक अंदाजा नहीं आता कि ये क्या बताते हैं। ये हाल तो हमारा है जो कंप्यूटर पर रात दिन हिन्दी में लिखते, बात करते हैं दूसरों को ये कितना पल्ले पड़ेंगे आप अंदाजा लगा सकते हैं।

इस मामले में अपना अनुभव बताता हूँ। कोई दो तीन साल पहले की बात है लिनेक्स का शौक चर्राया था। लिनक्स फॉर यू पत्रिका लाया उसके साथ कुछ सीडियाँ थी जिनमें भव्य (Bhavya OS) नाम से लिनेक्स का एक हिन्दी डिस्ट्रीब्यूशन भी था। हिन्दी ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में जानकर बड़ी हैरानी और खुशी हुई। यह एक लाइव सीडी थी, डालकर चलाया। अब लिनेक्स का इंटरफेस ग्राफिकल होने से आसान होता है लेकिन यहाँ कुछ समझ ही न आता था कि क्या करने को कहा है संपादन, प्रवेश करें, स्थापित करें आदि। अब आज तो ये चीजें समझ आती हैं लेकिन तब नहीं आती थी। अगर वह ऑपरेटिंग सिस्टम मुझे तब समझ में आ जाता तो हिन्दी चिट्ठाजगत में शायद दो तीन साल पहले आ गया होता।

अब बहुत जटिल शब्दों को छोड़ भी दें तो कई सामान्य शब्द भी एक नए आदमी को समझ नहीं आते। कई शब्द हैं जैसे संपादन, पंजीकरण, प्रतिलिपि, पसंद आदि जिनका सामान्य अर्थ उसे मालूम है लेकिन वो इनका कंप्यूटिंग के संदर्भ में मतलब नहीं समझ पाता। वह जान नहीं पाता कि संपादन से मतलब एडिट करने से है, पसंद फेवरिट्स के लिए है आदि।

लेकिन उपरोक्त शब्द चलेंगे, इतना तो हिन्दी अनुवाद होना ही चाहिए। थोड़े समय बाद आदमी इन्हें समझा जाता है। मेरा विरोध उन क्लिष्ट, ऊटपटांग अनुवादों से है जिन्हें कुछ मूर्धन्य हिन्दी विद्वान हम पर लादना चाहते हैं। यह योजी संकलन, संरेखण, प्रकटन, रेखिका, निरसन, तंत्राश जैसे अनुवाद मूर्खतापूर्ण हैं। जब हम आम जिंदगी में File को फाइल बोलते हैं तो कंप्यूटर पर संचिका क्यों लिखें। क्या ऐसे अनुवादकर्ता खुद इस तरह के क्लिष्ट शब्द बातचीत में बोलते हैं? बिल्कुल नहीं फिर इनके प्रयोग का क्या औचित्य।

रह गई बात सरकारी हिन्दी की तो भगवान बचाए उससे। संजय भाई के शब्दों में कहें तो वो दूसरे ग्रह की भाषा लगती है। खुद तो उनके विभागों में सब काम इंग्लिश में होता है और हमारे लिए ऐसी जटिल हिन्दी? मुझे हिन्दी में गणित, विज्ञान पढ़ाने के लिए भी इंग्लिश की पुस्तक रखनी पड़ती है क्योंकि एनसीईआरटी की किताबों में कई वैज्ञानिक और गणितीय शब्द भी घनघोर साहित्यिक टाइप होते हैं जिनका मतलब कतई पल्ले नहीं पड़ता।

अनुवाद ऐसा हो जिससे सपष्ट समझ आए। उदाहरण के लिए एक बार गूगल ग्रुप में एक बटन का नाम था छोड़िए अब यह छोड़िए क्या हो सकता है कुछ अंदाजा ही नहीं आता। मैंने उसे Send समझ कर क्लिक कर दिया। बाद में पता लगा कि वो Cancel था अब इसके लिए सही शब्द होना चाहिए था रद्द करें। ऐसे गलत अनुवाद के उदाहरण कई जगह देखने को मिलते हैं जो अर्थ का अनर्थ कर देते हैं।

अब कई शब्द हर भाषा में ऐसे होते हैं जिनके लिए किसी अन्य भाषा में एकदम सही शब्द होता ही नहीं। जबरदस्ती कोई शब्द ढूंढ भी लो लेकिन वो भाव प्रकट हो ही नहीं सकता। उदाहरण के लिए Text के लिए हिन्दी में कोई उपयुक्त शब्द है ही नहीं क्योंकि यह कंप्यूटिंग से उपजा शब्द है वैसे जबरदस्ती की बात अलग है कि पाठ बोल लो। कुछ शब्द ऐसे हैं कि उनकी हिन्दी हो ही नहीं सकती जैसे Feed का क्या अनुवाद करेंगे चारा या खिलाना/खिलाओ इसके लिए फीड लिखना ही सही है। अगर कोई जबरदस्ती हिन्दी करे तो क्या किया जा सकता है।

रवि जी ने “विंडोज़ एक्सपी हिंदी | शब्दावली आयोग | इंडलिनक्स” के अनुवादों का जो तुलनात्मक चार्ट दिया है उसे देखकर पता चलता है कि इंडलिनक्स वालों के अनुवाद सबसे उपयुक्त हैं। इसके लिए वे बधाई के पात्र हैं। उम्मीद करता हूँ कि लिनक्स की हिन्दी सरल होती होगी।

अंत में एक चुटकुला सुनाता हूँ जो बारहवीं कक्षा में हमारे हिन्दी शिक्षक ने सुनाया था।

एक आदमी रिक्शे वाले के पास गया और बोला – भाई सचिवालय चलोगे।
रिक्शे वाला - कहाँ जी?
आदमी – सचिवालय भाई सचिवालय।
रिक्शे वाला – हिन्दी में बताइए साब।
आदमी – सैक्ट्रिएट चलना है?
रिक्शे वाला – हाँ बिल्कुल, बैठो न साब।

(इसी कड़ी में कल एक पोस्ट प्रकाशित करुँगा – क्या ब्रांडनामों का हिन्दीकरण उचित है?)








10 टिप्पणियाँ

  1. मैं आपके विचारों से सहमत हूं.

    क्लिष्टता नये सीखने वालों को खिजा सकती है इसके चलते आसान बात भी कठिन लग सकती है.

    मुद्दा ये है की समय के साथ साथ हमें कई जटिल तकनीकी बातें भी पाठकों को सिखानी होगी और इसके लिये बात सीधी समझ में आए ये ज्यादा जरूरी है.

  2. वाह वाह श्रीश भाई!! मजा आ गया आपके इस हास्य पुट लिये हुए, जटिल हिन्दी शब्दों से अन्तरजाल पर आये नवागन्तुकों (नव आगन्तुकों?) के लिये होने वाली मुश्किल का उत्कृष्ट विश्लेषण करने वाले लेख को पढकर!!!
    वैसे मुझे ‘योजी संकलन, संरेखण, प्रकटन, रेखिका, निरसन, तंत्राश ‘– इसमे से एक भी शब्द समझ मे नही आया..और मेरी हिन्दी भी बुरी नही है!
    मेरी छोटी बेटी को “टिप्पणी” शब्द बहुत मजेदार लगता है.

  3. मेरे चिट्ठे पर किसी ने हिन्दी लिखने के लिये पूछा है, मैने आपके चिट्ठे का पता दिया है लेकिन लिन्क (कडी?)
    नही दे पाई..मेरे ‘अद्भुत’ तकनीकी ज्ञान से आप परिचित हैं ही! अगर हो सके आप उन्हे सम्बधित कडियाँ टिप्पणी द्वारा बता दें.

  4. सही है! अनुवाद सरल होने चाहिये। लेखन ऐसा कि एकदम समझ में आ जाये। अच्छा लिखा!

  5. भाषा की सरलता का पक्षधर तो मै भी हूँ, इसके लिये सामूहिक और समुदायिक सहयोग के बिना सम्‍भव नही होगा।

    हमें यह शब्द हमें यह शब्द इस लिये कठिन लगते है क्‍योकि हमने इनका प्रयोग बन्‍द कर देते है। जैसे आप सचिवालय पर ही कहते है व्यंग करते है, ऐसा नही है कि यह बहुत क्‍लिष्‍ट शब्‍द है यह हिन्‍दी के अन्‍य शब्‍दों की भाति यह शब्द भी आम है। बस बात यहीं आकर रूकती है कि हम अपने दैनिक जीवन मे इनका प्रयोग नही कर रहे है, इस लिये हम इन शब्‍दों से परिचित नही है।

    अक्‍शर जब आप कहीं जा रहे होते है जो कुछ रिक्‍से व टैम्‍पो वाले स्‍टेशन का भी शॉटकट टेशन टेशन करते है। ऐसा नही है कि यह अग्रेजी का शब्द भी कठिन है।

    अगर हम नित्‍य दैनिक कम्‍प्‍युटर मे हिन्‍दी शब्‍दों का प्रयोग अग्रेजी शब्‍दों का प्रयोग करे तो वह दिन दूर नही जब हिन्‍दी की क्लिस्‍टता दूर हो जायेगी और कम्‍प्‍युटर के क्षेत्र मे हिन्‍दी की एक अपनी समृद्ध शब्‍दावली होगी।

  6. बिल्कुल सही कर रहे हो भाषा सरल ही होनी चाहिये, चुटकुला पढके मजा आ गया :)

  7. यही बात श्रीश मै मेडिकल से भी संबधित शब्दों मे कहना चाहूगाँ। जो शब्द अंग्रेजी भाषा मे अधिक व्यवहारिक हैं , उनका हिन्दी मे अनुवाद करना कोई तुक की बात नही लगती। pectoral girdle और pelvis girdle को अंस-मेखला या श्रोणिमेखला कहना और समझना कोई बहुत अधिक ठीक नही लगता।

  8. श्रीश भाई!! आपने बिल्कुल मेरे मुँह की बात कह दी है. हम सबका यथासंभव हिंदी का प्रयोग करना यूँ तो सराहनीय है, पर हमें इसका भी ध्यान रखना चाहिए कि अति-हिंदी का प्रयोग पठनीयता को प्रभावित न करे, क्योंकि अंतिम उद्देश्य तो अपनी बात को लोगों तक पहुँचाना है.

  9. पंडित जी,

    कुछ बातों से तो सहमति है लेकिन सार तो यही है कि नये शब्द सीखे बिना हम चाहते हैं कि सब कुछ पढ समझ लें। आप जो समस्या गिना रहे हैं, उनमें से कई सोचने लायक निश्चय ही हैं लेकिन मैं जानना चाहूंगा कि मंत्रालय, राष्ट्रपति, संसद जैसे हजारों शब्द या विज्ञान शब्द ही आज से 150 साल पहले लोगों में चलता ही नहीं था या अर्थ बिलकुल अलग था, लेकिन आज ऐसा होता है? चीनी भाषा में कम्प्यूटर के शब्द अंग्रेजी वाले होते हैं, इसमें मुझे संदेह है। क्योंकि मैंने जितने शब्द जो अत्यन्त प्रचलित हैं खोजे, सबका चीनी में उनका चीनी पर्याय ही पाया। उसकी एक सूची बना रहा हूँ। वैज्ञानिक अनुवाद की समस्याएँ में भोलानाथ तिवारी ने कहा है कि अगर हम अधिक उदार बनना शुरू कर देते हैं तब धीरे-धीरे हम आश्रित होते चले जाते हैं और होने लगेंगे। संस्कृत संगणक कोश में साफ्टवेयर के लिए तंत्राश कहा गया है। अंग्रेजी के प्रचलित शब्दों पर भी आराम से कुछ कहा जा सकता है। जैसे प्रोग्राम शब्द ही लेते हैं। क्या कम्प्यूटर नहीं जाननेवाला एक व्यक्ति जो स्वयं अंग्रेज है, वह भी समझ सकता है कि प्रोग्राम का अर्थ कम्प्यूटिंग में क्या होता है? ……हमारे मतभेदों का परिणाम होता है कि दस आदमी कम्प्यूटर के लिए दस तरह के शब्दकोश बना डालता है, भला साधारण लोग पढ़ें किसमें? आगे बाद में…

    • आप ठीक कहते हैं परन्तु मेरा आशय यह नहीं कि हिन्दी विकल्प न खोजे जायें बल्कि यह है कि सरल शब्द खोजे जायें।

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