सुनो सुनो गांव वालों, गूगल सर्च और जीमेल में भी हिन्दी ट्रांसलिटरेशन टूल आ गया
भईया बोत गुड न्यूज लाया हूँ। एक्साइटमेंट के मारे बोलना (टाइप करना) मुश्किल हो रहा है। गूगल बाबा ने फिर भक्तों पर कृपा की है।
आज बहुत दिनों बाद अपने फीड रीडर में गया तो बीसियों पोस्टें इकट्ठी हो रखी थी। गूगल ऑफिशियल ब्लॉग पर ये धमाकेदार न्यूज मिली तो मैं उछल पड़ा और बिना देर किए ये पोस्ट लिखने बैठ गया। ब्लॉगर के बाद अब गूगल बाबा ने गूगल सर्च और जीमेल में भी हिन्दी ट्रांसलिट्रेशन टूल लगा दिया है। जरा स्क्रीनशॉट देखिए।
इसके लिए गूगल सर्च की Preferences में जाइए और Show Transliteration Button चैक बॉक्स में Yes सलेक्ट करिए, यही प्रक्रिया जीमेल की सैटिंग्स में भी दोहराइए। हाँ गूगल सर्च में ये सिर्फ गूगल भारत वाले पेज में उपलब्ध है। कीमैप वही है ब्लॉगर वाला और कमी भी वही है कि सर्वर पर आधारित होने से टाइपिंग स्लो है और ऑफलाइन नहीं लिखा जा सकता। अब गूगल सर्च में तो ये कोई मुद्दा नहीं और ईमेल ऑफलाइन लिखता कौन है, जिसको लिखना है वो थंडरबर्ड जैसा ईमेल क्लाइंट प्रयोग करेगा अतः ये कोई खास दिक्कत नहीं।
अब वैसे हम सब के पास तो टाइपिंग टूल हैं हि लेकिन इससे दो फायदें हैं एक तो ये कि बंदा जब अपने घर से बाहर ऑफिस, कैफे आदि में होगा तो भी बिना किसी टूल के भी हिन्दी में सर्च कर सकता है और ईमेल भेज सकता है। इससे अब किसी को भी हिन्दी में ईमेल न लिखने का बहाना नहीं मिलेगा।
लेकिन असली फायदा तो दूसरा है जिसके कारण मैं इतना उत्साहित हूँ। एक तो इससे जनता को जो हिन्दी टाइपिंग और ब्लॉगिंग से अनभिज्ञ है पता चलेगा कि हिन्दी में भी मेल भेजी जा सकती है। लेकिन असल चीज है गूगल सर्च जिससे नए लोग भी हिन्दी ब्लॉगों और दूसरी हिन्दी साइटों पर पहुँचेंगे और हिन्दी जगत में प्रवेश करेंगे।
अक्सर बहुत से हिन्दी ब्लॉगरों की कहानी यही होती है कि तुक्के से (Accidentally) किसी हिन्दी ब्लॉग पर पहुँचे। पहले तो उसे भयंकर हैरानी होती है कि हिन्दी में भी ब्लॉग या साइटें होती हैं फिर वह एक ब्लॉग से दूसरे ब्लॉग पढ़ता जाता है। कुछ दिन बाद उसे खुद भी ब्लॉगियाने की खुजली होने लगती है और जहाँ चार पोस्टें लिखी फिर ये बीमारी उसे छोड़ती नहीं।
ये तो सभी जानते हैं कि इंग्लिश ब्लॉगों पर आने वाले ट्रैफिक का बहुत सा हिस्सा गूगल सर्च से आता है। अब दिक्कत ये है कि आम जनता को ये मालूम ही नहीं है कि हिन्दी में भी टाइप होती है जिससे कि वह गूगल में खोज सके। दूसरी बात कि अगर वो कभी सुनता भी है तो तो सोचता है कि हिन्दी टाइप तो सीखनी वगैरा पड़ती होगी इसलिए अपने बस की नहीं। लेकिन इस टूल के आने से वो खुद टाइप करके सर्च कर सकेगा और नतीजतन हिन्दी जगत से परिचित होगा।
अब मुझे नैट पर हिन्दी का भविष्य उज्जवल दिखाई दे रहा है। और हाँ जैसा कि कई बार बात हो चुकी है कि व्यावसायिक चिट्ठाकारी का स्वप्न तभी सार्थक होगा जब पाठक बढ़ेंगे। जैसा ऊपर कहा कि इंग्लिश ब्लॉगों का अधिकतर ट्रैफिक आता है गूगल से और अब गूगल बाबा भी लोगों को हिन्दी ब्लॉगों पर भेजेंगे तो अपनी बिरादरी तो बढ़नी ही है साथ ही भाई लोगों का चिट्ठों से चार पैंसे कमाने का अरमान भी पूरा होगा। मैंने तो आज से ही गूगल एडसेन्स भी लगा दिया है। ![]()
अब दिक्कत सिर्फ एक है कि Preferences में जाकर टूल दिखाने की सैटिंग करनी पड़ती है, आम इंटरनैट प्रयोगकर्ता को मालूम कैसे पड़ेगा कि गूगल और जीमेल में ये सुविधा भी है आई है। क्या ही अच्छा होता यदि गूगल अपने भारत वाले पन्ने पर इस टूल को बाई डिफॉल्ट लगाता क्योंकि भारत में गूगल.कॉम खोलने पर वह खुद ही गूगल.को.इन पर रीडायरेक्ट हो जाता है इससे कम से कम भारत वाले बंदो को तो पता लग ही जाता। खैर फिलहाल यही हो सकता है कि कुछ बंदों को Preferences सैट करते हुए इस विकल्प का पता चल जाए। एक काम और होना चाहिए था कि गूगल और जीमेल में भाषा हिन्दी सैट करने पर ये टूल खुद ही आ जाना चाहिए था। बल्कि ये बात तो ब्लॉगर में भी होनी चाहिए थी ताकि कोई बंदा भाषा हिन्दी सैट करे तो उसे टूल लगा मिलने पर पता चल जाए कि ब्लॉग हिन्दी में भी लिखा जा सकता है। खैर कहते हैं कि “समथिंग इज बैटर देन नथिंग”।
कुछ साथी सोच रहे होंगे कि मैं ओवर एक्साइट हो रहा हूँ लेकिन शर्त लगा लीजिए कि आने वाले कुछ ही समय में हिन्दी पाठकों की संख्या स्पीड ऑफ लाइट से न बढ़े तो। सच में ये साल नेट पर हिन्दी के नाम रहा, मैं तो कहता हूँ इसे “इंटरनेट पर हिन्दी वर्ष” के रुप में मनाना चाहिए। अब मैं ज्यादा क्या कहूँ शब्द नहीं मिल रहे, भाईलोग खुद समझ रहे होंगे।
ये टूल टैस्ट करके डिटेल में समीक्षा लिखूँगा। अभी तो जरा जीमेल में इससे मेल भेज कर देखता हूँ। आप लोग भी मजे लो। ![]()
























he he 1 April ki kisi khabar per dhyan nahi dena hai, ise phir se 2 april ko likho phir dekhenge aap kya keh rahe ho
अरे हद हो गई यार एक अप्रैल को कोई नॉर्मल पोस्ट नहीं लिख सकते क्या। मेरी सुबह वाली पोस्ट भी जोक थी क्या? और इस पोस्ट में फूल बनाने वाली क्या बात है? खुद देख लो।
मुझे अप्रैल फूल बनाना होता तो सीरियस सी पोस्ट लिखता, सीरियस सा टाइटल रखता। अप्रैल फूल बनाने के लिए इससे बेहतर कई तरीके थे।
गलती हो गई जो ये पोस्ट कल पब्लिश की। अब समझ आया कोई कमेंट क्यों नहीं आई अब तक लोग अप्रैल फूल का जोक समझ कर आए ही नहीं। अच्छी खासी पोस्ट का सत्यानाश हो गया, ये पोस्ट आज करनी चाहिए थी लेकिन क्या करुँ खबर ऐसी थी कि रुका न गया।
सच में पंडित होते हुये दिनांक का ख्याल नहीं रखते तो टिप्पणी कैसे आयेंगी. सब कन्फ्यूजिया गये न!!
नाराज काहे होते हो पंडित जी – हमें आपसे फ़ूल बनना भी पसंद है। वैसे आप हमेशा से बढिया ख़बरें सुनाते हो। मैं ने अभी तक ट्राई नहीं मारा, फिर भी पूछ रहा हूं कि गूगल वालों ने कौनसा कीबोर्ड लगाया है।
ख़बर सुनाने के लिए धन्यवाद
वाह पण्डितजी मैं तो फुल्ली फूल बन गया। दरअसल मैंने ये पोस्ट आज पढी और फूल्स-डे वाली बात दिमाग में नहीं आयी। मैं तो सच में बहुत खुश हो गया था, गूगल वालों को दुआयें दे रहा था। कल तो बच गये आज बिलेटेड अप्रिल फूल मन गया। वैसे बधाइ हो आपको, बडी मेहनत की थी।
@उड़नतश्तरी,
ठीक कहते हैं समीर जी आगे से ध्यान रखूँगा। खैर देर सवेर तो सबको इस टूल का पता लग ही जाएगा।
@Shuaib,
शुएब भाई धन्यवाद, कीबोर्ड वही ब्लॉगर की तरह फोनेटिक वाला है, कीमैप भी वही है। कीमैप कुछ समय पहले जीतू भाई ने अपनी एक पोस्ट पर दिया था, वही यहाँ भी काम करेगा।
@विशाल सिंह,
अरे विशाल भाई फिर वही दिक्कत, ये कोई फूल वूल नहीं। आप गूगल.कॉम का पेज देख रहे हो। गूगल भारत का हिन्दी पेज देखो।
यार बड़ा परेशान किया आपके इस टूल में पहले तो मिला ही नहीं और जब मिला तो बहुत ही झंझटी निकला।
यार इसे इनेबल करने में नाक में दम हो गया, दूसरा टाइपिंग स्पीड बहुत स्लो है। अब गूगल सर्च में तो कोई बात नहीं पर जीमेल में दिक्कत है।
ऐसी दुकानदारी चलायेंगे गूगल वाले तो गल गयी उनकी दुकानदारी।
मेरे दो घंटे बिगाड़ने के लिये आपको पाँच टिप्पणियाँ देनी होगी मेरे चिट्ठे पर।
और हाँ सभी टिप्प्णीकारों यह अप्रेल फूल नहीं था
अरे भाई उपर वाली टिप्प्णी मैने यानि सागर चन्द नाहर ने दी है पर पता नहीं क्यों मेरा नाम श्रीश जी के टोटकों ने गायब कर दिया है।
एक तो टूल लगाने में परेशान किया और अब मेरा नाम गायब कर दिया। मैं ग्राहक सुरक्षा अधिनियम के तहत आप पर मुकदमा कर रहा हूँ।
सागर चन्द नाहर
“…ये तो सभी जानते हैं कि इंग्लिश ब्लॉगों पर आने वाले ट्रैफिक का बहुत सा हिस्सा गूगल सर्च से आता है। …”
अब तो हिन्दी चिट्ठों पर भी ट्रैफ़िक का अधिकांश हिस्सा गूगल सर्च से ही आता है – परंतु फिर चिट्ठों में सर्च लायक सामग्री भी तो होनी चाहिए.
हिन्दी का समय आ रहा है.
Tranliteration अर्थात् लिप्यन्तरण का यह औजार बच्चों(हिन्दी में नए इण्टरनेट/ई-मेल करनेवालों) के लिए लॉलीपॉप जैसा दिखता है, किन्तु सावधान! यह कई बीमारियाँ (तकनीकी) पैदा करनेवाला है। इसकी बुरी लत न लगाएँ। फिलहाल कामचलाऊ रूप में भले ही प्रयोग करें। इससे बेहतर,तिगुनी गति और आधे श्रम से देवनागरी इनपुट हेतु एक औज़ार यथाशीघ्र अवतार लेनेवाला है।
अपना क्या देसी व्रर्जन क्या कम है ??
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भैया मैने तो डिफाल्ट साइट भी गूगल को ही रखा है
और कम से मेरा यह टूल दुनिया की हर साइट पर तो काम करता है
वैसे इस मूर्खिस्तान के निवासियों को, एक महामूर्ख की ओर से, मूर्खदिवस की हार्दिक बधाइयाँ
shrish ji
abhee aapke lekh se pata chala ke gogle ne apne email main bhe hindi tool lagga diya hai. khushee hueee. aap aise hee jankaree dete rhiye to hamein jankaaree miltee rhegeee.
kya yeh 98 par bhi kaaam karta hai kya?
क्षमा करें, किन्तु ज़ीमेल में सेटिंग्स के अंतर्गत मुझे कहीं भी ट्रांसलिटरेशन संबंधी चेकबॉक्स नहीं दिखा! और न ही गूगल सर्च में !!
ये चक्कर क्या है भाई ?
halo atul jee kaya hall hai