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एक और चिट्ठा-चोरी


मेरा हिन्दी टाइपिंग वाला लेख चोरी

हिन्दी चिट्ठाजगत से भी चोरियों की घटनाएँ बढ़ गई हैं। कुछ दिनों थोड़ी शांति रहती है फिर कोई इस तरह की घटना हो जाती है। हाल ही में देखा कि मेरे हिन्दी टाइपिंग वाले लोकप्रिय लेख को किसी ‘कौशिक दास’ महोदय ने अपने इंग्लिश ब्लॉग पर छाप रखा है। अनुमति लेना तो दूर की बात, वहाँ मेरे नाम, ब्लॉग अथवा पोस्ट का कोई उल्लेख तक नहीं है।

मूल लेख यहाँ पर है:

सबसे पहले मैंने इसे डिजिट फोरम के लिए लिखा था:

यह वहाँ काफी पसंद किया गया, तब इसे विस्तार से अपने चिट्ठे पर लिखा। इसे जैसे का तैसा टीप कर बल्कि यूँ कहें कि कॉपी-पेस्ट कर यहाँ छापा गया है:

यह लेख अभिव्यक्ति, प्रभासाक्षी तथा मीडियाविमर्श पर प्रकाशित हो चुका है।

इस तरह की चोरियों की बढ़ना चिंता का विषय है। हाल ही में रवि जी ने अपनी एक पोस्ट की चोरी का उल्लेख किया था। हिन्दी के प्रसार के साथ इस तरह की घटनाएँ और बढ़ेंगी। इसलिए हिन्दी चिट्ठाकारों को इस बारे में जागरुक होने की जरुरत है।

इस लेख में मेरे चिट्ठे की अन्य पोस्टों के भी लिंक थे जिस वजह से वहाँ छापे गई पोस्ट का बैकलिंक मेरे चिट्ठे पर आ गया, साथ ही मेरे स्टैटकाऊंटर में भी एक इनकमिंग लिंक वहाँ से आया अन्यथा तो यह चोरी निगाह में ही नहीं आती।

मैंने उपरोक्त पोस्ट पर टिप्पणी की है, देखते हैं क्या होता है। आप भी टिप्पणी द्वारा विरोध दर्ज कराएँ।



चिप्पियाँ: ,




15 टिप्पणियाँ

  1. इस तरह की चोरियों की बढ़ना चिंता का विषय है।
    gpl and creative commons के युग में, tutorials का चोरी होना मेरे हिसाब से अच्छा है, इससे यह पता चलता है आप कितने लोकप्रिय हो रहे हैं, और आपके लेख कितने सटीक व उपयोगी हैं। । अगर आप उमीद करें कि सब आप की साईट पर आ के ही पढ़ लेंगे तो वो मुशकिल है। जहाँ बात रही चोरी कर नाम देने की, आप बस हर लेख के साथ डाल दो, भई चोरी करने वाले मेरा नाम भी डाल देना।

  2. यह चिंता का विषय है. उन्हे आपकी अनुमति से आपके नाम के साथ छापना चाहिए था. यह बहुत गलत बात है. भ्रत्सना होनी चाहिए.

  3. चोरी होने पर जश्न मनाने का रिवाज है. दो पार्टी…
    जो लायक होता है वही तो चोरी होता है, वरना बहुत सा प्रगतिशील लिखा जा रहा है, कौन आँख उठा कर देखता है?

    अमित ने इस पर लेख लिखा था, खोज कर पढ़े. चोर पर कार्यवाही सम्भव है. हम भी विरोध दर्ज करवाते है.

  4. ये बहुत ही गलत बात है। हमें चोरी करने वाले की साइट पर विरोध दर्ज कराना चाहिये।

    मनीषा

  5. पंडितजी ये तो ऐसे लोग ही करते हैं जिन्हें चिट्ठाकारी का शौक है और लिखना या मेहनत करना चाहते नहीं

  6. विरोध में हमारा भी स्वर शामिल मानें!!

  7. और देखो चोर की साइट का नाम है -ऑनलाइन ट्यूटोरियल!

    विपुल जी की बात में दम है – अब से हर लेख के साथ नाम डालते हैं.

  8. अरे भई, उसने गूगल के विज्ञापन चेप रखें हैं अपने ब्लॉग पर, गूगल वालों को सूचित कर दो कि चोरी का माल छाप रिया है और एडसेन्स लगा रिया है। वो लोग उसका खाता बन्द कर हुई कमाई ज़ब्त कर लेंगे तो बन्दा ब्लॉग ही बन्द कर देगा, नक्की!!!

  9. अपना विरोध जताने के लिये मैं उस चिट्ठे पर गया, लेकिन लगता है कि उसने उस लेख हो हटा दिया है. व्यक्तिगत एवं सामूहिक विरोध इस समस्या को सुलझाने की पहली कडी है.

    मेरे अंग्रेजी जालस्थलों से इस तरह की चोरी कई बार हो चुकी है. हर बार एकाध पत्र से काम चल गया. सिर्फ एक बार कुछ अधिक मेहनत करनी पडी.

    जागरूक रहें !!

  10. आगे से अपने लेख के बीच में बक्सा बना कर खुद ही लिख दिया-साभार-ई-पंडित. तो किसी को पुनः टाईप करने की जहमत नहीं उठाना पड़ेगी. क्या मालूम बंदे को शायद हिन्दी टाईप करना न आता हो और अभी सीखकर टाईप करने वाला हो, बड़ी दया सी आ रही है उस बालक पर. :)

  11. इससे यह पता चलता है कि ई पण्डित के लेक कितनी गुणवत्ता वाले होते हैं। आप तो प्रसिद्ध होते जा रहे हैं श्रीशजी
    कम्बख्त कोई हमारे लेख चोरी ही नहीं करता। हम भी थोड़े प्रख्यात हो जाते और चोरी पर एकाद पोस्ट भी लिख देते:)

  12. मास्साब , यह तो आपकी की प्रसद्द्धि है जो दिन रात एक्सप्रेस रफ़्तार से बढ रही है , पीछे देखो कि कितने लोग लाइन लगाये खडे हैओं कि उनका भी चिट्ठा कोई टीप दे :) , लेकिन हाँ , बात गलत है .

  13. हम आपका समर्थन करतें है।

    पर सामने वाले को स्‍पष्‍टीकरण देने का पूरा समय दिया जाना चाहिऐ। तथा पूरी तरह बात को समझा जाना भी उचित होगा।

    जैसा हो आप अवगत करये हम आपके साथ है।

  14. इस घटना की तीव्र निन्दा होनी चाहिये.. ये बहुत ही घटिया बात है, आपसे अनुमति लेता तो क्या आप मना करते ? लेकिन लोगों में सामान्य शिष्टाचार भी नहीं है, चलो अनुमति नहीं ली, लेकिन आपका नाम और साईट का उल्लेख तो कर सकता था…

  15. शर्मनाक घटना।

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