जाँच प्रविष्टि – कृपया अनदेखा ‘न’ करें
यह जाँच प्रविष्टि है, इससे आपको हुई असुविधा के लिए हमें कोई खेद नहीं है। ![]()
लो जी काफी दिनों से काम टल रहा था, आखिर हम भी चिट्ठाजगत पर चिट्ठा क्लैमियाने निकल ही पड़े, अभी फोटू भी लगानी रहती है। फिर ब्लॉगवाणी पर गया तो मालूम पड़ा कि उधर क्लैमियाने का कोई फंडा नहीं है, फोटू मैथिली जी खुद ही चिपका लिए हैं। थैंक्यू है जी!
तो जैसा समीरलाल जी ने संजय भैया की जाँच-प्रविष्टि पर कहा कि अगर एकाध चुटकुला लगा देते तो उतनी असुविधा न होती, इसलिए हम चुटकुला लगा रहे हैं।
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एक सरदार जी तेजी से अपने घर से बाहर आए और मेलबॉक्स खोलकर देखा, बंद किया और घर के अंदर चले गए। थोड़ी देर बाद उन्होंने फिर से ऐसा किया और मेल चैक की।
ये काम उन्होंने ५ बार और किया तो उनका एक पड़ोसी जो उनको काफी देर से देख रहा था बोला, “आपका शायद आज कोई जरुरी खत आने वाला है तभी आप बार-बार मेलबॉक्स को देखे जा रहे हैं।”
“नहीं, मैं अपने कंप्यूटर पर काम कर रहा हूँ और यह कब से बताए जा रहा है कि मेरी मेल आई है”, सरदार जी बोले।






















हा हा!! हमारे लिये इतनी मेहनत-अब कैसे ऐसे ही चले जायें तो एक चुटकुला हम भी सुना देते हं ताकि आगे आने वाले दो पढ़ें:
विषय वस्तु नहीं बदल रहे, सेम-सरदार.
एक सरदार दूसरे सरदार से परेशान था. उसने उसे परेशान करने को खाने पर बुलाया और तीसरे माले के अपने फ्लेट में ताला लगा कर भग गया कि पहला सरदार परेशान होकर अपनी मुँह की खायेगा. साथ ही वो एक चिट्ठी छोड़ गया, ताले में फंसा कर- कैसा बेवकूफ बनाया?
दूसरा सरदार आया खाने के समय, तीन मंजिल चढ़कर और ताला देखा, चिट्ठी पढ़ी और उसी पर लिख गया कि काहे का बेवकूफ, मैं तो आया ही नहीं था.
हा हा हे हे ही ही!!! खुद ही हंस लेते हैं.
जांच की दोनों पृविष्टियां जंची..पता लगा कि दोनों सरदा हैं ..सिर्फ हम ही समझदार हैं
इतने सरदार-समझदार लोग हैं कि हमारा नम्बर ही नहीं लगेगा.
हा-हा-हा- मजा आ गया।
अब भाइ हम आ गये है तो बिना किस्सा सुनाये तो जाने वाले नही..झेलियेगा .
ट्रेन मे हमारे सामने की सीट पर एक सरदार जी अपनी बीबी साली साले सास के साथ बैठे थे,हमारे बगल मे एक मद्रासी सज्जन.
अचानक सरदार जी को लगा की मद्रसी बंधु उनकी पत्नी को घूर रहे है,फ़ोरन परिवार को रोब दिखाने का मौह लग गया.
ओये की करता है दुबारा इधर देखा तो तेरा मुह तॊड दूगा..?सिधे बैठ मुह बाहर की तरफ़ करके समझा .नही तो दात हाथ मे रख दूगा.
अरे मद्रासी बंधु ने आव देखा ना ताव धडाक से सरदार जी को धर दिया जोर से एक लाफ़ड
सरदार जी ने बडी नम्रता से उन साहब कॊ सम्झाया
तुमने मुझे मारा कोई बात नही ,मैनू अभी गुस्सा नही आया है लेकिन अगर तुमने मेरॊ बीबी के हाथ लगाया तो तुम्हे उठाकर ट्रेन से बाहर फ़ेक दूगां.वो भी सारे दात तोड कर…समझे.
मद्रासी बंधु मे धाड करके एक उनकी बीबी के धर दिया और बोला अब..फ़ेक तोड दात..?
अभी मैनू गुस्सा नही आया,अब तक तो चल कोई बात नही मैनू तुस्सी माफ़ कीता,पर तू मेरी साले कॊ हाथ लगा के दिखा,ओये मै तेरी……..
वो बी पिट गया.
ऐसे होते होते जब सारा खानदान पिट लिया
दार जी बोले ..ओ भाइ मैनू गलती हो गई मैनु माफ़ करो जी.जैसे ही अगले स्टेशन पर गाडी रुकी सरदार जी बाहर निकले ,मै भी लपक कर उन्के पीछे बाहर आया
भाइ साहब जब कुछ करना नही था तो चुप बैठते ये पूरे खान्दान कॊ क्यो पिटवा दिया../
ओये तू समझता नही है ये सारे घर जाके मेरी हसी उडाते ,अब कोई बोल के दिखाये…?
धन्यवाद आपकी समीक्षात्मक टिप्प्णियों का हमेशा स्वागत रहेगा !
bahut sahi jokes parne ko mil gaye aaj
tumhare jokes se milta julta joke, maaf karna english me copy paste kar reha hoon.
Sardar enters kitchen and opens the sugarbox. Sees inside and closes it.
Wife observes the whole episode
Again he comes and does the same stuff. Wife askes Why are you doing this?
Sardar replies: Doc told to check sugar level regularly
@उड़नतश्तरी,
हा हा, आप परेशान न हों, हमें भी चुटकुला पसंद आया। लीजिए आपके वाले जैसा एक और सुनिए:
एक दीवार पर कुछ लिखा था, सरदार जी ने ध्यान से देखा “इसको पढ़ने वाला गधा है”। सरदार जी को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने उसे मिटाकर लिख दिया “इसको लिखने वाला गधा है”।
@काकेश,
हे हे, आपकी समझदारी में किसे शक है जी।
@ज्ञानदत्त पांडे,
अजी आपका तो चिट्ठाजगत में आते ही समझदारों में नाम शामिल हो चुका है।
नोट: ऐसा मानने वालों में हम भी शामिल हैं।
@ममता,
आपको चुटकुला पसंद आया, जानकर खुशी हुई।
@अरुण,
ये वाले सरदार जी थोड़ा समझदार थे शायद।
@नीरज शर्मा,
स्वागत के लिए धन्यवाद, लेकिन हमने कौन सी समीक्षात्मक टिप्पणी की जी यहाँ?
@तरुण,
डॉ. की बात आई तो एक और सुनो जी,
डॉ. साब ने सरदार जी से पूछा – अब आपकी तबियत कैसी है?
सरदार जी – जी पहले से काफी बेहतर है। असल में मैंने शीशी पर लिखी हिदायत का सख्ती से पालन किया।
डॉ. – कौन सी हिदायत?
सरदार जी – शीशी पर लिखा था कि “ढक्कन मजबूती से बंद रखें”।
हा-हा-हा…मजा आगया मास्टर साब…।