ई-पण्डित / ePandit – Hindi Tech Blogsubscribe feed

चिट्ठाजगत.कॉम – हिन्दी चिट्ठों का पहला रोमन एग्रीगेटर


आ गया हिन्दी चिट्ठों का संपूर्ण ज्यूकबॉक्स

Chitthajagat.com – First Roman aggregator of Hindi Blogs

बी.एस.सी में हमारे भौतिकी के एक प्रोफेसर कहा करते थे कि साइंटिस्ट का ब्रेन बहुत फर्टाइल होता है, हमेशा नए पंगे सोचता रहता है। यही बात हम टैक्नोक्रैट्स के बारे में भी कह सकते हैं। हमारे आलोक दादा और विपुल भैया अब लेकर आए हैं चिट्ठाजगत.कॉमहिन्दी चिट्ठों का रोमन एग्रीगेटर

 Chitthajagat_com_ePandit

चिट्ठाजगत.कॉम ने भोमियो के विचार को आगे बढ़ाया है, यह हिन्दी चिट्ठों का संकलक (aggregator) है जिसका अंतरापृष्ठ (interface) अंग्रेजी में है, इसके मुख्य पृष्ठ पर चिट्ठों का सारांश दिखता है। यदि पोस्ट के शीर्षक को क्लिक करें तो यह पोस्ट को हिन्दी में पढ़ने हेतु सीधे चिट्ठे पर ले जाएगा, यदि नीचे Read more… पर क्लिक करें तो पूरी पोस्ट को रोमन हिन्दी में दिखाएगा। इसकी लिप्यंतरण सेवा अपेक्षाकृत सरल है, हर वर्ण के साथ अनावश्यक a नहीं जोड़ती।

यह सभी पोस्टों को एक ही जगह पूरी पढ़ने के लिए उपलब्ध कराता है इसकी यही विशेषता देखकर मेरे दिमाग में आया – हिन्दी चिट्ठों का ज्यूकबॉक्स। चूंकि अभी यह बीटा अवस्था में ही है, अतः उम्मीद है कि चिट्ठाजगत.कॉम में इसके बड़े भाई चिट्ठाजगत.इन की तमाम खूबियाँ जल्द ही शामिल हो जाएँगी।

इसका क्या फायदा होगा

यद्यपि मैं स्वयं तथा अधिकतर चिट्ठाकार रोमनागरी पढ़ना पसन्द नहीं करते लेकिन इस सेवा का कई तरह से लाभ होगा।

पहली बात तो यह कि इंटरनैट पर हिन्दी की मौजूदगी के बारे में बहुत से लोग (अधिकतर कहना बेहतर है) नहीं जानते, कुछ जानते भी होंगे तो उन्हें हिन्दी टाइप करना नहीं आता। सर्च अधिकतर अंग्रेजी में ही होती है जिस कारण हिन्दी चिट्ठों को गूगल से खास ट्रैफिक नहीं मिल पाता। ऐसे लोग इस रोमन साइट के जरिए हिन्दी चिट्ठों तक पहुँच सकेंगे। भोमियो की लिप्यंतरण (transliteration) सेवा के शुरु होने के बाद हिन्दी चिट्ठों पर गूगल सर्च काफी बढ़ी है क्योंकि गूगल लिप्यंतरित पेजों को भी सूचीबद्ध (index) करता है और वो रोमन सर्च परिणामों में प्रकट होते हैं। दूसरी ओर पुराने विण्डोज ९८ युक्त ऑपरेटिंग सिस्टम वाले साइबर कैफे जहाँ इंटरनैट पर हिन्दी सुलभ नहीं, वहाँ भी ये उपयोगी साबित होगा।

इसके अलावा विश्व के अनेक हिस्सों जैसे मॉरीशस, फिजी, गुयाना आदि से लेकर अफगानिस्तान आदि तक में हिन्दी बोली-समझी जाती है लेकिन देवनागरी नहीं। और तो और भारत में ही बहुत से दूसरे राज्यों के लोग भी हिन्दी समझ सकते हैं पर देवनागरी नहीं पढ़ सकते ठीक वैसे ही जैसे हम में से कई लोग उर्दू, पञ्जाबी समझ सकते हैं पर पढ़ नहीं सकते। इसके अतिरिक्त बहुत से विदेशी हिन्दी छात्र, संस्थान आदि भी हिन्दी के प्रति उत्सुक हैं। चिट्ठाजगत.कॉम ऐसे सभी लोगों को हिन्दी से जोड़ेगा। इससे निश्चय ही हिन्दी चिट्ठों की पाठक सँख्या में वृद्धि होगी और ट्रैफिक बढ़ेगा।

इसके अलावा एक अन्य महत्वपूर्ण बात जिस ओर चिट्ठाकार अक्सर ध्यान नहीं देता। हमारे हिन्दी चिट्ठाजगत में प्रचलित शब्द एक सीमित समूह (closed group) की शब्दावली (jargon) जैसी है जिस कारण हिन्दीजगत में नया पाठक हिन्दी साइटों का इंटरफेस नहीं समझ पाता। उदाहरण के लिए मैं जब शुरु में चिट्ठाजगत में आया था तो मैं चिट्ठा, प्रविष्टि, कड़ी आदि शब्द समझ नहीं पाता था जबकि मेरी हिन्दी पहले से काफी अच्छी थी। इस कारण से नए पाठकों को हिन्दी साइटें अजीब लगती हैं और वे हिन्दीजगत से दूर हो जाते हैं। इसलिए मेरा मानना है कि एग्रीगेटर, डायरैक्ट्री जैसी साइटों का इंटरफेस अंग्रेजी में भी होना चाहिए। एक बार अंग्रेजी में प्रयोग शुरु करने पर बंदा धीरे-धीरे खुद ही हिन्दी समझने और प्रयोग करने लगेगा।

और एक मजेदार बात

कल शाम को जब चिट्ठाजगत.कॉम देखा तो मैंने सोचा कि यह चिट्ठाजगत.इन का ही अंग्रेजी अंतरापृष्ठ है। मैं विपुल जी को सुझाव देने लगा कि इसमें रोमन लिप्यंतरण की सुविधा भी उपलब्ध कराइए, तो वो बोले कि भाई यही तो किया है। तब ध्यान से देखा तो इसकी खूबियाँ पता लगी।

विपुल जी तथा आलोक दादा को बहुत-बहुत आभार इतनी शानदार सेवा उपलब्ध कराने के लिए। ईश्वर करे आपका दिमाग ऐसे ही उपजाऊ बना रहे। :)

पुनश्च: अभी देखता हूँ कि मेरे कल दिए कुछ सुझाव चिट्ठाजगत.कॉम पर लागू किए गए हैं, विपुल जी का आभार, और कुछ सुझाव भी जल्द भेजूँगा।

संबंधित कड़ियाँ






10 टिप्पणियाँ

  1. इसके बारे में शास्त्री जी से सुना था.

    इस बाबत कुछ विरोध भी देखने में आया दीगर स्थलों पर.

    अच्छा है. मेरा मानना है कि यह वैसा ही है जैसे फ्रेंच कन्ट्रिज में रास्ता बताने के लिये अंग्रेजी में बोर्ड लगे रहते हैं जो कि अति आवश्यक हैं आम जनता की सुविधा के लिये और फ्रेन्च के प्रसार के लिये.

    हिन्दी का इससे विकास ही होगा.शुभकामनायें.

    इसमें विरोध का कोई औचित्य नहीं. यही मेरी मान्यता है.

    आभार इस जानकारी को विस्तार देने के लिये.

  2. यह हिन्दी को आगे ले जायगा – सराहनीय है।

  3. इस विषय पर मैं ने जो निरीक्षण चिट्ठाकारों के सामने रखा उसे रवि जी ने और आगे बढाया एवं स्पष्ट किया. अब आपने इन दोनों लेखों के लेकर विषय को और भी आगे बढाया. आभार.

    विरोध के बारे में समीर जी ने सही कहा है. यह विरोध दूर दृष्टि के आभाव का परिणाम है — शास्त्री जे सी फिलिप

    हिन्दीजगत की उन्नति के लिये यह जरूरी है कि हम
    हिन्दीभाषी लेखक एक दूसरे के प्रतियोगी बनने के
    बदले एक दूसरे को प्रोत्साहित करने वाले पूरक बनें

  4. जानकारी के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद।

  5. यह प्रयास सराहना का हकदार है साथ ही इसके प्रबन्धकों और उन्नायकों की उन्नत सोच का परिचायक भी है।

    इसे मैं “पूरक प्रयास” जैसा समझ रहा हूँ, जो कि निश्चित ही हिन्दी चिट्ठाकारी के लिये फायदेमन्द होगा।

    विपुल और आलोक को इसके लिये बहुत-बहुत साधुवाद!

  6. इसका विरोध किसने किया पता नहीं हाँ इस प्रयास की जानकारी पहले से थी, मगर संचालक इसे अभी गुप्त रखना चाहते हो यह सोच किसी को बताया नहीं.

    अच्छा प्रयास है.

  7. सराहनीय!!

  8. ismen sabkaa laabh hii hai.

  9. मैने चिट्ठाजगत के इस कार्य के प्रशंसा के है, वैसे आप जिस तरह मेरा सहयोग करते हैं वैसे ही वह भी मुझे उस समय सहायता करते हैं जब मेरे वर्डप्रैस के ब्लोग परेशान करते हैं, और मेरी ईमेल का उत्तर देते हैं और मेरे ख़्याल से जो हिंदी की देव नागरी लिपि का ज्ञान होते हुए उसे रोमन में लिखने का विचार कर रहे हैं उन्हें देखना चाहिए कि युनिकोड के आने से लिपि की बहस बेकार है और हमारे ब्लोग अपने आप ही रोमन में दिख रहे हैं बस हमें अपनी बात लोगों तक पहुँचानी है. चिट्ठाजगत को मेरी बधाई.

    दीपक भारतदीप

  10. if I want to write english typing what should i do

प्रतिक्रिया करें