ई-पण्डित की अज्ञातवास से वापसी
ePandit comes out of hibernation
हिन्दी चिट्ठाजगत के सभी मित्रों एवं पाठकों को नमस्कार। जैसा कि आप सब जानते हैं कोई दो साल पहले हम चिट्ठाकारी से अस्थायी संन्यास लेकर इंसानों की दुनिया में वापस चले गये थे। यह सब अचानक ही हुआ, इसका कारण इण्टरनेट एवं ब्लॉगिंग की ऍडिक्शन तथा कैरियर को लेकर चल रहा संघर्ष था। शुरु में नेट बन्द कनैक्शन कटवा देने एवं ब्लॉगिंग बन्द के बाद बहुत बैचेनी होती थी, कोई एकाध महीना तो बहुत दिक्कत रही, लेकिन धीरे-धीरे सब कुछ सामान्य होता गया। वैसे ऑफलाइन जिन्दगी के दौरान अनुभव किया कि इण्टरनेट एवं ब्लॉगिंग के अलावा भी जिन्दगी में बहुत कुछ है। सच कहें तो एक तरह से ऑफलाइन जिन्दगी बहुत सुकून भरी रही।
ऑफलाइन जिन्दगी के दौरान की कुछ मुख्य उपलब्धियाँ ऍमऍससी (कम्प्यूटर विज्ञान) में विश्वविद्यालय में तृतीय स्थान सहित उत्तीर्ण करना, हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करना तथा सरकारी सेवा में नियुक्ति रहीं। नौकरी की चिन्ता समाप्त होने के बाद वापसी की योजना बनने लगी। पहले मोबाइल से ट्विटर पर चहचहाना शुरु किया। इसके बाद अपना डोमेन तथा होस्टिंग स्पेस लेकर चिट्ठा बनाया। ब्लॉगर से चिट्ठे को वर्डप्रैस में इम्पोर्ट करने तथा सैटअप आदि करने में मित्र अमित गुप्ता ने बहुत सहायता की जिसके लिये उनका हार्दिक आभारी हूँ। इसके बाद चिट्ठे को सजाने-संवारने तथा परिष्कृत करने में बहुत वक्त लग गया। देर लगने का मुख्य कारण वर्डप्रैस पर काम करने का अनुभव न होना रहा। इसके अतिरिक्त व्यक्तिगत बकबक के लिये एक अन्य चिट्ठा बनाया है।
तो पण्डित जी की पाठशाला दोबारा चालू होने जा रही है। दो सालों के दौरान हिन्दी चिट्ठाजगत बहुत बड़ा हो गया है, उम्मीद करता हूँ पुराने पाठक भूले नहीं होंगे।
नये पाठक मेरे बारे में अंग्रेजी में यहाँ तथा हिन्दी में यहाँ पढ़ सकते हैं। ई-पण्डित चिट्ठे के बारे में यहाँ पढ़ें।
कुछ कड़ियाँ
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खुशामदीद, वापसी मुबारक हो पंडित जी। हम तो कब से प्रतीक्षा कर रहे थे कि कब नई पोस्ट ठेलेंगे, दो मास से ऊपर हो लिए वर्डप्रैस से खेलते हुए!
वापसी के लिये बधाईयाँ।आपके लेख मुझे काफी पसन्द है।आपके लेख पढकर ही मैने हिन्दी में अपना ब्लाग लिखना शुरु किया है।
pandit ji ki jay ho,
apki vaapsi ka swagat hai ji!
ham to duniya ke liye chahe master hon primary ke……! par aapke chele hain!
vaise umeed aapka agyatvas ab kabhi nahin hoga?
hamari shubhkamnayen!
roman me tipiyane ki muaafi
क्या खबर सुनाई है… बल्कि कितनी सारी खबरे सब जानदार तिस पर सबसे जानदार है आपकी वापसी की खबर।
पूरा चिट्ठा लिखो.. एमएससी कहॉं से/ नौकरी कहॉं पर और सब करते हुए जम कर लिखो। हम ध्यान से सुन/पढ़ रहे हैं।
Shirish, Wapasi ke liye ek baar punah bahut bahut badhai and best of luck. hum tabhi samajh gaye thai jab penchkas ke tumne pench kasna shuru kiya tha, isiliye welcome back tabhi thel diye thau.
naya blog bahut achha hai, Ab wordpress me aa gaye ho to ek najar yehan dekh le shayad aap use karna pasand karen. Working copy ke liye control panel ke comment blog me roman me comment karke dekhen.
Once again, welcome back and best of luck.
पुन: स्वागत है श्रीश भाई !!
वापसी मुबारक हो…अब नियमित ही रहिएगा.
आप का वापस आना अच्छा लगा और आशा है कि इन दो सालों में आप ने जो भी नये प्रयोग किए कंप्युटर के साथ वो हमें भी बतायेगें।
wa wah, kya baat hai maassab!
je hui na baat laut aaye aap kam se kam, ham to soch rahe the ki kitthe chale gaye apne epandit jee.
chaliye ab reguler class lagaiye epandit jee ki, to ham bhi aate rahenge class me
aur han vo aapke hariyanvi chitthe ka kya hua?
हार्दिक बधाई। वापसी चिरंजीवी भव
बिल्कुल नहीं भूले हैं।
@अमित गुप्ता, वापसी के कार्यक्रम में आपका सहयोग महत्वपूर्ण रहा। बाकी वर्डप्रैस से खेलने में समय तो लगा पर उसका काफी कुछ हिसाब-किताब समझ आ गया।
@शशांक, यह जानकर खुशी हुयी कि मेरे पुराने लेख अब भी किसी को प्रेरित कर सकते हैं।
@प्राइमरी का मास्टर, आप और हम तो एक ही बिरादरी के हैं। उम्मीद है आपसे अच्छी जमेगी।
@मसिजीवी, @अनीता कुमार, हाँ जी लिखेंगे सारी कहानी धीरे-धीरे।
@तरुण जोशी, धन्यवाद तरुण भैया, विशुद्द तकनीकी समूह मेरा एक पुराना स्वप्न था, आलोक भैया ने इसे बहुत सुन्दर नाम दिया – पेंचकस। आपका प्लगइन देखा, बहुत उपयोगी चीज है, आजमाते हैं।
@प्रभात टण्डन @लवली कुमारी @विजय प्रभाकर काम्बले @विवेक रस्तोगी, धन्यवाद!
@संजीत त्रिपाठी, जी कोशिश करेंगे रेगुलर क्लास लेने की और हरियाणवी चिट्ठा भी जल्द ही शुरु करेंगे।
एक ही बिरादरी के हैं??? ये का गजब कह रहे हैं ?
हां हां ! स्वागतम !
और हाँ उम्मीद पर तो दुनिया कायम ….सो मास्टर की क्या औ…..?
shrish bhai ki jai ho
स्वागतम श्रीश,
आपके अज्ञातवास के दौरान कुकुरमुत्तों की तरह कई स्वयंभू गुरू और पण्डित चिट्ठाजगत में आये, कई तो सिर्फ अंग्रेजी के चिट्ठों को खॊजकर उसमें हिन्दी के हिसाब से छोटे मोटे बदलाव कर अपने नाम से प्रेषित करने वाले भी रहे। कई तो ऐसे भी तो जो अपनी तीसरी ही पोस्ट में लोगों को तकनीक सिखाने और अपने ब्लॉग को हिट कैसे करें; टाइप के लेख लिखने लगे।
कई गायब भी हो गये, कुछ अभी जमे है। लेकिन असली ईपण्डित की वापसी हो रही है जानकर प्रसन्नता हो रही है।
स्वागतम… कब से नये गुल खिला रहे हैं। प्रतीक्षा में हैं।
वापसी का तहेदिल से स्वागत है | पुरानी पोस्ट को ही पढ़ कर काम चला रहे थे |
@सागर नाहर,
नये गुरु और पण्डितों का आना तो अच्छी बात है। बाकी थोड़ा बहुत अन्य स्रोतों से प्रेरणा लेना चलता है लेकिन लेखन में कुछ मौलिकता भी तो होनी चाहिये। वैसे हमें असली बताने का शुक्रिया।
स्वागत है ईपंडित का। पंडितजी को देखकर हम भी वापसी कर लिए हैं।
श्रीशजी को नमस्कार।
चिट्ठाजगत में जब हमारा पर्दापण हुआ था श्रीशजी ने टिप्पणियां लिखकर मेरा भरपूर उत्साहवर्धन किया और तकनीकी समस्याओं को दूर किया।
देवनागरी लिपि में चैटिंग करना, उन्होंने ही बताया और विधियां बताई।
श्रीशजी, अभी हमने ‘हितचिन्तक’ ब्लॉग को अस्थायी विराम दिया हुआ है और आजकल ‘प्रवक्ता डॉट कॉम’ के माध्यम से चिट्ठाजगत में सक्रिय हैं। आपको जानकर अच्छा लगेगा कि इसकी एलेक्सा रैंकिंग डेढ लाख है और इससे सवा सौ लेखक जुड गए हैं।
पुनर्वापसी पर अशेष शुभकामनाएं-