हरियाणवी मखौल – कमी हो तो बता
भाईयो आजकल चुनाव का माहौल सै, इसै खातर ल्यो सुणो एक चुनावी मखौल।
जंगल म्ह राजा का चुनाव होया अर उसमैं बांदर जीत ग्या। बांदर का राजा बणना शेर तै बर्दाश्त कोनी होया। इस छोंह म्ह वो बकरी के बच्चे नै ठा लेग्या। बकरी बांदर धौरे आई अर रोंदी-रोंदी बोल्ली – राजा साब शेरे मेरे बच्चे नै ठा के लेग्या थाम उसती बचा ल्यो। बांदर एक पेड़ तै दूसरे पेड़ पै छाल मारण लाग्या। बकरी बोल्ली – जी थाम तोले से जाओ इतणे म्ह तो वो शेरे मेरे बच्चे नै खा जावैगा। बांदर बोल्या – न्यूं खावैगा तो खावैएगा मेरी भागदौड़ मैं कमी हो तो बता। ![]()
आज तै पढण आलां की सुविधा खातर कुछ ठेठ शबदां के अर्थ देण लाग रया सूं, होर बी कोई शबद समझ ना आवै तो पूछ लियो जी।
- छोंह – गुस्सा, तैश
- छाल – छलांग
- तोले से – जल्दी से






















बान्दर सही केण लाग रियो छे.
Story tells reality about politicians.
ये भी मज़े की है
मेरी भागदौड़ मैं कमी हो तो बता।
परफ़ेक्ट, कोई नही कह सकता, तुम्हारी भागदौड मे कोई कमी नही ।अब अपने आपको बन्दर मत समझना, इस्माइली ये रहे:
सही है. भाग दौड़ में कमीं न की जाये. शुभकामना.
@ संजय बेंगाणी,
रियो –> रया, छे –> सै
संजै भाई, मारे मखौल पढ़दे रइयो, थामनै हरियाणवी सखै क छोडांगे।
@ Jitu,
वर्धमान भाई ठीक बोल्ये। इसी भागदौड़ करण म्ह ही तो म्हारे नेता अर अफसर एक्सपर्ट सैं।
@ समीर लाल,
ना जी, किम्मे कमी को नी राखदे। नमूना थामने ऊपर देक्खै लिया।
(किम्मे = कुछ)