लम्बे समय से गूगल द्वारा आसुस के साथ मिलकर एक सस्ता क्वाड कोर ऍण्ड्रॉइड टैबलेट लाने की चर्चा थी। अन्ततः गूगल ने सैन फ्राँसिस्को में हुई गूगल I/O डैवलपर कॉन्फ्रैंस में इसका अनावरण किया। यह गूगल का ऍपल के आइपैड तथा अमेजन के किंडर फायर को टक्कर देने की कोशिश है। साथ ही गूगल इस सस्ते टैबलेट के द्वारा टैबलेट बाजार में ऍण्ड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम को सुस्थापित करना चाहता है।
इसकी स्पैसिफिकेशन निम्नलिखित हैं।
» नीवीडिया टैग्रा ३ क्वाड कोर प्रोसैसर, १.३ गीगाहर्ट्ज क्लॉक स्पीड
» १ जीबी रैम
» ७ इंच कैपैस्टिव स्क्रीन, IPS डिस्प्ले, १२८०x८०० पिक्सल रिजॉल्यूशन
» १.२ मेगापिक्सल फ्रंट कैमरा, रियर कैमरा नहीं
» माइक्रो यूऍसबी
» वाइ-फाइ, ब्ल्यूटुथ, NFC (नियर फील्ड कम्युनिकेशन)
» ३जी/४जी नहीं
» ८ जीबी तथा १६ जीबी के मॉडलों में, कार्ड स्लॉट नहीं
» ऍण्ड्रॉइड ४.१ (जैली बीन्स)
» ४३२५ mAh बैट्री
» ऍक्सलरोमीटर, गायरो, प्रॉक्सिमिटी, कम्पास
नैक्सस ७ के ८ जीबी मॉडल की कीमत $ 199 (लगभग ₹ १०,८५०) तथा १६ जीबी मॉडल की $ 249 (लगभग ₹ १३,५८०) होगी। कम कीमत के चलते यह सबकी पहुँच में है। यह पहला ७ इंची टैबलेट है जिसमें क्वाड कोर प्रोसैसर आया है। जैली बीन्स में कई नई सुविधायें हैं जैसे ऑफलाइन वॉइस टाइपिंग, प्रोजैक्ट बटर, गूगल नाउ, अद्यतित फोटो शेयरिंग ऍप, गूगल वैलेट तथा NFC तकनालॉजी आदि। यह ऍण्ड्रॉइड ४.१ (जैली बीन्स) वाला पहला टैबलेट है। गूगल का उत्पाद होने से इसे ऍण्ड्रॉइड का भविष्य का भी कोई भी अपडेट सबसे पहले मिलेगा। इसकी स्क्रीन गोरिल्ला ग्लास से बनी है। तेज प्रोसैसर के चलते यह वीडियो गेम्स के लिये भी उपयुक्त है।
अब बात करें इसकी कमियों की। इसमें मुख्य (रियर) कैमरा नहीं है। शायद कीमत कम रखने के लिये इसे निकाला गया है। इसकी बजाय फ्रंट कैमरा हाइ रिजॉल्यूशन दिया गया है ताकि वीडियो चैट अच्छी हो। १० इंच की टैबलेट से फोटो लेना थोड़ा अजीब लग सकता है पर ७ इंच वाली इस काम के लिये चल सकती है। यद्यपि फोटो लेने के लिये स्मार्टफोन बेहतर है लेकिन माना आप कोई फोटो लेकर इंटरनेट पर पोस्ट करना चाहते हों तो सीधे टैबलेट से लेकर नेट पर ज्यादा आसानी से डाला जा सकता है। मुख्य कैमरा रखने से कीमत थोड़ी सी बढ़ जाती पर एक और सुविधा मिल जाती। खैर यह कमी नजरअन्दाज की जा सकती है क्योंकि टैबलेट में रियर कैमरे की बजाय फ्रंट कैमरा ज्यादा आवश्यक है।
नैक्सस ७ निश्चित रूप से मीडिया उपभोग के लिये बना है। उपकरण की कई ऍप्लिकेशन तथा विजेट गूगल प्ले स्टोर में जोड़ी गयी नयी सामग्री जैसे मैगजीन, टीवी शो, मूवी, म्यूजिक आदि के उपयोग के हिसाब से डिजाइन की गयी हैं। समस्या ये है कि भारत में ऍप्लिकेशन स्टोर के अतिरिक्त हमारी पहुँच किसी और तरह की सामग्री तक नहीं है। यानि हमें यदि घर से बाहर रहते हुये इस प्रकार की सामग्री की आवश्यकता हो तो हमें सब कुछ टैबलेट में स्वयं ही डालना होगा। यह समस्या ऍपल के आइक्लाउड की ही तरह है। गूगल ने अब तक इस बारे में कुछ नहीं किया।
दूसरी कमी है कार्ड स्लॉट न होना जिससे आप इसकी स्टोरेज क्षमता नहीं बढ़ा सकते तथा ऑनबोर्ड मेमोरी से ही काम चलाना पड़ेगा। यह एक बड़ी कमी है क्योंकि टैबलेट जैसे पोर्टेबल मनोरंजन के उपकरण में कोई भी अधिक से अधिक सामग्री रखना चाहता है। एक कार्ड स्लॉट शामिल करने से टैबलेट की कीमत में कोई विशेष अन्तर न पड़ता। गूगल के अनुसार इस टैबलेट में ३डी गेम्स बेहतरीन चल सकती हैं। इन गेम्स को काफी स्थान की आवश्यकता होती है। इनबिल्ट स्टोरेज में से काफी हिस्सा तो स्वयं ऑपरेटिंग सिस्टम ही ले लेता है। एक टैबलेट जिसे मनोरंजन उपकरण के तौर पर बनाया गया हो उसमें कार्ड स्लॉट न होना निराशाजनक है।
सबसे बड़ी कमी है टैबलेट में ३जी सुविधा का न होना। भारत जैसे देश में जहाँ वाइ-फाइ सुविधा सुलभ नहीं, ३जी अत्यन्त आवश्यक है ताकि प्रयोक्ता कहीं भी इंटरनेट प्रयोग कर सके। ३जी के बिना यह एक इंटरनेट विहीन मीडिया प्लेयर मात्र रह जायेगा। एक पोर्टेबल इंटरनेट डिवाइस में ३जी सुविधा तो होनी ही चाहिये। जब आजकल काफी कम कीमत के ३जी फोन आ रहे हैं तो इस टैबलेट में ३जी क्यों नहीं रखा जा सकता था। इसमें फोन फीचर भी नहीं है जिससे वॉइस कॉल, SMS आदि नहीं कर सकते।
एक और कमी है वीडियो-आउट का न होना। टैबलेट की सामग्री का मजा किसी बड़ी स्क्रीन पर लेने के लिये इसमें HDMI पोर्ट होना चाहिये था ताकि इसे किसी LCD टीवी के साथ जोड़ा जा सके। फोटो तथा वीडियो को बड़ी स्क्रीन पर देखने के लिये यह सुविधा उपयोगी है।
स्पष्ट है कि गूगल ने कीमत कम रखने के लिये क्वालिटी से तो समझौता नहीं किया पर सुविधाओं में कटौती की। गूगल ने इसे अपने प्ले स्टोर के हिसाब से बनाया है पर भारत में वह पूरी तरह उपलब्ध नहीं साथ ही कार्ड स्लॉट और ३जी सुविधायें नहीं हैं। इन कारणों से मैं इसकी बजाय सैमसंग गैलैक्सी टैब २ (७.०) लेना पसन्द करूँगा जिसमें ३जी और कार्ड स्लॉट दोनों हैं। ३जी और कार्ड स्लॉट न होने के चलते कम कीमत और अपनी खूबियों के बावजूद यह भारतीय उपभोक्ताओं के अनुकूल नहीं। गूगल के इस टैबलेट की लम्बे समय से प्रतीक्षा थी पर इसने निराश किया।
अपडेट:- नैक्सस ७ का ३२ जीबी एवं ३जी मॉडल भी जारी हो गया है। ८ जीबी मॉडल बन्द कर दिया गया है तथा १६ जीबी वाले की कीमत में कटौती हुयी है। अधिक जानकारी के लिये यह लेख पढ़ें।
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Nexus 7 – Google/ASUS cheap Android tablet review


ये टेबलेट अमेजाम किंडल को चुनौती दे पायेगा। बाकि टैबलेटो से सामने कहीं नही ठहरता है! ऐसे भी ASUS ने बनाया है, जिसकी गुणवत्ता उतनी अच्छी नही है। गूगल के पास मोटोरोला मोबीलीटी(खरीद ली है) होने के बावजूद पता नही क्यों ASUS से बनवाया !
बेकार है. 3 जी और कार्ड स्लाट के बिना तो यह अपने किसी काम का नहीं. सस्ता है तो क्या हुआ, और वैसे भी खास सस्ता नहीं है!
हाँ जी, किंडल फायर से तो बेहतर ही होगा। वैसे दूसरे शब्दों में कहें तो गूगल का किंडल फायर है।
रोचक प्रतियोगिता भविष्य में है..
Even I was also waiting for it from a long time.
हाँ जी, अगर इसमें ३जी होता तो यकीनन खरीद लेते।
अच्छा है जी
३जी रेडियो लगाने से कीमत में काफ़ी अंतर आ जाता, मेरे ख्याल से गूगल वाले टैबलेट का दाम $200 तक ही रखना चाह रहे थे ताकि ऐमेज़ॉन के किण्डल फायर की मार्किट पीट सकें। पचास चीज़ जो ढंग से न चलें ऐसे लगाने से बेहतर है कि पच्चीस चीज़ें लगाओ जो सभी बेहतरीन चलें। ३जी न होना कोई बहुत बड़ी असुविधा नहीं है, यदि आपके पास एण्ड्रॉय्ड फोन है तो उसका डाटा कनेक्शन इस पर प्रयोग कर सकते हैं वाईफाई द्वारा अन्यथा एक ३जी वाईफाई डाटाकार्ड साथ रख सकते हैं जो कि काफ़ी सस्ता आता है।
टैबलेट फोन करने के लिए नहीं होता। सैमसंग आदि की बात छोड़ दें, वे लोग किसी भी तरह बस मार्किट कब्ज़ाने के चक्कर में हैं इसलिए अंट-शंट चीज़ें भी डाल रहे हैं, अन्यथा फोन फीचर किसी टैबलेट में होना बोनस माना जा सकता है, न होना खामी नहीं मानी जा सकती!
प्ले-स्टोर तो सैमसंग वाले टैबलेट में भी वही चलेगा जो नेक्सस७ में चलेगा। मीडिया कंज़म्प्शन के लिए गूगल ने टैबलेट बनाया है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि प्ले-स्टोर वाली फिल्में, किताबें आदि के अभाव में यह बेकार हो गया! फिल्में आप स्वयं डाल सकते हैं, यूट्यूब से देख सकते हैं, और भी ज़रिए हैं देखने के। किताबों आदि के लिए किण्डल एप्प है जो कि मस्त चलता है। रही बात ३जी की तो उस पर ऊपर कह ही चुका हूँ, ऐसी कोई बड़ी असुविधा नहीं है। पर्सनली मेरे ख्याल से इसमें एक ही मुख्य खामी है, कार्ड स्लॉट का न होना, अन्यथा यह शानदार टैबलेट है।
इसकी एक खास बात जो तुम भूल गए – इस पर न सिर्फ़ एण्ड्रॉय्ड का नवीनतम वर्ज़न आएगा बल्कि आने वाले नवीन वर्ज़न भी सबसे पहले मिलेंगे क्योंकि गूगल की नेक्सस डिवाइस है। सैमसंग वाले ज़माने बाद अपडेट देंगे और वह भी सिर्फ़ एक, उसके बाद नहीं देंगे। बाकी सैमसंग का टैब२ १९००० में खरीदने का मुझे कोई औचित्य नज़र नहीं आता, ऐसा कुछ खास नहीं है उसमें जो उससे सस्ते चीनी टैबलेट्स में नहीं मिलता। मुझे उसकी स्क्रीन क्वालिटी घटिया लगी और टच रिस्पॉन्स बकवास महसूस हुआ, जैसा किसी ४०००-५००० वाले फोन में होता है।
एक और बात, प्ले-स्टोर पर मौजूद फिल्में, किताबें आदि का भारत में उपलब्ध होना न होना पूर्णतया गूगल के हाथ में नहीं है, बहुतया ऐसे मामलों में कॉन्टेंट प्रदाता लाइसेन्सिंग के लफ़ड़ों के तहत नहीं प्रदान करते।
३जी सुविधा न होना मायने रखता है, अपने अनुभव से कह रहा हूँ। पहली बात ऍण्ड्रॉइड फोन को हॉटस्पॉट बनाकर नेट चलाने की है। झंझट का काम है, पहली बात ऍण्ड्रॉइड वाला फोन चाहिये होगा, फिर उसे रूट करना होगा। साथ ही टैथरिंग से बैट्री तेजी से खत्म होती है। मैंने अपने नोकिया ५८०० पर एक-दो बार ये काम किया तो आधे घंटे में साफ हो गयी।
३जी वाइ-फाइ डाटाकार्ड से तुम्हारा क्या आशय है? क्या टैबलेट के अन्दर लगने वाला ३जी कार्ड आता है? यदि नहीं तो इतना तामझाम लेकर चलना और उससे कनैक्ट करना भी तो बड़ा झंझट है।
बाकी यूऍसबी ३जी डोंगल का अनुभव भी बेकार है। पीसी में ही डोंगल द्वारा नेट चलाना मुझे झंझट का काम लगता है, डोंगल लगाओ उसका सॉफ्टवेयर चालू करो, कनैक्ट करो वगैरा-वगैरा जबकि मोबाइल में ३जी से सीधे ब्राउजर खोलो और नेट चालू। फिर इन डोंगलों के ड्राइवर भी तो टैबलेट के लिये आमतौर नहीं होते, कुछ कम्पनियाँ किसी खास टैबलेट मॉडल के लिये निकालती हैं जैसे टाटा फोटॉन ने माइक्रोमैक्स फनबुक के लिये निकाला है। कुल मिलाकर इनबिल्ट ३जी में जो सुविधा है वो किसी दूसरे जुगाड़ में नहीं।
बेहतर होता गूगल दो मॉडल निकालता, एक केवल वाइ-फाइ और दूसरा वाइ-फाइ+3G जिसमें दूसरे वाले की कीमत थोड़ी ज्यादा होती। जिसे जिसकी जरूरत हो ले लेता।
सहमत, इसलिये मैंने इसे कोई बड़ी खामी नहीं माना, बस जानकारी के लिये ये बात बतायी।
यह समस्या तो सभी ऍण्ड्रॉइड टैबलेट में होगी। गूगल ने इसे किंडल फायर के जवाब में बनाया है इसलिये भारतीय परिप्रेक्ष्य के सन्दर्भ में यह बात बतायी। बाकी यह समस्या तो किंडल फायर में भी है और इसमें भी।
मैंने भी यही कहा, बस कार्ड स्लॉट के अतिरिक्त मुझे ३जी की कमी भी खलती है। तुम दिल्ली जैसे बड़े शहर में रहते हो जहाँ इंटरनेट के लिये ढेरों साधन सुलभ हैं। छोटे शहरों में इनबिल्ट ३जी सुविधा मायने रखती है।
कहाँ भूला? जिक्र किया तो है, बल्कि इस टैबलेट के लम्बे इन्तजार के पीछे यह एक मुख्य कारण था।
मैंने कहा ही है, एण्ड्रॉय्ड फोन है तो कर सकते हैं। और तुम्हें किसने कहा कि रूट करना पड़ेगा? बिना रूट के हो जाता है, सैमसंग और एचटीसी के फोन में तो वन-क्लिक सुविधा है हॉटस्पॉट बनाने की, कोई झंझट नहीं। अन्य किसी निर्माता के फोन में आज़मा के नहीं देखा इसलिए कह नहीं सकता लेकिन अब यह फीचर बहुत आम हो गया है। और अब तो आईफोन में भी यह सुविधा है, जेलब्रेक की आवश्यकता नहीं।
ये बताओ वाई-फाई पर तुम फोन रखते हो तो कितनी देर चलती है बैट्री? एक ही लाठी से सबको हाँक रहे हो?
सब फोन एक समान नहीं होते, मेरे फोन पर घंटो चल जाती है बैट्री।
अपना ही एक अन्य अनुभव बताता हूँ। अपने एचटीसी एचडी२ को वाई-फाई पर रखूँ तो आधे दिन से पहले बैट्री खत्म लेकिन ३जी पर वो सारा दिन मस्त चलती है। वहीं अपने सैमसंग गैलेक्सी एस२ को वाई-फाई पर सारा दिन रखूँ बैट्री मस्त लेकिन ३जी पर वह दिन कठिनाई से निकालती है। आशा है कहानी का मॉरल समझे होंगे अब।
मेरा आशय माइक्रोमैक्स 400R जैसे डिवाइस से है। ऐसे डिवाइस को माई-फाई (Mi-Fi) डिवाइस भी कहते हैं। इसमें ३जी वाली सिम डाल दो और यह उस ३जी डाटा कनेक्शन को वाई-फाई द्वारा उपलब्ध करा देता है, इस राऊटर से आप अपने टैबलेट, लैपटॉप, फोन आदि वाईफाई के ज़रिए जोड़ इंटरनेट से जुड़ सकते हैं। कनेक्ट करना कोई झंझट नहीं है, बस बटन दबा के ऑन करा और कुछ ही पलों में वाईफाई उपलब्ध, इसके अंदर अपनी बैट्री होती है तो कोई समस्या नहीं, ४-५ घंटे आराम से चलता है। रहा साथ लेकर चलने का झंझट तो यह २ पेन ड्राइव के बराबर ही होता है, इसको चालू कर जेब में रख लो या बैग में डाल के छोड़ दो, कोई झंझट वाला काम नहीं। बाकि अब किसी को खामखा झंझट निकालना है तो वह किसी में भी निकाल सकता है!
भाया मैंने वही तो कहा कि इसका होना बोनस फीचर हो सकता है लेकिन न होना (छोटी या बड़ी) खामी नहीं माना जा सकता।
हाँ लेकिन दोनों में से कोई भी भारतीय बाज़ार के लिए नहीं हैं, उसके अनुसार नहीं बने – न ही गूगल का यह टैबलेट और न ही किण्डल फायर। किण्डल स्टोर से किताबें खरीदी जा सकती हैं लेकिन गूगल के प्ले-स्टोर पर वे भी अभी भारतीय बाज़ार में उपलब्ध नहीं हैं।
जैसे? मैं भी घर के बाहर ३जी ही प्रयोग करता हूँ, घर में डीएसएल है – दोनों ही माध्यम तुम्हारे छोटे शहर में भी उपलब्ध हैं!
बाकि रही पब्लिक वाई-फाई की बात तो हवाई-अड्डे के अतिरिक्त फोकट का वाई-फाई मैंने और कहीं नहीं देखा, कुछेक रेस्तराओं कैफ़े आदि में मिल जाएगा लेकिन फोकट नहीं होता।
अच्छा आर्टिकिल है यूजर्स के लिए और अमित जी ने तुलनात्मक टिप्पणी भी बहुत अच्छी दी है, आप दोनों को धन्यवाद.
बहुत ही अच्छी जानकारी है.
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मेरे विनम्र मत से नैक्सस ७–गूगल के सस्ते क्वाड कोर टैबलेट की पूरी शल्य क्रिया हो चुकी है। अब इसकी बची हुई शल्य क्रिया एप्पल के सस्ते टेबलेट जो लगभग 200 डालर के भीतर रहेगा वो कर देगा। अच्छा मंथन हुआ है एक डिवाइस के बारे में। इसको पढने मात्र से संदेह के समस्त बादल छिन्न भिन्न हो सकते हैं। साधुवाद। पोस्ट के लिए व अपनी प्रतिक्रिया देने वाले दोनों के लिए
…एक बात तो है कि आपके और अमित के झगड़े से जो नई नई जानकारियां मिलती हैं वो लेख से भी कहीं ज़्यादा होती हैं /:-)
aएक बात तो है कि आपके और अमित के झगड़े से जो नई नई जानकारियां मिलती हैं वो लेख से भी कहीं ज़्यादा होती हैं /:-)
Hindi me kaise likhu…Sir ji
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