नववर्ष मंगलमय हो, ताजे समाचार
दो दिनों से घर से बाहर था। आकर पता चला कि मुझे ‘उदीयमान चिट्ठाकार २००६’ के प्रथम चरण के १२ उम्मीदवारों में चुन लिया गया है। चिट्ठाजगत में आये हुए मुझे अभी २ महीने ही हुए हैं दूसरे शब्दों में कहूँ तो मुझे अभी पूरा मौका भी नहीं मिला। लेकिन फिर भी निर्णायक मंडल ने मुझे इस योग्य समझा इस हेतु मैं उनका आभार व्यक्त करता हूँ। वरिष्ठ चिट्ठाकार अनूप भाईसाहब द्वारा कही गई ये पंक्तियाँ भी मेरे लिए इनाम से कम नहीं हैं।
ई-पंडित के नाम से अपना चिट्ठा लिखने वाले श्रीश सबसे नये चिट्ठाकारों में से होने के बावजूद अपने दनादन लेखन से चिट्ठाजगत में काम भर की हलचल मचा चुके हैं। शुरुआती दिनों में श्रीश ने अपना काफी समय अपने नाम की वर्तनी समझाने में लगाया लेकिन लोग हैं कि समझते ही नहीं। अपने देर से लिखना शुरू करने की भरपाई वे ढेर सारे लेखन से कर रहे हैं। तकनीकी लेखन के अलावा हास्य, गंभीर और विचारोत्तेजक लेख लिखकर श्रीशजी मात्र दो माह में एक लोकप्रिय चिट्ठाकार बन चुके हैं। वे अक्सर अपने पाठकों को चुटकुले सुनाकर उनका मनोरंजन भी करते रहते हैं।
यह प्रतियोगिता तो चिट्ठाकारों में आपसी भाईचारा और संवाद बढ़ाने का एक बहाना है। हार-जीत मायने नहीं रखती। वरिष्ठ चिट्ठाकारों द्वारा नए चिट्ठाकारों का उत्साहवर्धन हेतु यह उत्तम उपाय किया गया है। उम्मीद करता हूँ भविष्य में आप लोग इसी तरह मेरा हौंसला बढ़ाते रहेंगे।
सम्पूर्ण चिट्ठाजगत को मेरी ओर से नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं !
भगवान करे यह वर्ष आप सब के जीवन में अनंत खुशियाँ लेकर आए तथा आप निरंतर जीवन-पथ पर उन्नति करें।
Happy New Year 2007
अब आप रेडियो-झूठिस्तान 420FM से ताजे समाचार सुनिए:
- घर वालों की शिकायत तथा अपने डुप्लीकेट से तंग आकर जीतू भाई ने चिट्ठाकारी बंद करने का फैसला किया है। कुवैत सरकार ने एक बयान जारी कर इस फैसले पर खुशी जताई है।
- प्रतीक पांडे जी ने सुंदरियों का मोह त्यागकर संन्यास ले लिया है। अब वे ‘टाइमपास’ बंद कर तपस्या करने हेतु हिमालय प्रस्थान करेंगे।
(अपडेट – सुना है कि इन्द्र उनकी तपस्या भंग करने हेतु कुछ हॉट अप्सराओं को भेजने की तैयारी कर रहे हैं) - व्यंग्यराज फुरसतिया महाराज ने टाइपिंग के झमेले से तंग आकर अबसे केवल हायकू लिखने का निर्णय लिया है। उनकी जगह उनके ‘किंग साइज’ व्यंग्य अब आलोक भाई लिखेंगे।
- एक अत्यंत गोपनीय खबर पता चली है कि स्टार टिप्पणीकार संजय भाई ने एक प्रोग्राम बनाया है जो सबके चिट्ठों पर जाकर स्वतः ही विषयानुसार टिप्पणी कर देगा। उन्होंने आज से इसका परीक्षण भी शुरु कर दिया है। यह आमतौर पर किसी भी पोस्ट पर पहली टिप्पणी करता है।
- डुप्लीकेट जीतू नामक वायरस का नया वर्जन Duplicate Jitu 2.0 कल रात से जारी हो गया है तथा बहुत तेजी से फैल रहा है। इसकी विशेषता है कि यह दो टिप्पणियाँ करता है जिसमें से दूसरी वाली कुछ इस तरह से होती है:
ऊपर वाली टिप्पणी मेरी नहीं है। Please avoid it.
शेष समाचार दूसरे बुलेटिन में …
डोंट टेक इट अदरवाइज़, ईस्माईली इज़ अटैच्ड। 























यह टिप्पणी स्वतः ही विशेष सॉफ्टवेर द्वारा हुई है, इसे नजरअन्दाज करें
यह खबर तो बिल्कुल सच्ची है।
आपको नव वर्ष की शुभकामनायें और इस वर्ष का पहला हास्य लेख लिखने के लिये बधाई।
आपके लेखों मे ताज़्गी होती है और बढ़ीया जानकारी भी।
आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं
“…व्यंग्यराज फुरसतिया महाराज ने टाइपिंग के झमेले से तंग आकर अबसे केवल हायकू लिखने का निर्णय लिया है। उनकी जगह उनके ‘किंग साइज’ व्यंग्य अब आलोक भाई लिखेंगे।…”
यह तो वैसा ही चुटकुला हो गया जैसे कि दो महिलाएँ एक साथ घंटे भर खामोश बैठी रहीं…
नये साल में मजा आ गया।
बहुत बढ़ियां. फुरसतिया जी और हाईकू. जरुर उनकी पोस्टों की टाईटिल पढ़ आये आप, लगता है और समझ रहे हैं, यही पूरी पोस्ट है. पोस्ट भी तो पढ़ो.
जीतू भाई का डुप्लीकेट और संजय जी का साफ्टवेयर वाली बात मान ली गई है. 
पंडितजी की इस बुलेटिन से अच्छे-अच्छे ख़बरिया चैनल भी पानी मांगें. बहुत ख़ुब गुरू.
भई वाह, क्या वाक़ई इन्द्र की ऐसी कोई योजना है? फिर तो मैं बोरिया-बिस्तर बांध कर तपस्या के लिए आज ही निकलता हूँ।
@ संजय बेंगाणी,
नहीं जी, यह आप ही हो। सॉफ्टवेयर यह नहीं बताता कि वह सॉफ्टवेयर है।
@ PRABHAT TANDON,
बिल्कुल जी, आप भी तो इसके शिकार हो चुके हो।
@ रवि,
सही कहा रवि जी, विश्वास तो नहीं आता पर खबर ‘पक्की’ है।
@ समीर लाल,
समीर लाल जी बताया तो खबरें आकाशवाणी के झूठिस्तान केंद्र से प्रसारित हो रही हैं।
@ शशि सिंह,
नए साल पर आप भी तो मुम्बई की कुछ खबरें सुनाओ जी।
@ Pratik Pandey,
खबर हमारे संवाददाता ‘गप्पीराम’ ने रिपोर्ट की है जी, हम गारंटी नहीं दे सकते।
धन्यवाद श्रीष जी… नये साल में आपको ढेरों खुशियाँ मिले।
और हाँ… एक बात कहना चाहता हूँ – मेरा नाम तापस है, तपस नहीं …लोग अक्सर गड़बड़ कर देतें हैं…पिछले ४-५ वर्षों से दक्षिण में हूँ …यहाँ तो मुझे अपने नाम के अनगिनत versions सुनने को मिले हैं
लिखते रहिये।
plz replace श्रीष by श्रीश in the above comment
@ Tāpas,
क्षमा कीजिए तापस भाई। नाम को लेकर शर्त लगाता हूँ कि मेरे नाम जितने वर्जन आपके नाम के नहीं रहे होंगे। अब चिट्ठाजगत में अगर लोग आपका नाम सही न लिखें तो आप भी मेरी तरह नाम समझाने के लिए एक पोस्ट लिख डालिए। उस पोस्ट के बाद से अब लगभग सभी लोग मेरा नाम सही लिखते हैं।
thanks…
thanks…