मेरा परिचय
- नाम : श्रीश बेंजवाल शर्मा
- काम : मास्टरगिरी
- उम्र : २५ साल
- जन्मदिन : ४ सितंबर १९८२ (तोहफे स्वीकार करता हूँ )

- जन्मस्थान : ग्राम – बेंजी, जिला – रुद्रप्रयाग (उतराँचल)
- पसंदीदा काम : मैं और मेरा कंप्यूटर अक्सर बातें करते हैं अकेले में।
- ईश्वर में विश्वास रखता हूँ, शराब-सिगरेट आदि नशों से परहेज है।
- हिन्दी, हरियाणवी (Simplified), गढ़वाली तथा कुछ हद तक ठेठ हरियाणवी (Traditional) भी बोल लेता हूँ। पँजाबी सिर्फ समझ सकता हूँ।
- IAD (Internet Addiction Disorder) से पीड़ित, अलग-अलग समय पर सनक चढ़ती रहती है, ताजा संक्रमण : हिन्दी चिट्ठाकारी
मेरे ब्लॉग:
- ई-पंडित : http://ePandit.BlogSpot.com/
- Shrish’s Home : http://Shrish.WordPress.com/
संपर्क-सूत्र :






























श्रीरीश भाई ,
यह वर्ड्प्रेस पर आपने जो आज की पोस्ट की है उसको रंगीन मे कैसे लिखा , मैने तो कोई option देखे नही . मेरे ई मेल पर बता दे अगर आप को इतराज न हो drprabhatlkw dot gmail dot com
प्रभात जी कृपया मेरा नाम ‘श्रीश’ लिखें ‘श्रीरीश’ नहीं, मैं चिट्ठा लिखने के लिए बिल्लू भैये का विंडोज लाइव राइटर प्रयोग कर रहा हूँ, इस बारे में विस्तार से बताने के लिए एक पोस्ट लिखूंगा।
ई-पंडित को सादर प्रणाम, लो भाई आखिरकार हम पहुंच ही गए आपके हिंदी चिठ्ठे पर भी। बाकी अपन ने आपके अंग्रेजी चिठ्ठे पर अपनी हाजिरी पहले ही दर्ज करवा दी है…
शुभकामनाओं के साथ
श्रीश भाई जी (वैसे पंडित जी कहना मुझे ज्यादा अच्छा लगेगा) सादर नमस्कार…
आपके तमाम चिट्ठे एक बैठक में ही पढ डाले. कृपया मुझे अपना शिष्य बना लें जैसा कि जीतू भाई और रवि जी ने बना लिया है.. चिट्ठा जगत में अभी-अभी जन्म लिया है.. आप जैसे पहुँचे हुए लोगों का साथ रहा तो कुछ कर जाऊँगा.. आप मेरे द्वारा “पोस्टित” आईटी शोले पर कमेंटियाये थे.. वैसा ही एक “आईटी दीवार” भी पोस्ट किया है… और आज ही “कागज : एक राष्ट्रीय सम्पत्ति” पर एक चिट्ठा लिखा है.. कृपया अवलोकन करें और दूसरों को भी अवलोकियाएं.. अभी तो काफ़ी कुछ सीखना है.. समय की कमी है (दाल-रोटी के चक्करों मे) इसलिये धीरे-धीरे सीख रहा हूँ.. (ब्लॉग में फ़ोटो कैसे डालना, लिंक कैसे बनाना, अपने चिट्ठे को दूसरों तक कैसे पहुँचाना, साईड बार में कैसे information फ़ीड करना, रंगीन कैसे करना, आदि-आदि सीखना है..इसके लिये मुझे आप, रवि भाई, जीतू भाई, बेंगाणी जी आदि की मदद लगेगी.. तो महानॊं जब-जब यह चेला कठिनाई में आये और आवाज लगाये.. दौडें चले आना..
@संजीत त्रिपाठी,
संजीत जी, स्वागत है आपका हमारे चिट्ठे पर। आशा है नियमित आते रहेंगे।
@Suresh Chiplunkar,
सुरेश भाई आपको मेरा चिट्ठा पसंद आया, इसके लिए धन्यवाद। वैसे आपकी ‘आईटी सीरीज’ पोस्टों से लगता है कि आप कम्प्यूटर की अच्छी जानकारी रखते हैं, अतः आपको कोई दिक्कत न होती। बाकी मैं क्लास लगाता ही रहता हूँ, आप आते रहिएगा।
pandit ji
i m imprssed by ur work. i came at ur blog by chance but i will regulate muself.
do ur best
bye
virendrak.verma@gmail.com
good work
sorry
hindi me likh raha tha
ha ha ha !!1
आदरणीय श्रीश जी नमस्कार
आपकी टिप्पणी विपन्नबुद्धि उवाच पर पढ़ी बहुत अच्छा लगा। मैं नारद की सभी प्रविश्टियों को नियमित पढ़ता रहता हूँ। आपके ब्लाग को भी देखता रहता हूँ। लेकिन सीधा सम्पर्क नहीं कर पा रहा था। कम्प्यूर के विषय में मेरी जानकारी अधिक नहीं है। मैं अपना सारा समय संस्कृत की आनलाइन कक्षा easy_sanskrit@yahoo.com
में लगा रहा हूँ.। आप चाहें तो मुझे भी अपने समूह में शामिल कर लें मैं यथा शक्ति हिन्दी और संस्कृत की सेवा करता रहूँगा। कैसे क्या करना है आपको ही बताना पड़ेगा।
http://www.sanskratseekho.blogspot.com
http://www.deetavani.blogspot.com
http://www.netamahabhartam.blogspot.com
http://www.hindikonpal.blogspot.com
ई-पंडित तो पहले भी देखा था,तब भी यही लगा कि एक सार्थक प्रयास का नाम है। इत्ना कुछ एक साथ है इस पर कि यह एक् जानकारियों का स्रोत ही है।तभी मैने इस का लिंक भी अपने एक ब्लॊग पर सुरक्षित कर लिया था।
शुभकामनाओं सहित—
Namaskar pandit ji Iam Darshan singh Rautela my question to you are you know that khabbal kaphenje if you know — so thank you
I REQUEST TO THAT CAN YOU CONVERT THIS THAT IN TO ENGLISH MONTH —VIKRME SAMBAT 2028 SAWAN MONTH –8 GATI SUTARDAY TIME NIGHT 01:30
1. Mai google par blog banaya hai, parntu uske word search karne par search result me mera blog nahi aata jabki esa kyo,
2. Mai apne blog par adsece kaise jodu
3. Hindi me bataye me email. pkbakdeeya@gmail.com hai. Jaldi batay. Mera blog address http://www.money-pradeep.blogspot.com/
mr. shrish where i should send your gift?will you tell me please?
It gives me immense pleasure to learn about your valient efforts that some one like you could be defined as HINDI SEVAK . off late i was into a serious kind of thought process that deslite so much of neglect why has hindi not died yet but i got my answer that in all the ages there has been some one who devoted his life for the preservation, protection and development of hindi.
may god shower all his kindness on you so that you can propell your energy the way you have been doing. i shall be thank ful if you could attend me through e-mail. thanks once again.