ई-पण्डित / ePandit – Hindi Tech Blogsubscribe feedई-पण्डित पर जल्दी ही कुछ नये विषयों पर लेख शुरु होंगे।

परिचय

जानिए ‘ई-पण्डित’ – हिन्दी के प्रथम सम्पूर्ण तकनीकी ब्लॉग के बारे में

‘ePandit’ is the flagship blog of tech-guru ePanditMore about ePandit. It is the pioneer tech blog of Hindi and is known as first complete Hindi tech blog. ‘ePandit’ is known for popularizing tech blogging in Hindi blogosphere. ‘ePandit’ was started in 2006 as an effort to evangelize more & more netizens to Hindi blogging, provide help to newbies and promote tech blogging in Hindi. ‘ePandit’ brought numerous articles on technology, Hindi computing, Hindi typing & input methods and a popular Unicode Hindi typing tutorial which got published in several magazines.
‘ePandit’ was (is) a vision, a dream to pariticipate in the holy mission of promoting Hindi on computer & Internet. ‘ePandit’ frequently writes about new trades in computing & internet.
‘ePandit’ went to hibernation during Nov. 2007 due to some reasons and was reincarnated after two years on Jan. 27, 2010 hosted on his own domain.

‘ई-पण्डित’ टॅक-गुरु ई-पण्डित का अग्रणी चिट्ठा है। यह हिन्दी का पथप्रदर्शक तकनीकी चिट्ठा है एवं हिन्दी के प्रथम सम्पूर्ण तकनीकी ब्लॉग के तौर पर जाना जाता है। ‘ई-पण्डित’ को हिन्दी चिट्ठाजगत में तकनीकी चिट्ठाकारी को लोकप्रिय बनाने हेतु जाना जाता है। ‘ई-पण्डित’ का आरम्भ २००६ में अधिक से अधिक अन्तर्जाल प्रयोक्ताओं को हिन्दी चिट्ठाकारी के प्रति आकर्षित करने, नए लोगों की सहायता करने तथा हिन्दी में तकनीकी ब्लॉगिंग को प्रमोट करने (और चिट्ठाकार की गीकी खुजली मिटाने) के लिए किया गया। ‘ई-पण्डित’ तकनीक, हिन्दी कम्प्यूटिंग, हिन्दी टाइपिंग, इनपुट विधियों पर बहुत से लेख लाया। विशेषकर कम्प्यूटर पर यूनिकोड हिन्दी टाइपिंग नामक लेख बहुत ही सराहा गया एवं विविध पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुआ। य़ह पहला लेख था जिसमें कम्प्यूटर पर हिन्दी टाइपिंग के विभिन्न तरीकों को सुव्यवस्थित तरीके से डॉक्यूमेंट किया गया।

‘ई-पण्डित’ महज एक ब्लॉग नहीं एक विचार था, एक दृष्टिकोण, एक स्वप्न कि हिन्दी को भी इण्टरनेट पर अपना उपयुक्त स्थान मिले। हिन्दी की स्थिति तब भी और अब भी अन्य देशों की भाषाओं यथा चीनी, अरबी आदि से बहुत पीछे थी और है। चिट्ठाकारों का स्वप्न था कि इण्टरनेट पर अपनी भाषा हिन्दी की भी अलग दुनियाँ हो। ‘ई-पण्डित’ इसी दिशा में एक अदना सा प्रयास था। दूसरा मुख्य उद्देश्य था कि आम हिन्दी भाषी जिसकी अंग्रेजी तक किञ्चित कारणों से पहुँच नहीं है उसे अपनी भाषा में सरल रुप से तकनीकी जानकारी मिले।

दूसरे उस समय हिन्दी में कोई भी तकनीकी ब्लॉग नहीं था। कुछ चिट्ठाकार यदा-कदा तकनीकी पोस्टें लिखते रहते थे परन्तु कोई सम्पूर्ण, संगठित और विषय आधारित चिट्ठा नहीं था। कुछेक चिट्ठे तकनीकी विषयों पर शुरु हुए पर दो-चार पोस्टें लिखकर गायब भी हो गए। कारण था कि उस समय हिन्दी में तकनीकी पोस्टों को विशेष पढ़ा नहीं जाता था, न तो पर्याप्त हिट्स मिलते थे और न पर्याप्त टिप्पणियाँ। इस कारण कोई भी तकनीकी विषयों पर लिखता न था। यद्यपि इससे कई बार मनोबल गिरता था परन्तु कुछ साथियों के हौसला बढ़ाने और कुछ ही सही लेकिन अच्छी फीडबैक के चलते लेखन जारी रहा। साथ ही एक उम्मीद थी की शायद इससे से प्रेरित होकर भविष्य में कुछ अन्य लोग भी तकनीकी ब्लॉग लिखने लगें। खैर धीरे-धीरे समय के साथ बदलाव आया और ‘ई-पण्डित’ प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय होता गया। कई मित्र कहते कि उन्हें ‘ई-पण्डित’ से मदद मिली तो लिखने के लिए नई ऊर्जा मिलती थी। इन्हीं दिनों कई नए चिट्ठाकार तकनीकी चिट्ठे लिखने लगे थे तो लगा कि मेहनत सफल हो गई। अज्ञातवास पर जाने के समय ‘ई-पण्डित’ की लोकप्रियता चरम पर थी और रविरतलामी जी के बाद ‘ई-पण्डित’ के सबसे ज्यादा फीड सबस्क्राइबर थे।

नवम्बर २००७ के दौरान ‘ई-पण्डित’ किञ्चित कारणों से अवकाश (या अज्ञातवास) पर चला गया तथा दो वर्ष पश्चात २७ जनवरी २०१० को वापस आया। इस दौरान हिन्दी की दुनियाँ काफी समृद्ध हो चुकी है। एक बार तो लगा कि अब शायद हिन्दी सम्बन्धी तकनीकी सहायता की आवश्यकता न हो परन्तु विभिन्न चर्चा समूहों एवं ऑफलाइन दुनिया के अनुभव से ज्ञात हुआ कि अभी भी आमजन के लिए कम्प्यूटर पर हिन्दी चमत्कार सरीखी ही है। इसलिए ‘ई-पण्डित’ के अस्तित्व का कारण है और शायद हमेशा रहेगा।

खैर हार्दिक खुशी की बात है कि हिन्दी चिट्ठाजगत अब भाषाई अल्पसंख्यक ब्लॉगरों का कुनबा न रहकर विशाल कौम बन गया है। पुराने समय तकनीक सम्बन्धी अपडेट्स जानने के लिए अंग्रेजी चिट्ठों का रुख करना पड़ता था पर अब बहुत सी खबरें हिन्दी चिट्ठों से ही मिल जाती हैं। उम्मीद है यह स्थिति धीरे-धीरे और सुधरेगी।

‘ई-पण्डित’, ‘अक्षरग्राम समूह’ और हिन्दी चिट्ठाजगत से भावनाएँ जुड़ी हैं, इसलिए कभी-कभी नॉस्टेलेजिया जाते हैं और ‘अतीतगान’ करने लगते हैं।

4 टिप्पणियाँ

  1. फरवरी २००८ से अब तक शुरू हमारी ब्लॉग्गिंग यात्रा में कई बार मैंने आपके चिट्ठे की मदद ली है ! पता नहीं तब धन्यवाद कभी चिपकाया कि नहीं ? …..सो अब चिपका रहा हूँ —–> धन्यवाद !

  2. आज पहली बार ही ईपंडित देख रहा हूँ। कितना आनंद आ रहा है, कह नहीं सकता ।आप का प्रयास सराहनीय है। ऐसे ही प्रयास चलते रहे तो हिंदी का भी ध्वज विश्वपटल पर कभी अवश्य लहराएगा। बहुत बहुत धन्यवाद।

  3. @धनंजय,
    धन्यवाद जी, आशा है अब आते रहेंगे।

ट्रैकबैक

  1. ई-पण्डित की अज्ञातवास से वापसी | ई-पण्डित / ePandit – Hindi Tech Blog

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