Archive for the ‘चिट्ठाकारी’ Category

हिटलर भी गूगल रीडर के बन्द होने से नाराज है

Sunday, March 17th, 2013

गूगल द्वारा अपनी लोकप्रिय फीड रीडर सेवा गूगल रीडर बन्द करने के निर्णय से प्रयोक्ताओं में काफी निराशा तथा नाराजगी है। इस फैसले से दुःखी लोगों की सूची में हिटलर भी शामिल हो गया है। हिटलर की प्रतिक्रियाओं वाले वीडियो (Hitler Reacts meme) के नवीनतम अवतार में हिटलर इस समाचार पर अपनी खिन्नता व्यक्त करता है कि उसका प्रिय फीड रीडर बन्द किया जा रहा है। वीडियो में एक जगह हिटलर कहता है,

"Why on Earth do they need to destroy all things good?. How dare they take away Google Reader. I have over 300 feeds in there. Have they any idea how much effort I’ve put in?."

जब उसका एक सैन्य अधिकारी उसे बताता है कि रीडर को इसलिये बन्द किया गया है ताकि गूगल दूसरे उत्पादों जैसे गूगल ग्लास पर फोकस कर सके तो हिटलर चिल्लाता है कि गूगल ग्लास गूगल वेव के बाद सबसे बकवास उत्पाद है। निराशा की पराकाष्ठा में वह पूछता है कि अब क्या विकल्प रह गये हैं।

गूगल रीडर के बन्द होने के समाचार से ब्लॉगरों में निराशा व्याप्त है। वेब पर चल रही हलचल से रूबरू होने के लिये यह सर्वश्रेष्ठ उपाय है। हालाँकि कुछ दूसरे विकल्प उपलब्ध हैं पर गूगल रीडर जैसा कोई नहीं। प्रयोक्ताओं में छायी निराशा और क्रोध को ही इस वीडियो में व्यक्त किया गया है।

Hitler reacts on Google Reader shutdown news

ब्लॉगर में कस्टम पर्मालिंक (पोस्ट स्लग) सुविधा आई

Tuesday, July 10th, 2012

अत्यन्त हर्ष का विषय है कि ब्लॉगर में कस्टम पर्मालिंक सुविधा आ गयी है। मुझे ब्लॉगर में इस फीचर का इन्तजार कई सालों से था। यह एक मुख्य कमी थी जो वर्डप्रैस की तुलना में ब्लॉगर में मुझे खलती थी। आइये पहले जानते हैं कि यह है क्या।

ब्लॉगर में ब्लॉग के पर्मालिंक की संरचना कुछ इस तरह होती है।

http://BlogURL/YYYY/MM/Short-version-of-title.html

ब्लॉगर ब्लॉग में जब आप पोस्ट लिखते हैं तो उसका पर्मालिंक (URL) पोस्ट के शीर्षक से बनता है। शीर्षक के पहले ३५ वर्णों को ले लिया जाता है, इनमें स्पेस भी गिने जाते हैं जिनका स्थान हाइफन ले लेता है। इस कारण लम्बे शीर्षक अक्सर पूरे नहीं आ पाते तथा कट जाते हैं। उदाहरण के लिये यदि पोस्ट का शीर्षक है Custom permalinks facility comes to blogger तो पर्मालिंक बनेगा।

http://example.blogspot.com/2012/07/custom-permalinks-facility-comes-to.html

जो कि अधूरा तो है ही, साथ ही सर्च की दृष्टि से महत्वपूर्ण शब्द छूट जाते हैं। दूसरी ओर शीर्षक यदि हिन्दी में हो तो यूनिकोड वर्णों को नजरअन्दाज कर दिया जाता है तथा पर्मालिंक निम्नलिखित जैसा होता है।

http://example.blogspot.com/2012/07/blog-post_02.html

जो कि असुन्दर तो है ही, साथ ही उससे पोस्ट के विषय का कोई अनुमान नहीं लगता। अक्सर हम कई चिट्ठों पर सन्दर्भ हेतु दिये गये पोस्टों के लिंक देखते हैं, हम अक्सर इन पर माउस रखकर देखते हैं। यदि पर्मालिंक उपर्युक्त जैसा हो तो पाठक उस पर जाने का विचार अक्सर त्याग देता है।

अब वर्डप्रैस में लम्बे समय से यह सुविधा है कि हम पोस्ट का शीर्षक हिन्दी में कुछ और रख सकते हैं तथा पर्मालिंक अंग्रेजी में। वर्डप्रैस में इस फीचर का नाम ‘पोस्ट स्लग’ है। ब्लॉगर में ऐसी सुविधा नहीं थी जिस कारण अधिकतर हिन्दी चिट्ठाकार डिफॉल्ट पर्मालिंक पर आश्रित थे। मैंने कई साल पहले ब्लॉगर ब्लॉग में इसके लिये एक जुगाड़ भी बताया था जिसका उपयोग कुछ ब्लॉगर जैसे सुरेश चिपलूनकर जी, उन्मुक्त जी आदि अपनी पोस्टों में कर रहे थे। इसमें पहले आपको अपनी पोस्ट अंग्रेजी शीर्षक के साथ प्रकाशित करके फिर हिन्दी शीर्षक के साथ प्रकाशित करनी होती थी। यह थोड़ा झंझट का काम था जिस कारण लोग आलस्यवश इससे कतराते थे।

प्रसन्नता का विषय है कि अन्ततः ब्लॉगर में भी यह सुविधा आ ही गयी है। ब्लॉगर में इसे ‘कस्टम पर्मालिंक’ नाम दिया गया है। फिलहाल यह ब्लॉगर के ड्राफ्ट में ही है इसलिये ब्लॉगर ड्राफ्ट के डैशबोर्ड में लॉगिन करें तथा एक नयी पोस्ट बनायें।

अब दायीं ओर Post Settings नामक साइडबार पेन में Permalink नामक नया सैक्शन दिखायी देगा। इस पर क्लिक करें तो मैन्यू खुलेगा।

विकल्प पहले से Automatic URL पर सैट होगा। यह यूआरऍल संरचना आपकी पोस्ट के शीर्षक पर आधारित होती है। इसके नीचे Custom URL चुनें। इसके नीचे बक्से में आप मनचाहा टैक्स्ट दे सकते हैं। यह साथ ही साथ आपको नये पर्मालिंक का प्रिव्यू भी दिखाता रहता है। संतुष्टि होने पर पोस्ट प्रकाशित कर दें।

फिलहाल इस कस्टम यूआरऍल स्ट्रिंग में वर्णों की कोई सीमा नहीं है लेकिन शायद भविष्य में लागू हो। हालाँकि आपको बहुत लम्बी स्ट्रिंग न रखकर अपने शीर्षक से सम्बन्धित कुछ मुख्य शब्द ही रखने चाहिये। इसमें केवल a-z, 0-9  तथा हाइफन (-) हो सकते हैं, स्पैशल कैरैक्टर नहीं हो सकते। ध्यान दें कि एक बार पोस्ट प्रकाशित हो जाने के बाद इसे बदला नहीं जा सकता इसलिये सोच-समझकर चुनें। वर्डप्रैस में हालाँकि पर्मालिंक बाद में भी बदला जा सकता है पर उससे कहीं दिया गया पोस्ट का लिंक ब्रेक हो जाता है। हालाँकि ब्लॉगर की इस नयी सुविधा में एक सीमा अब भी है। हम केवल पर्मालिंक के अन्तिम भाग को ही इच्छानुसार तय कर सकते हैं। इसकी संरचना में डेट फॉर्मेट कायम रहेगा। दूसरी ओर वर्डप्रैस में पर्मालिंक की संरचना को सम्पूर्ण रूप से मनचाहे ढंग से तय किया जा सकता है।

चूँकि यह सुविधा अभी केवल ब्लॉगर इन ड्राफ्ट में ही उपलब्ध है इसलिये विण्डोज़ लाइव राइटर में यह अभी नहीं उपलब्ध नहीं। एक बार यह सुविधा सभी ब्लॉगों को उपलब्ध होने पर लाइव राइटर में भी इसका विकल्प मिल जायेगा।

कस्टम पर्मालिंक के कई लाभ होते हैं। एक तो यह डिस्क्रिप्टिव होता है, कही लिंक दें तो यूआरऍल से ही विषय का अन्दाजा हो जाता है। दूसरा यह निरर्थक blog-post_02.html जैसे की तुलना में सुन्दर भी दिखता है। तीसरा यह सर्च इंजनों के लिहाज से बेहतर है। सर्च इंजन जैसे गूगल सर्च परिणामों हेतु URL को भी इंडैक्स करते हैं। यदि पर्मालिंक सार्थक होगा तो पोस्ट का सर्च रैंक सुधरेगा। अंग्रेजी पोस्ट शीर्षकों के मामले में भी आप पर्मालिंक को मनचाहे ढंग से तय कर सकते हैं, अनाश्यक शब्दों जैसे for, to, and, in, on, at आदि को हटाकर SEO (सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन) की दृष्टि से महत्वपूर्ण शब्द रख सकते हैं। एक अच्छे पर्मालिंक में कुछ गुण होते हैं जिनके बारे में कभी फिर लिखूँगा।

Blogger introduces Custom Permalink feature

iNext Live में ePandit के tools मैन्शन

Saturday, October 15th, 2011

जागरण समूह के कॉम्पैक्ट अखबार आइ नैक्स्ट लाइव के १४ सितम्बर २०११ (हिन्दी दिवस) के अंक में ई-पण्डित के औजारों की चर्चा देखी। लेख पढ़ने के लिये निम्न लिंक पर जायें।

तो हो जाये हिन्दी

अपने औजारों की चर्चा देखकर स्वाभाविक रूप से अच्छा लगा लेकिन लेख की भाषा पढ़कर सिर पीटने का मन होता है। हिंग्लिश और रोमनागरी की खिचड़ी, अंग्रेजी में हिन्दी के शब्द ढूँढने पड़ते हैं। भाषा के क्रियोलीकरण की यह हद है फिर मैंने देखा कि आइ नैक्स्ट के सभी लेखों की भाषा ही ऐसी होती है। अब जिन अंग्रेजी शब्दों के हिन्दी समकक्ष कुछ विशेष कठिन हैं वे तो अंग्रेजी में चल सकते हैं पर आम हिन्दी शब्दों की जगह भी अंग्रेजी शब्द ठूँसे गये हैं जैसे अन्य या दूसरे की जगह अदर, विभिन्न की बजाय different आदि। यह समाचार-पत्र कथित रूप से युवाओं पर केन्द्रित है, क्या अखबार वाले यह समझते हैं कि हिन्दी भाषी युवा इतने अज्ञानी हैं कि ऐसे आसान शब्द भी नहीं समझते या फिर वे यह समझते हैं कि युवाओं को ऐसी खिचड़ी भाषा पसन्द करते हैं?

साथ ही यह भी देखा कि यह लेख बालेन्दु जी के नवभारत टाइम्स में छपे लेख से ‘प्रेरित’ है। यानि अखबार वाले भी दूसरे अखबारों से ‘प्रेरणा’ लेते हैं। :-)

ePandit tools in iNext Live

लिगेसी इण्डिया में ई-पण्डित की चर्चा

Tuesday, October 11th, 2011

लिगेसी इण्डिया पत्रिका के ताजा अंक में ई-पण्डित की चर्चा हुयी है। पण्डित जी को प्रमोट करके ऋषि बना दिया गया है।  Smile

Legacy_India_ePandit_Article_Oct_2011

(चित्र को स्पष्ट देखने के लिये उस पर क्लिक करें)

बायें तरफ बने कार्टून को देखकर मेरे यमुनानगर के चिट्ठाकार साथी उमेश जी की प्रतिक्रिया थी कि उसमें मैं और मेरी धर्मपत्नी हैं, पत्नी जी मुझे जबरदस्ती कम्प्यूटर वाली मेज से ठेल रही हैं। Smile

चर्चा के लिये अविनाश जी का आभार।

ePandit in Legacy India magzine

किसी वेब पेज या ब्लॉग पोस्ट में पेज जम्प कैसे लगायें

Thursday, August 4th, 2011

पेज जम्प ऐसे लिंक को कहा जाता है जिसे क्लिक करने पर आप उस पेज में ऊपर या नीचे किसी स्थान विशेष पर बिना पेज रीलोड किये तत्काल पहुँच सकें। इन का प्रयोग आप अपने वेब पेज को इंटरैक्टिव बनाने के लिये कर सकते हैं। यह विशेषकर लम्बे पेजों हेतु उपयोगी है जिससे पाठक को पेज स्क्रोल नहीं करना पड़ता। माना आप किसी पोस्ट में कुछ विषयों पर लिख रहे हैं तो शुरु में पेज जम्प के उपयोग से विषय सूची बना सकते हैं जिसमें किसी विषय नाम पर क्लिक करने से पाठक सीधे उस सैक्शन में चला जायेगा। इसके अलावा किसी एक विषय को पढ़ते हुये पेज के किसी अन्य हिस्से में मौजूद भिन्न विषय पर जाने के लिये भी पेज जम्प लगाये जा सकते हैं। हमारे पाठक नवीन चतुर्वेदी जी ने पेज जम्प लगाने का तरीका पूछा, इसी बारे में जानकारी देने के लिये यह लेख लिखा जा रहा है।

डेमो:- आप यहाँ हैं। नीचे जाने के लिये यहाँ क्लिक करें।

आपको पेज जम्प डालने के लिये ऍचटीऍमऍल संशोधित करनी होगी। आपको पेज में दो चीजें लगानी होंगी।

  1. पेज के अन्य सैक्शन की ओर इंगित करता एक लिंक कोड
  2. पेज जिस स्थान पर जम्प करेगा वह स्थान चिह्नित करता एक संकेतक कोड

जहाँ पर लिंक लगाना है, वहाँ निम्न कोड सिंटैक्स प्रयोग करें।

<a href=“#TargetPoint”>यहाँ</a> क्लिक करें।

अर्थात सामान्य लिंकों में href में जहाँ कोई वेब पता (यूआरऍल) आता है वहाँ उस जम्प वाले स्थान का नाम आयेगा और उसके आगे हैश चिह्न (#) लगेगा। हैश चिह्न बताता है कि यह लिंक पेज का ही आन्तरिक लिंक है।

अब आपको जहाँ पेज जम्प ले जायेगा उस स्थान पर निम्न ऍंकर लगाना है। यहाँ name ऍट्रीब्यूट से आप उस स्थान को एक अद्वितीय नाम देते हैं जहाँ पेज जम्प ले जायेगा।

<a name=“TargetPoint”>मैं टार्गेट स्थान हूँ</a>

इस कोड का सिंटैक्स ऊपर जैसा ही है, बस href की जगह name होगा तथा हैश चिह्न नहीं आयेगा।

TargetPoint (मैं टार्गेट स्थान हूँ) वाला स्थान कोई भी शब्द हो सकता हो जो किसी वाक्य या पैराग्राफ के बीच में भी हो सकता है। TargetPoint उस स्थान को चिह्नित करने के लिये एक विशिष्ट संकेतक शब्द (यूनीक आइडेंटिफायर) है। आप कोई भी शब्द प्रयोग कर सकते हैं, हाँ स्पेस न दें उसकी जगह हाइफन (-) या अंडरस्कोर (_) का प्रयोग कर सकते हैं। जहाँ आप यह कोड लगायेंगे लिंक करने से पेज जम्प होने पर वो स्थान स्क्रीन के टॉप पर होगा।

कुल मिलाकर हम करते यह हैं कि पेज के किसी हिस्से को name ऍट्रीब्यूट से यूनीक नाम देकर पेज के किसी और हिस्से पर लिंक लगाकर href ऍट्रीब्यूट से उसे रैफर करते हैं।

किसी अन्य पेज/पोस्ट से जम्प करना

सामान्यतया आप जब किसी पेज पर किसी अन्य पेज का लिंक लगाते हैं तो क्लिक करने पर वह उस टार्गेट पेज के टॉप पर ले जाता है। परन्तु यदि आप उस टार्गेट पेज पर टॉप की बजाय किसी अन्य सैक्शन पर सीधे जाना चाहें तो पेज जम्प लगाने से वह पेज सीधे उस स्थान विशेष पर लोड होगा।

इसके लिये टार्गेट पेज पर सैक्शन (जहाँ पेज जम्प के बाद पहुँचना है) को ऊपर वाले तरीके से ही निम्न कोड से चिह्नित करें।

<a name=“TargetSection”>मैं टार्गेट स्थान हूँ</a>

और जिस पेज पर लिंक लगाना है वहाँ निम्न कोड से लिंक लगायें। माना टार्गेट वेब पेज (या ब्लॉग पोस्ट) का पता http://alana.com/falana.html है तो कोड कुछ ऐसा होगा।

फलाने पेज पर जाने के लिये <a href=“http://alana.com/flana.html#TargetSection”>यहाँ</a> क्लिक करें।

इसका जीवन्त उदाहरण देखने हेतु यहाँ क्लिक करें जिससे कि आप इसी वेबसाइट पर मौजूद एक अन्य वेबपेज के सैक्शन में पहुँच जायेंगे।

आशा है आपको उपर्युक्त प्रक्रिया समझ आ गयी होगी। यदि कोई प्रश्न हो तो टिप्पणियों में पूछें।

—-

आप यहाँ आ गये। ऊपर वापस जाने के लिये यहाँ क्लिक करें।

How to insert page jump in a web page or blog post

पण्डित जी हिन्दी ब्लॉगिंग में तकनीकी योगदान हेतु “ब्लॉग प्रतिभा सम्मान २०११” पुरस्कार से सम्मानित

Monday, May 2nd, 2011

पण्डित जी को हिन्दी चिट्ठाकारी के प्रचार-प्रसार में तकनीकी योगदान हेतु ब्लॉग प्रतिभा सम्मान पुरस्कार प्रदान किया गया है। उन्हें दिनाँक ३० अप्रैल २०११ को दिल्ली के हिन्दी भवन, विष्णु दिगम्बर मार्ग में आयोजित पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में उत्तराखण्ड के मुख्यमन्त्री श्री रमेश पोखरियाल जी निशंक तथा अन्य माननीय अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया।

ePandit_Blog_Pratibha_Samman_2011-1 

ePandit_Blog_Pratibha_Samman_2011 - 2

इसके अतिरिक्त इस अवसर पर “हिन्दी ब्लॉगिंग (अभिव्यक्ति की नई क्रान्ति)” पुस्तक का विमोचन भी किया गया। इस पुस्तक में मेरे दो लेख हैं – यूनिकोड हिन्दी टाइपिंग से परिचय” तथा “मोबाइल फोन/टैबलेट कम्प्यूटर में हिन्दी समर्थन”। यह भी एक सुखद आश्चर्य है कि पुस्तक में पहला लेख मेरा ही है। इसके अलावा कार्यक्रम के आरम्भ में आयोजकों ने सबसे पहले मुझे ही हिन्दी ब्लॉगिंग तथा इसके तकनीकी पहलुओं पर बोलने का अवसर दिया, यह भी उनकी सदाशयता है।

मैं हिन्दी साहित्य निकेतन के डॉ॰ गिरिराजशरण अग्रवाल जी, नुक्कड़.कॉम के श्री अविनाश वाचस्पति जी, परिकल्पना.कॉम के श्री रवीन्द्र प्रभात जी तथा समस्त चिट्ठाकार समुदाय का धन्यवाद करता हूँ कि उन्होने मुझे इस सम्मान के योग्य समझा। इससे मुझे हिन्दी कम्प्यूटिंग तथा ब्लॉगिंग हेतु और भी उत्साह से कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी।

समारोह के बारे में अधिक विस्तार से बाद में दूसरे व्यक्तिगत चिट्ठे पर लिखूँगा।

ePandit gets Blog Pratibha Samman 2011 award for technical contribution in Hindi blogging

क्या चिट्ठा अपने डोमेन नेम पर ले जाने के बाद आपके ब्लॉग की फीड काम नहीं कर रही? (समाधान)

Friday, February 18th, 2011

आपने हाल ही में अपना डोमेन नाम लिया, अपने ब्लॉगर ब्लॉग का नये पते (डोमेन नेम) पर पुनर्निर्देशन सैट किया जिससे पुराना चिट्ठा नये पते पर स्वतः पुनर्निर्देशित हो जाता है। परन्तु अब आपके चिट्ठे की नयी पोस्टें ऍग्रीगेटरों पर नहीं आ रही, साथ ही आपके चिट्ठे के नियमित पाठकों (फीड सबस्क्राइबर जो कि फीड रीडर जैसे गूगल रीडर या ईमेल से चिट्ठा पढ़ते हैं) तथा ब्लॉग फॉलोवरों (गूगल कनैक्ट द्वारा फॉलोवर) तक नई पोस्टों नहीं पहुँच रही यानि आपकी फीड अपडेट नहीं हो रही?

हाल ही मैं श्री प्रकाश गोविन्द जी ने इस समस्या के समाधान हेतु सम्पर्क किया। उन्होंने बताया कि अपना डोमेन नाम लेने वाले बहुत से चिट्ठाकार इस समस्या से परेशान हैं, कई तो इस समस्या के कारण अपना डोमेन नाम लेकर पछता रहे हैं। यहाँ तक कि कई तकनीकी जानकारी रखने वाले मित्र भी इसका हल नहीं ढूँढ पाये। मुझे आश्चर्य हुआ कि तकनीकी जानकारी रखने वाले कई चिट्ठाकार भी इसका कारण कैसे नहीं समझे। मुझे तो प्रकाश जी का सन्देश मिलते ही मैं मामला समझ गया था, उन्हें मौखिक रुप से बताकर काम न चला तो करके दिखाना पड़ा। इसलिये मैंने इस विषय पर यह लेख लिखने की सोची ताकि सभी चिट्ठाकार मित्रों की समस्या दूर हो सके।

कारण

भइया आपने पुराने ब्लॉग पते को तो नये पते (अपने हाल में लिये डोमेन नाम) पर पुनर्निर्देशित कर दिया लेकिन फीड को कौन पुनर्निर्देशित करेगा? उसे सपना आयेगा कि मुझे अब नये पते से पोस्टें उठानी हैं, साथ ही यदि आप फीडबर्नर सेवा का उपयोग करते हैं तो उसे भी सपना कैसे आयेगा कि बन्दे ने अपना ब्लॉग पता (साथ ही फीड बता) बदल लिया है?

आपके पाठकों ने पुराने फीड पते को सबस्क्राइब कर रखा है जबकि नई पोस्टें लिखी जा रही हैं नये पते पर जिनके अपडेट भी नये फीड पते पर जा रहे हैं। इसके अलावा आपके जिन पाठकों ने फीडबर्नर वाली फीड सबस्क्राइब कर रखी हैं (यदि आप फीडबर्नर का उपयोग करते हैं तो) उनके पास भी नई पोस्टें कैसे पहुँचेंगी?

समाधान

समाधान ये है कि अपने पुराने ब्लॉग की फीड (जो कि आपके नियमित पाठकों ने सब्सक्राइब कर रखी है) को नये ब्लॉग की फीड पर पुनर्निर्देशित किया जाय। यदि आप फीडबर्नर सेवा का भी उपयोग करते हैं तो उसमें जाकर वहाँ ब्लॉग की फीड सैटिंग सम्पादित कर नये ब्लॉग की फीड जोड़ें। इसके अलावा पुराने ब्लॉग की फीड को नये ब्लॉग की फीड पर (यदि फीडबर्नर का उपयोग करते हैं तो फीडबर्नर वाली फीड पर) पुनर्निर्देशित कर दें। यदि आप फीडबर्नर का उपयोग नहीं करते तो बेहतर है कि फीडबर्नर में नये ब्लॉग पते की फीड जोड़कर पुराने ब्लॉग की फीड को फीडबर्नर वाली फीड के पते पर पुनर्निर्देशित करें।

देखें -

» फीडबर्नर सेवा क्या है, इसके क्या फायदे हैं?
» फीडबर्नर में अपने ब्लॉग की फीड कैसे जोड़ें?

कैसे करें

आपके पुराने ब्लॉगर चिट्ठे की फीड का पता कुछ इस तरह से होता है – http://example.blogspot.com/feeds/posts/default

जबकि नये डोमेन पर चिट्ठे की फीड का पता कुछ इस तरह होगा -

» http://mydomain.com/feeds/posts/default (यदि आपका चिट्ठा ब्लॉगर पर ही है, केवल पता बदला है)
» http://mydomain.com/feed (यदि नया चिट्ठा स्वयं होस्ट किये गये वर्डप्रैस पर है)

यह फीड पता आप अपने ब्लॉग के ऍड्रैस बार में बने सन्तरी रंग के ऑटोडिस्कवरी फीड आइकॉन को क्लिक करके देख सकते हैं।

फीडबर्नर में फीड पता बदलें

feedburner.com पर जायें तथा वाँछित ब्लॉग का नाम क्लिक करें।

feedburner_blog_feed_edit_1

अब इस चिट्ठे की फीडबर्नर सैटिंग खुल जायेंगी।

 feedburner_blog_feed_edit_2

यहाँ चित्र में दिखाये अनुसार Edit Feed Details… लिंक क्लिक करें जिससे निम्न स्क्रीन प्रदर्शित होगी।

feedburner_blog_feed_edit_3

यहाँ Original Feed नामक बक्से में नये ब्लॉग पते की फीड डालें तथा Save Feed Details बटन क्लिक कर दें।

अब आपके फीडबर्नर पर आपके चिट्ठे के नये पते से फीड आयेगी और पाठक जिन्होंने फीडबर्नर वाली फीड सबस्क्राइब कर रखी है, आपके चिट्ठे की नई पोस्टों को अपने रीडर/ईमेल में पढ़ सकेंगे।

पुराने ब्लॉग की फीड को नये पते पर पुनर्निर्देशित करें

अपने ब्लॉगर डैशबोर्ड में जायें तथा वाँछित चिट्ठे की Settings का लिंक क्लिक करें।

Blogger_feed_edit_1 

इससे निम्न स्क्रीन खुलेगी।

 Blogger_feed_edit_2

यहाँ Site Feed टैब में जायें जिससे निम्न स्क्रीन प्रदर्शित होगी।

Blogger_feed_edit_3

यहाँ Post Feed Redirect URL नामक बक्से में नयी फीड (या फीडबर्नर फीड) का पता देना है। यदि आपने अभी तक फीडबर्नर पर चिट्ठे की फीड नहीं जोड़ी तो इस लेख की सहायता से जोड़ें तथा जो फीडबर्नर पता मिले उसे यहाँ दे दें। इसके पश्चात नीचे संतरी रंग के Save Settings बटन पर चटका लगायें।

अब आपके चिट्ठे की पुरानी फीड नयी फीड (या फीडबर्नर फीड) पर रीडायरैक्ट हो जायेगी तथा आपके पाठक जिन्होंने आपके पुराने ब्लॉग पते वाली फीड सबस्क्राइब कर रखी है, आपके चिट्ठे की नई पोस्टों को अपने रीडर/ईमेल में पढ सकेंगे।

उपर्युक्त प्रक्रिया के बाद आपकी फीड अपडेट होने में कुछ समय लगेगा। एकाध घण्टे बाद आपकी नई पोस्टें ऍग्रीगेटरों तथा आपके पाठकों के फीड रीडरों में दिखायी देने लगेंगी।

यदि आप चाहें तो विभिन्न ऍग्रीगेटरों में अपने ब्लॉग के फीड पते को अपडेट कर सकते हैं (नये फीड पते या फीडबर्नर पते से बदलकर)। वैसे यह चरण वैकल्पिक है क्योंकि पुरानी फीड को नये पते पर रीडायरैक्ट करने से ऍग्रीगेटर स्वयं ही नई पोस्टें दिखाने लगेंगे।

निष्कर्ष

सबसे बढ़िया उपाय है कि आप हमेशा फीडबर्नर सेवा का उपयोग करें तथा अपने ब्लॉग पर सभी जगह उसी का लिंक दें (इस बारे एक अलग लेख लिखा जायेगा)। इससे कभी भी आपका ब्लॉग पता बदले तो आपके नियमित पाठकों को कोई परेशानी नहीं होगी, केवल फीडबर्नर में जाकर नया फीड पता डालने से फीडबर्नर फीड स्वतः अपडेट हो जायेगी। तो यदि आप फीडबर्नर का उपयोग नहीं कर रहे तो उसमें अपने ब्लॉग की फीड जोड़ें तथा ब्लॉगर के डैशबोर्ड में जाकर पुराने ब्लॉग पते की फीड को ऊपर बतायी विधि अनुसार फीडबर्नर पते पर पुनर्निर्देशित कर दें।

क्या यह जानकारी आपके कुछ काम आयी?

यदि हाँ तो आप दो काम कर सकते हैं।

» इस चिट्ठे की फीड को सबस्क्राइब कर नियमित पाठक बनें, फेसबुक पर चिट्ठे से जुड़ें या ट्विटर पर फॉलो करें (मुझे, केवल ब्लॉग को)
» इस लेख बारे अपने ब्लॉग पर लिखें या ट्विटर/फेसबुक आदि सेवाओं पर लिंक साझा करें ताकि अन्य चिट्ठाकार भी इस समस्या का हल जान सकें।

Redirect old blog feed to new blog/feedburner feed

फीडबर्नर में अपना ब्लॉग कैसे जोड़ें?

Thursday, February 17th, 2011

फीडबर्नर आपके ब्लॉग की फीड संशोधित एवं प्रबन्धित करने हेतु एक बेहतरीन सेवा है। यदि आप अब तक इसका प्रयोग नहीं कर रहे तो अवश्य शुरु कर दें। पिछले लेख में मैंने फीडबर्नर के उपयोग, सुविधाओं तथा फायदो की चर्चा की थी।

देखें – फीडबर्नर सेवा क्या है, इसके क्या फायदे हैं तथा इसे क्यों प्रयोग करें?

आज की कक्षा में आपको फीडबर्नर में अपने चिट्ठे की फीड जोड़ने का तरीका बताया जायेगा। चिट्ठे में फीड जोड़ने के बाद आपको फीडबर्नर फीड का एक स्थायी पता मिलेगा जिसे आप अपने ब्लॉग पर लगा सकते हैं तथा पाठकों को दे  सकते हैं।

सबसे पहले फीडबर्नर की साइट पर जायें तथा गूगल खाते द्वारा साइन इन करें। यहाँ पर Burn a feed right this instant लिखे हुये के नीचे बक्से में अपना ब्लॉग पता डालें तथा Next बटन चटकायें।

feedburner_blog_1 

अब आपके सामने आपके चिट्ठे पर उपलब्ध विविध फीड दिखेंगी।

feedburner_blog_2 

इनमें से आप कोई भी चुनकर Next बटन पर चटका लगायें जिससे निम्न स्क्रीन प्रदर्शित होगी।

feedburner_blog_3 

यहाँ Feed Title में चिट्ठे का नाम डालें (संशोधित करें) तथा Feed Address में उपनाम चुनें। ध्यान दें कि किसी ब्लॉग पते की तरह फीडबर्नर फीड का पता भी अद्वितीय होता है तो सम्भावना है कि आपका मनचाहा पता कोई और पहले से ही ले चुका हो। पते में उपनाम ऐसा चुनें जो छोटा हो (बहुत छोटा न सही पर बहुत लम्बा भी न हो), स्पष्ट हो यानि कि जिसकी वर्तनी में शक की गुंजाइश न हो तथा याद रखने में आसान हो। यदि हो सके तो ब्लॉग के पते वाला ही उपनाम रखें, यदि वह उपलब्ध न हो तो ब्लॉग के नाम वाला उपनाम चुनें, यदि वह भी उपलब्ध न हो या ज्यादा लम्बा हो तो कोई मिलता-जुलता संक्षिप्त रुप का उपनाम चुनें। अब Next बटन दबायें जिससे निम्न स्क्रीन प्रदर्शित होगी।

feedburner_blog_4 

बधाई! आपका फीडबर्नर पता तैयार है, अब आप इसे अपने मित्रों तथा पाठकों को बता सकते हैं। अपने फीडबर्नर पते का बटन (विजेट) अपने ब्लॉग पर लगाना तथा ब्लॉग की डिफॉल्ट फीड को इस पते पर पुनर्निर्देशित करना न भूलें। इसके बारे में आगामी लेख में बताया जायेगा।

How to add your blog feed to feedburner

फीडबर्नर क्या है, इसके क्या फायदे हैं तथा इसे क्यों प्रयोग करें?

Thursday, February 17th, 2011

feedburner_logo फीडबर्नर एक वेब/ब्लॉग फीड प्रबन्धन सेवा है जिससे आप अपने ब्लॉग/वेबसाइट की फीड के प्रकाशन को नियन्त्रित/संशोधित कर सकते हैं। यह सेवा सन २००४ में शुरु हुयी थी जिसे २००७ में गूगल ने खरीद लिया। आप अपने ब्लॉगर/वर्डप्रैस चिट्ठे तथा पॉडकास्ट/वीडियोकास्ट आदि की फीड को फीडबर्नर पर जोड़ सकते हैं तथा अपने पाठकों को फीडबर्नर फीड का पता दे सकते हैं। फीडबर्नर द्वारा उपलब्ध अनेक सेवाओं के द्वारा आप अपने चिट्ठे की फीड संशोधित, प्रबन्धित तथा नियन्त्रित कर सकते हैं। इसके द्वारा आप अपने पाठकों को नियमित पाठक बनने हेतु कई विकल्प उपलब्ध करवा सकते हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न सोशल नेटवर्किंग साइटों पर नई ब्लॉग पोस्टों की सूचना दे सकते हैं।

आपको बस फीडबर्नर की साइट पर जाकर अपना ब्लॉग वहाँ जोड़ना होगा, आपको अपने ब्लॉग हेतु फीडबर्नर फीड पता मिलेगा जिसका लिंक, बटन आदि आप अपने चिट्ठे पर लगा सकते हैं तथा पाठकों को दे सकते हैं।

सुविधायें

फीडबर्नर में कई सुविधायें हैं जिनमें से कुछ मुख्य निम्नलिखित हैं।

» फीड स्टैट – फीडबर्नर आपके चिट्ठे से सम्बन्धित साँख्यिकी तथा ट्रैफिक ऍनालाइसिस विस्तृत रुप से उपलब्ध करवाता है। इसमें सबस्क्राइबरों की संख्या, उनके द्वारा प्रयुक्त फीड रीडर तथा ब्राउजर आदि की जानकारी शामिल है। इसके लिय Analyze टैब में जायें। आप चाहें तो डाटा को ऍक्सैल या csv प्रारुप में ऍक्सपोर्ट कर सकते हैं जिससे आगे ऍनालाइसिस में आसानी हो। Publicize टैब में FeedCount नामक विजेट अपने ब्लॉग पर जोड़कर आप चिट्ठे पर सबस्क्राइबरों की संख्या दिखा सकते हैं।

» फीड सबस्क्रिप्शन बटन – Publicize टैब में Chicklet Chooser विलक्ल द्वारा आप अपने चिट्ठे पर फीड सबस्क्रिप्शन हेतु आसानी से पहचाने जा सकने वाला सबस्क्रिप्शन बटन लगा सकते हैं ताकि पाठकों को अपने पसंदीदा रीडर में फीड सबस्क्राइब करने में आसानी हो। इसके अलावा FeedCount बटन पर क्लिक करके भी पाठक फीड सबस्क्राइब कर सकते हैं।

» ईमेल द्वारा पढ़ना – फीडबर्नर ईमेल द्वारा फीड उपलब्ध करवाता है जिससे आपके पाठक आपकी नई पोस्टों की सूचना अपने ईमेल इनबॉक्स में प्राप्त करके पढ़ सकते हैं। यह सुविधा आप Publicize टैब के Email Subscriptions विकल्प द्वारा सक्षम कर सकते हैं। यहाँ से आप अपने ब्लॉग पर ईमेल सबस्क्रिप्शन विजेट भी जोड़ सकते हैं ताकि पाठक ईमेल पता डालकर आसानी से सबस्क्राइब कर सके।

» फीड में पूरी/आंशिक पोस्ट दिखाना – Optimize टैब के Summary Burner विकल्प द्वारा आप यह निर्धारित कर सकते हैं कि फीड में केवल पोस्ट का कुछ अंश आये तथा बाकी पूरा लेख पढ़ने हेतु पाठक चिट्ठे पर ही आये। वैसे आम तौर पर पाठक पूरी पोस्ट फीड रीडर में ही पढ़ना चाहते हैं, बाद में टिप्पणी देने वे बेशक चिट्ठे पर आयें। इसके अलावा मोबाइल फोन पर आदि पर ब्लॉग की बजाय फीड रीडर द्वारा पोस्ट पढ़ने में आसानी रहती है इसलिये इस विकल्प का प्रयोग सोच-समझ कर करें। Publicize टैब के Password Protector विकल्प द्वारा आप अपनी पोस्ट फीड को पासवर्ड द्वारा सुरक्षित भी कर सकते हैं परन्तु कोई विशेष स्थिति छोड़कर आम तौर पर कोई चिट्ठाकार ऐसा करना नहीं चाहेगा।

» सोशल नेटवर्किग -  फीडबर्नर आपको ब्लॉग पोस्टों के सोशल नेटवर्किंग साइटों पर प्रचार हेतु विभिन्न विकल्प उपलब्ध करवाता है। यह आपकी नई ब्लॉग पोस्ट के लिंक आपके ट्विटर खाते पर प्रकाशित कर सकता है। इसके लिये लिये Publicize टैब में Socialize विकल्प में जाकर अपना ट्विटर खाता जोड़ें। इसके अलावा PingShot विकल्प के जरिये यह वेब आधारित फीड रीडर सेवाओं को नई पोस्ट छपने पर पिंग भी कर सकता है।

» बुकमार्क लिंक – Optimize टैब के FeedFlare विकल्प द्वारा आप अपनी ब्लॉग पोस्ट को विभिन्न सोशल नेटवर्किंग साइटों जैसे डिलीशियस आदि पर बुकमार्क, शेयर करने तथा ईमेल करने हेतु लिंक उपलब्ध करवा सकते हैं ताकि पाठक आसानी से आपकी पोस्ट साझा कर सके।

» विज्ञापन – फीडबर्नर आपको अपनी फीड में विज्ञापन (गूगल ऍडसेंस) शामिल करने का विकल्प देता है जिससे कुछ खर्चा-पानी निकल सके। इसके लिये Monetize टैब में जाकर गूगल ऍडसेंस खाता जोड़ें।

» क्रियेटिव कॉमन्स लाइसेंस – यदि आप क्रियेटिव कॉमन्स लाइसेंस का प्रयोग करते हैं तो Pubicize टैब के Creative Commons विकल्प द्वारा फीड के पते पर यह लाइसेंस दिखा सकते हैं।

फायदे

» एक सबसे बड़ा फायदा है कि आपको एक स्थायी फीड पता मिल जाता है। यदि कभी आप अपना ब्लॉग पता बदलते भी हैं तो आपके पाठकों को आपकी पोस्टों की सूचना फीड द्वारा वैसे ही मिलती रहेगी।

» फीडबर्नर में विभिन्न विकल्पों की सहायता से ब्लॉग फीड को सभी ब्राउजरों, फीड रीडरों तथा ईमेल हेतु अनुकूल बनाया जा सकता है ताकि किसी भी प्रकार से फीड प्रयोग करने में कोई समस्या न आये।

» आप इसकी सहायता से अपने चिट्ठे पर नियमित पाठकों (सबस्क्राइबरों) तथा अन्य आवा-जाही का हिसाब-किताब देख सकते हैं। साथ ही क्लिक आदि की जानकारी द्वारा पाठकों की रुचि तथा पोस्टों की लोकप्रियता आदि का अध्ययन कर अपनी चिट्ठाकारी की योजना बना सकते हैं।

» आप पाठकों को चिट्ठे पर फीड तथा ईमेल द्वारा सबस्क्राइब करने हेतु बटन उपलब्ध करवा सकते हैं ताकि पाठकों को आसानी रहे। कुछ ब्राउजरों (जैसे गूगल क्रोम) में ऍड्रैस बार में सन्तरी रंग का ऑटोडिस्कवरी आइकॉन नहीं आता जिससे खासकर नये पाठकों को सबस्क्राइब करने में परेशानी आती है।

» विभिन्न सोशल नेटवर्किग तथा बुकमार्क साइटों पर अपनी ब्लॉग पोस्टों का प्रचार कर सकते हैं। फीडबर्नर द्वारा आपकी पोस्ट का लिंक स्वतः ट्विटर पर भेजने के अलावा पाठक पोस्ट फीड के नीचे दी गयी कडियों की सहायता से पोस्ट को विभिन्न साइटों पर बुकमार्क तथा साझा कर सकते हैं।

वेबसाइटफीडबर्नर.कॉम या फीडबर्नर.गूगल.कॉम

आने वाले दिनों में फीडबर्नर सम्बन्धी विभिन्न लेख लिखूँगा। नवीनतम लेखों की सूचना हेतु नियमित पाठक बनने के लिये इस चिट्ठे की फीडबर्नर फीड यहाँ से लें – http://feeds.feedburner.com/ePandit

कुल मिलाकर चारा फेंक कर ग्राहक फंसाने के लिये ‘चारादाहक’ एक बेहतरीन सेवा है। :-)

What is feedburner and what are its benefits?

ऍण्ड्रॉइड हेतु ब्लॉगर ऍप्लिकेशन जारी

Saturday, February 5th, 2011

Official_Blogger_Android_App ब्लॉगर ने ऍण्ड्रॉइड प्रयोक्ताओं हेतु अपनी आधिकारिक ऍप्लिकेशन जारी की है। इसके प्रयोग से आप ब्लॉग पोस्ट लिख कर उसे पब्लिश कर सकते हैं या फोन में ही ड्राफ्ट के रुप मे सेव कर सकते हैं। हालाँकि इसमें अभी बेसिक सुविधायें ही हैं लेकिन भविष्य में इसके बेहतर होने की उम्मीद है।

इसकी कुछ फीचर हैं:

  • आप एकाधिक ब्लॉगर खाते तथा ब्लॉग जोड़ सकते हैं तथा उनके मध्य आसानी से स्विच कर सकते हैं।
  • ब्लॉग पोस्ट को चाहे तत्काल छाप दें या ड्राफ्ट में सेव कर दें।
  • फोन की गैलरी से कोई भी फोटो ब्लॉगर पर अपलोड कर सकते हैं या अपने फोन कैमरा से फोटो खींचकर उसे ब्लॉग पोस्ट में डाल सकते हैं। साथ ही गैलरी के शेयर विकल्पों में ब्लॉगर भी जुड़ जाता है। हालाँकि इसमें अन्य ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म (वर्डप्रैस आदि) की ऍप्लिकेशनों की तरह वीडियो अपलोडिंग की सुविधा नहीं है।
  • लोकेशन शेयर करने की सुविधा द्वारा आप पोस्ट में अपनी लोकेशन जोड़ सकते हैं।

इसे आप ऍण्ड्रॉइड मार्केट से यहाँ से डाउनलोड कर सकते हैं। बाद में यह अन्य स्मार्टफोन प्लेटफॉर्म हेतु भी जारी होगी। ऍप्लिकेशन बारे पूरी जानकारी ब्लॉगर बज्ज पर यहाँ देखें। वैसे सिम्बियन के लिये जो वर्डप्रैस ऍप है वह भी बहुत बेसिक किस्म की है इसलिये उसके साथ मेरे अनुभव के अनुसार फिलहाल ब्लॉगर के वेब इण्टरफेस से ब्लॉगिंग ही ज्यादा सुविधाजनक है।

ऍण्ड्रॉइड के लिये थर्ड पार्टी ब्लॉगर ऍप्लिकेशन ब्लॉगअवे तथा ब्लॉगर-ड्रॉइड नाम से पहले से उपलब्ध हैं।

(चित्र साभार: ब्लॉगर बज्ज से)