कुछ समय से भोमियो तथा चिट्ठाजगत.कॉम द्वारा द्वारा हिन्दी चिट्ठों को रोमनागरी में पढ़ने के लिए लिप्यंतरण (Transliteration) सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। कुछ साथी इस सुविधा को बेकार बताने पर तुले हुए हैं, वे दरअसल इसका मर्म नहीं समझते। अब जैसा कि मैं पहले भी बता चुका हूँ दुनिया में सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैण्ड, ज़िम्बाब्वे, दक्षिण अफ़्रीका, मालदीव, मॉरीशस, फ़िजी, गुयाना, दुबई, मलेशिया, सूरीनाम, बर्मा (म्यांमार) आदि से लेकर पाकिस्तान, अफगानिस्तान आदि तक कई देश हैं जहाँ के लोग हिन्दी तो समझ लेते हैं लेकिन देवनागरी नहीं पढ़ सकते। ऐसे लोगों के लिए यह सुविधा निश्चय ही उपयोगी होगी।
उदाहरण के लिए मैं दैनिक जागरण में कुछ माह पूर्व छपे एक समाचार का संदर्भ दे रहा हूँ।
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कैरीबियाई देश गुयाना में भारतीय मूल के ४३% से ज्यादा लोग बसे हुए हैं। वे धड़ल्ले से संस्कृत में श्लोक सुनाते हैं, भजन गाते हैं और हिन्दी फिल्मों के मुरीद हैं, लेकिन अफसोस इस बात का है कि लोग हिन्दी को रोमन लिपि से जिन्दा रखे हुए हैं और देवनागरी लिपि अपना अस्तित्व खो चुकी है।

डेढ़ सौ साल पहले गिरमिटिया मजदूर के रुप में ये भारतीय गुयाना गए और फिर वहीं बस गए। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार से गए इन भारतीयों ने अपने धर्म, संस्कृति और रीति-रिवाज को आज भी मानो सीने से लगा रखा है। उनके घरों में हिन्दी बोली जाती है खासकर नाती, पोते का दादा, दादी और नाना, नानी से आज भी हिन्दी में सम्वाद होता है। बच्चों का नामकरण पण्डित कराते हैं और उनके नाम हिन्दी में रखे जाते हैं पर वे देवनागरी में नहीं, बल्कि रोमन हिन्दी में लिखे जाते हैं मसलन अंग्रेजी के अक्षर से हिन्दी का उच्चारण किया जाता है। उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत के साथ गए प्रतिनिधिमण्डल की अगवानी करने आई राधा प्रसाद अली ने बताया कि यहाँ बड़े धूम-धाम से दीवाली और होली मनाई जाती है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन नदी में स्नान करके पूजा, पाठ किया जाता है और इसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। मन्दिरों में सवेरे, शाम पूजा, अर्चना होती है जिसमें सभी भजन कीर्तन करते हैं। गायत्री मन्त्र का धड़ल्ले से जाप करने वाली अली ने अपने मुसलमान दोस्त से छह वर्ष पहले हिन्दू रीति रिवाज से विवाह रचाया और फिर ससुराल में निकाहनामा पढ़वाया। उसकी साढ़े तीन साल की बिटिया है। पण्डित ने उसकी बिटिया का नाम पार्वती रख दिया। जॉर्ज टाउन और उसके आसपास के इलाकों में जाने पर पता लगा कि अगर किसी हिन्दू के घर की पहचान करनी हो तो बस एक बात का ध्यान रखना काफी है। जिस घर के सामने बांस में ध्वज फहराता दिखे उसे आँख मूँदकर हिन्दू का घर मान लीजिए मसलन वह भारतीय मूल का है। दरअसल यहाँ भारतीय और हिन्दू एक दूसरे के पर्याय के रुप में जाने जाते हैं। पेशे से ड्राइवर राम दशरथ के पूर्वज उत्तर प्रदेश से यहाँ आए थे। वह किस शहर या गाँव के थे राम दशरथ को इसका पता नहीं है, लेकिन अब उसके मन में कभी कभी भारत जाने की इच्छा होती है। राम दशरथ ने कहा कि अब तो हम गुयाना के वासी हैं और हमें इस पर गर्व है। यहाँ पर अफ्रीका, पुर्तगाल और चीन के लोग रहते हैं। उनके दादा परदादा भी मजदूरी करने आए थे और फिर वे यहीं पर बस गए। हमें इससे फर्क नहीं पड़ता कौन कहाँ से आया है।
गुयाना के एक बड़े डिपार्टमैण्टल स्टोर में काम करने वाली अनिता ने बड़े आत्मविश्वास से कहा कि ‘यू हैव कम फ्रॉम इण्डिया’, सबने एक साथ हामी भरी। फिर क्या था अनिता उनके साथ हो ली और खरीददारी में उनकी मदद करने के साथ हिन्दी में सम्वाद करती रही। उसने स्वीकार किया कि देवनागरी के बारे में उसे पता नहीं हाँ वहाँ अंग्रेजी के अक्षर से हिन्दी और संस्कृत में सम्वाद करते हैं। आलम यह है कि रामायण, गीता, दुर्गा सप्तशती और देवी, देवताओं के लिए गाई जाने वाली आरती की किताबें रोमन हिन्दी में बाजारों में उपलब्ध हैं।
समाचार: २० नवम्बर २००६, दैनिक जागरण से साभार
चित्र: वर्ल्ड ऑफ आईलैण्ड्स से साभार
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उपरोक्त समाचार पढ़कर वाकई अफ़सोस होता है कि कई देशों में देवनागरी या तो लुप्त हो चुकी है या लुप्त होने की कगार पर है। खैर, उपरोक्त उदाहरण से भोमियो और चिट्ठाजगत.कॉम आदि की लिप्यंतरण सेवाओँ की सार्थकता सिद्ध होती है।
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